Grand Event : पच्चीस वर्षों बाद शनिवार को मनाई जा रही शनि जयंती, मंदिरों में विशेष पूजा और विशाल आयोजन ?

Grand Event : पच्चीस वर्षों बाद शनिवार को मनाई जा रही शनि जयंती, मंदिरों में विशेष पूजा और विशाल आयोजन

Grand Event : पच्चीस वर्षों बाद शनिवार को मनाई जा रही शनि जयंती, मंदिरों में विशेष पूजा और विशाल आयोजन
Grand Event : पच्चीस वर्षों बाद शनिवार को मनाई जा रही शनि जयंती, मंदिरों में विशेष पूजा और विशाल आयोजन

मध्यप्रदेश के दमोह जिले में इस वर्ष शनि जयंती का पर्व अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक आस्था के साथ मनाया जा रहा है। ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि पर पड़ने वाली शनि जयंती इस बार कई विशेष संयोग लेकर आई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लगभग 25 वर्षों बाद शनि जयंती शनिवार के दिन पड़ रही है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है। इस दिन ज्येष्ठ अमावस्या, वट सावित्री व्रत और शनि जयंती जैसे तीन महत्वपूर्ण शुभ योग एक साथ बनने से श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दे रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि-विधान से भगवान शनिदेव की पूजा-अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन के संकट दूर होते हैं।

दमोह के एसपीएम नगर स्थित श्री शिव शनि हनुमान मंदिर में शनि जयंती के अवसर पर विशेष धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं। मंदिर परिसर को आकर्षक रूप से सजाया गया है तथा भक्तों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। मंदिर समिति द्वारा श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर धर्म लाभ लेने की अपील की गई है। पूरे मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का वातावरण बना हुआ है तथा भक्त सुबह से ही शनिदेव के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शनिदेव का जन्म ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को हुआ था। इसी कारण प्रत्येक वर्ष इस दिन शनि जयंती का पर्व मनाया जाता है। इस बार शनिवार के दिन यह पर्व पड़ने से इसका प्रभाव और अधिक शुभ माना जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों और विद्वानों के अनुसार यह दुर्लभ संयोग भक्तों के लिए विशेष फलदायी सिद्ध हो सकता है। माना जाता है कि इस दिन शनिदेव की सच्चे मन से पूजा करने पर शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या जैसी समस्याओं से राहत मिलती है।

मंदिर के पुजारी पंडित बालकृष्ण शास्त्री एवं आचार्य पंडित आशुतोष गौतम शास्त्री ने बताया कि शनि जयंती के दिन पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि भक्तों को प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए और श्रद्धा भाव से शनिदेव का पूजन करना चाहिए। पूजा के दौरान शनिदेव को तेल, फूलों की माला, काली उड़द, काले तिल तथा प्रसाद अर्पित करना शुभ माना गया है। इसके बाद तेल का दीपक जलाकर शनि चालीसा और शनि मंत्रों का पाठ करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है।

पंडितों के अनुसार इस दिन व्रत रखने और दान-पुण्य करने का भी अत्यंत महत्व है। मान्यता है कि गरीबों और जरूरतमंदों को दान देने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं तथा जीवन के कष्टों को दूर करते हैं। शनि जयंती पर विशेष रूप से काले वस्त्र, काला तिल, उड़द, लोहे की वस्तुएं तथा तेल का दान शुभ माना गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार शनिदेव मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। इसलिए इस दिन अच्छे कर्म करने और जरूरतमंदों की सहायता करने का विशेष महत्व बताया गया है।

इस बार शनि जयंती पर सर्वार्थ सिद्धि योग का भी विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह योग अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस योग में किए गए मांगलिक कार्य, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान सफल होते हैं। यही कारण है कि श्रद्धालु इस दिन विशेष पूजा और अनुष्ठान कराने के लिए मंदिरों में पहुंच रहे हैं। कई श्रद्धालु शनिदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए व्रत रख रहे हैं और दिनभर पूजा-पाठ में लीन हैं।

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अमावस्या तिथि का भी धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। पंडित बालकृष्ण शास्त्री और पंडित आशुतोष गौतम शास्त्री के अनुसार अमावस्या तिथि पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है। इस दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए पूजा और दान करने से परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। कई श्रद्धालु इस अवसर पर नदी और सरोवरों में स्नान कर पितरों का तर्पण भी कर रहे हैं।

शनि जयंती के अवसर पर श्री शिव शनि हनुमान मंदिर में दिनभर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मंदिर में विशेष पूजन, अभिषेक और हवन का आयोजन किया जाएगा। शाम चार बजे से विशेष हवन प्रारंभ होगा, जिसके पश्चात महाआरती की जाएगी। आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। इसके बाद शाम छह बजे से विशाल भंडारे का आयोजन किया गया है, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया जाएगा।

इस वर्ष कार्यक्रम की विशेष आकर्षण सिंगपुर की प्रसिद्ध रामधुन मंडली भी रहेगी। यह मंडली शाम चार बजे से रात्रि नौ बजे तक भजन, रामधुन और धार्मिक प्रस्तुतियां देगी। धार्मिक संगीत और भक्ति गीतों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहेगा। मंदिर समिति के सदस्यों ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, बैठने और सुरक्षा की समुचित व्यवस्था की गई है।

शनि जयंती को लेकर शहर के अन्य मंदिरों में भी विशेष तैयारियां की गई हैं। भक्त शनिदेव के दर्शन के लिए सुबह से ही मंदिरों में पहुंच रहे हैं। कई लोग अपने परिवार की सुख-समृद्धि और शनि दोषों से मुक्ति की कामना लेकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। धार्मिक आयोजनों के कारण शहर में उत्सव जैसा वातावरण दिखाई दे रहा है।

धार्मिक विद्वानों का मानना है कि शनि जयंती केवल पूजा-पाठ का पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और अच्छे कर्मों की प्रेरणा देने वाला अवसर भी है। शनिदेव न्याय के देवता माने जाते हैं और वे व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। इसलिए इस दिन लोगों को सत्य, न्याय और सेवा के मार्ग पर चलने का संकल्प लेना चाहिए।

शनि जयंती, ज्येष्ठ अमावस्या और वट सावित्री व्रत के त्रिवेणी संयोग ने इस पर्व को और अधिक पावन बना दिया है। श्रद्धालु पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ इस पर्व को मना रहे हैं। मंदिरों में हो रहे विशेष धार्मिक आयोजन और भक्तों की भारी भीड़ यह दर्शाती है कि आज भी भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं के प्रति लोगों की आस्था गहरी बनी हुई है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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