Gang busted : UP STF की बड़ी कार्रवाई, ITI परीक्षा में सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़, प्रिंसिपल समेत 10 गिरफ्तार

प्रयागराज, 31 जुलाई 2026। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) ने परीक्षा माफियाओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रयागराज के राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) नैनी में आयोजित वार्षिक एवं अखिल भारतीय व्यावसायिक परीक्षा के दौरान सक्रिय एक संगठित सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़ किया है। एसटीएफ ने इस मामले में संस्थान के प्रिंसिपल, परीक्षा प्रभारी, कई अनुदेशकों तथा सॉल्वर सहित कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि यह गिरोह परीक्षार्थियों से मोटी रकम लेकर उनकी जगह सॉल्वर बैठाकर कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) पास कराने का अवैध कारोबार चला रहा था।
एसटीएफ के अनुसार यह कार्रवाई लंबे समय से मिल रही गोपनीय सूचनाओं और तकनीकी निगरानी के आधार पर की गई। जांच में सामने आया कि राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान नैनी में आयोजित कंप्यूटर आधारित परीक्षा के दौरान कुछ अभ्यर्थियों की जगह दूसरे व्यक्तियों को बैठाकर परीक्षा दिलाई जा रही थी। सूचना की पुष्टि होने के बाद एसटीएफ ने योजनाबद्ध तरीके से छापा मारकर पूरे गिरोह को रंगे हाथ पकड़ लिया।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में शिवम कुमार पुत्र जटाशंकर बिंद, निवासी बरवां शुक्लपुर, थाना मेजा, जनपद प्रयागराज, रणविजय सिंह, जय सिंह, जितेंद्र पटेल तथा दिलीप कुमार पटेल शामिल हैं, जिन्हें सॉल्वर के रूप में गिरफ्तार किया गया। इनके अलावा अशोक कुमार (प्रिंसिपल), रवि प्रकाश (परीक्षा प्रभारी), फूल प्रकाश (अनुदेशक), धीरज कुमार शर्मा (अनुदेशक), राजेश कुमार तथा राजकुमार मौर्य को भी गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि ये सभी मिलकर परीक्षा में धांधली कराने के संगठित नेटवर्क का हिस्सा थे।
एसटीएफ के अधिकारियों के अनुसार गिरोह परीक्षार्थियों से लाखों रुपये लेकर उन्हें परीक्षा में पास कराने का भरोसा देता था। इसके बाद वास्तविक अभ्यर्थियों के स्थान पर प्रशिक्षित सॉल्वर को परीक्षा केंद्र पर बैठाया जाता था। चूंकि परीक्षा कंप्यूटर आधारित थी, इसलिए गिरोह ने पहचान सत्यापन की प्रक्रिया में भी कथित रूप से हेरफेर करने की व्यवस्था कर रखी थी। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इस अवैध गतिविधि को सफल बनाने के लिए संस्थान के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध रही।
छापेमारी के दौरान एसटीएफ ने आरोपियों के कब्जे से परीक्षा से संबंधित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड, पहचान संबंधी सामग्री तथा 5 लाख 10 हजार रुपये नकद बरामद किए। जांच एजेंसी का कहना है कि यह धनराशि अभ्यर्थियों से परीक्षा पास कराने के बदले वसूली गई थी। बरामद दस्तावेजों की फॉरेंसिक और तकनीकी जांच कराई जाएगी, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके।
एसटीएफ ने सभी आरोपियों को राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान नैनी परिसर स्थित कौशल विकास भवन से गिरफ्तार किया। कार्रवाई के दौरान परीक्षा केंद्र पर मौजूद कई अभ्यर्थियों और कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने अब तक कितनी परीक्षाओं में धांधली की है और कितने अभ्यर्थियों से अवैध वसूली की गई।
जांच अधिकारियों का मानना है कि यह केवल एक परीक्षा केंद्र तक सीमित मामला नहीं हो सकता। संभावना जताई जा रही है कि इस नेटवर्क के तार अन्य जिलों या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से भी जुड़े हो सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए एसटीएफ पूरे प्रकरण की गहराई से जांच कर रही है। आरोपियों के मोबाइल फोन, लैपटॉप, डिजिटल उपकरण, बैंक खातों और कॉल रिकॉर्ड की भी जांच की जाएगी।

एसटीएफ अधिकारियों ने बताया कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। किसी भी अभ्यर्थी के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि जांच में अन्य अधिकारियों, कर्मचारियों या बाहरी व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
परीक्षा माफियाओं के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार लगातार सख्त रुख अपनाए हुए है। पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न भर्ती परीक्षाओं और शैक्षणिक संस्थानों में हुई अनियमितताओं पर कार्रवाई करते हुए कई गिरोहों का पर्दाफाश किया जा चुका है। एसटीएफ और अन्य जांच एजेंसियां लगातार ऐसे संगठित नेटवर्क पर नजर बनाए हुए हैं, जो अभ्यर्थियों से पैसे लेकर परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं योग्य और मेहनती अभ्यर्थियों के साथ अन्याय करती हैं तथा परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाती हैं। इसलिए ऐसे मामलों में त्वरित जांच और कठोर दंड आवश्यक है, जिससे भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस प्रकार की अवैध गतिविधियों में शामिल होने का साहस न कर सके।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े प्रासंगिक प्रावधानों तथा अन्य लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। दोष सिद्ध होने पर कठोर कारावास और आर्थिक दंड दोनों का प्रावधान है।
एसटीएफ अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन कौन कर रहा था, धन का लेन-देन कैसे होता था और किन-किन अभ्यर्थियों को इस अवैध तरीके से परीक्षा पास कराने का प्रयास किया गया। जांच एजेंसी उन अभ्यर्थियों की भी पहचान कर रही है जिन्होंने कथित रूप से पैसे देकर इस गिरोह की सेवाएं ली थीं।
इस कार्रवाई को उत्तर प्रदेश में परीक्षा माफियाओं के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए भविष्य में भी इस प्रकार के अभियान जारी रहेंगे। साथ ही अभ्यर्थियों से अपील की गई है कि वे किसी भी प्रकार के लालच या अवैध माध्यम का सहारा न लें तथा यदि परीक्षा में किसी प्रकार की अनियमितता की जानकारी मिले तो उसकी सूचना तत्काल संबंधित एजेंसियों को दें।
फिलहाल सभी गिरफ्तार आरोपियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जा रही है। एसटीएफ का कहना है कि जांच अभी जारी है और मामले में आगे और भी खुलासे होने की संभावना है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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