Guidance : हापुड़ में पर्यावरण, वृक्षारोपण और गंगा संरक्षण पर संयुक्त समीक्षा बैठक, अधिकारियों को दिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश और लक्ष्य

हापुड़। जनपद हापुड़ में पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण अभियान एवं गंगा नदी की स्वच्छता को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से जिला पर्यावरण समिति, जिला वृक्षारोपण समिति एवं जिला गंगा समिति की संयुक्त बैठक का आयोजन कलेक्ट्रेट सभागार में किया गया। यह बैठक जिलाधिकारी के निर्देशन में मुख्य विकास अधिकारी सुश्री श्रुति शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण अभियान की प्रगति, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) के नए नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा सावन माह के दौरान गंगा घाटों की स्वच्छता एवं जनजागरूकता से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी श्री गौतम सिंह, अपर सांख्यिकी अधिकारी श्री विरेन्द्र कुमार, जिला पंचायत राज अधिकारी श्री शिव बिहारी शुक्ला, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, हापुड़ के प्रतिनिधि श्री विपुल कुमार, पर्यावरणविद् श्री भारत भूषण (लोक भारती) सहित जनपद के विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की तथा पर्यावरण संरक्षण और गंगा स्वच्छता अभियान को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सुझाव भी दिए।
बैठक के दौरान सबसे पहले जिला वृक्षारोपण समिति की समीक्षा की गई। प्रभागीय वनाधिकारी ने जानकारी दी कि वर्ष 2026-27 के लिए जनपद हापुड़ को 12,58,433 पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जबकि सभी विभागों के समन्वित प्रयासों से 13,50,947 पौधों का सफलतापूर्वक रोपण किया गया। निर्धारित लक्ष्य से अधिक पौधारोपण होने पर उन्होंने सभी विभागों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया और इसे जनपद की एक बड़ी उपलब्धि बताया।
उन्होंने कहा कि केवल पौधारोपण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पौधों का संरक्षण और उनकी नियमित देखभाल भी उतनी ही आवश्यक है। इसके लिए जियोटैगिंग का कार्य तेजी से कराया जा रहा है। बैठक में बताया गया कि वर्तमान समय तक लगभग 50 प्रतिशत पौधों की जियोटैगिंग पूरी हो चुकी है। मुख्य विकास अधिकारी ने सभी विभागों को निर्देशित किया कि जियोटैगिंग का शेष कार्य एक सप्ताह के भीतर हर हाल में पूरा किया जाए, ताकि लगाए गए पौधों की निगरानी प्रभावी ढंग से की जा सके और उनके संरक्षण की वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन संभव हो सके।
बैठक में वृक्षारोपण अभियान की सफलता पर संतोष व्यक्त करते हुए अधिकारियों ने कहा कि हरित पर्यावरण का निर्माण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए आम नागरिकों की भागीदारी भी आवश्यक है। लोगों को पौधे लगाने के साथ-साथ उनकी नियमित देखभाल के लिए भी प्रेरित किया जाए। विद्यालयों, ग्राम पंचायतों, स्वयंसेवी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों को भी इस अभियान से जोड़ने पर बल दिया गया।
इसके बाद जिला पर्यावरण समिति की बैठक में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम-2026 के लागू होने के बाद सभी संबंधित विभागों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ गई है। उन्होंने निर्देश दिए कि जनपद के सभी विभाग इन नए नियमों का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित करें तथा नगर निकायों एवं ग्राम पंचायतों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जाए।
बैठक में प्लास्टिक कचरे के बढ़ते दुष्प्रभावों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप प्लास्टिक अपशिष्ट का वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए। एकल-उपयोग (सिंगल यूज) प्लास्टिक के उपयोग को रोकने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए तथा लोगों को प्लास्टिक के स्थान पर पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए।

मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि केवल जागरूकता अभियान चलाना पर्याप्त नहीं होगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई भी की जाए, ताकि पर्यावरण संरक्षण संबंधी नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित हो सके। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि बाजारों, सार्वजनिक स्थलों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर नियमित निरीक्षण कर प्रतिबंधित प्लास्टिक के उपयोग पर रोक लगाई जाए और आवश्यकतानुसार दंडात्मक कार्रवाई भी की जाए।
बैठक में पर्यावरणविद् श्री भारत भूषण ने पर्यावरण संरक्षण में जनसहभागिता की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि स्वच्छ पर्यावरण और हरित भविष्य के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने विद्यालयों, कॉलेजों एवं सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण संबंधी जनजागरूकता कार्यक्रमों को और अधिक व्यापक बनाने का सुझाव दिया।
इसके बाद जिला गंगा समिति की बैठक में सावन माह के दौरान गंगा घाटों पर स्वच्छता, सुरक्षा और जनजागरूकता की तैयारियों की समीक्षा की गई। मुख्य विकास अधिकारी ने जिला पंचायत राज अधिकारी एवं खंड विकास अधिकारी गढ़मुक्तेश्वर को निर्देशित किया कि सावन माह में गंगा घाटों पर पर्याप्त संख्या में गंगा प्रहरी एवं गंगा मित्रों की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि सावन के दौरान लाखों श्रद्धालु और कांवड़िये गंगा घाटों पर पहुंचते हैं। ऐसे में गंगा प्रहरियों और गंगा मित्रों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। वे श्रद्धालुओं को गंगा नदी की स्वच्छता बनाए रखने के लिए जागरूक करेंगे तथा उन्हें निर्धारित स्थानों पर ही पूजा सामग्री एवं अन्य वस्तुओं का विसर्जन करने के लिए प्रेरित करेंगे। साथ ही घाटों पर कूड़ा-कचरा न फैलाने और स्वच्छता बनाए रखने का संदेश भी देंगे।
बैठक में निर्देश दिए गए कि गंगा घाटों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए तथा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्याप्त संख्या में कूड़ेदान लगाए जाएं। नगर निकायों और संबंधित विभागों को घाटों की साफ-सफाई, कचरा संग्रहण और उसके उचित निस्तारण की प्रभावी व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने कहा कि गंगा की स्वच्छता केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व भी है।
मुख्य विकास अधिकारी ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने पर बल देते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और गंगा स्वच्छता जैसे अभियान तभी सफल होंगे, जब सभी विभाग निर्धारित समय सीमा में अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करेंगे। उन्होंने प्रत्येक विभाग को नियमित समीक्षा करने और कार्यों की प्रगति रिपोर्ट समय-समय पर प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि पर्यावरण संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त अभियान, वृक्षारोपण और गंगा स्वच्छता से संबंधित जनजागरूकता कार्यक्रमों को ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में और अधिक व्यापक बनाया जाएगा। इसके लिए स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक संगठनों, विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा स्थानीय निकायों का सहयोग लिया जाएगा ताकि अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
अंत में मुख्य विकास अधिकारी ने सभी अधिकारियों से कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास, स्वच्छ गंगा और स्वच्छ जनपद के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पूरी निष्ठा, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी विभागों के समन्वित प्रयासों से हापुड़ पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और गंगा स्वच्छता के क्षेत्र में प्रदेश के अग्रणी जनपदों में अपनी पहचान बनाएगा। बैठक का समापन सभी विभागों द्वारा पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और स्वच्छ गंगा के लिए निरंतर कार्य करने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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