
हापुड़।
पिलखुवा कोतवाली क्षेत्र में खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर एक वैद्य से ठगी करने के मामले में ग्रामीणों ने दो संदिग्ध आरोपियों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। बताया जा रहा है कि तीन दिन पहले देसी दवाई बेचने वाले वैद्य सूफी से आरोपियों ने खुद को सीबीआई का अधिकारी बताकर करीब 70 हजार रुपये और सोने की अंगूठी ले ली थी। इसके बाद दोनों मौके से फरार हो गए थे। आरोप है कि सोमवार सुबह दोनों आरोपी एक बार फिर वैद्य के घर पहुंचे और इस बार उससे पांच लाख रुपये की मांग करने लगे।
मामले की जानकारी सामने आने के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों को जब आरोपियों की गतिविधियों पर संदेह हुआ तो उन्होंने मौके पर एकत्र होकर दोनों पर नजर रखनी शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि ग्रामीणों की भीड़ देखकर दोनों आरोपी वहां से भागने का प्रयास करने लगे। ग्रामीणों ने उनका पीछा किया और काफी प्रयास के बाद दोनों को पकड़ लिया। इसके बाद घटना की सूचना पुलिस को दी गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी।
जानकारी के अनुसार, पिलखुवा क्षेत्र में देसी दवाइयां बेचने का काम करने वाले वैद्य सूफी के पास तीन दिन पहले दो लोग पहुंचे थे। आरोप है कि दोनों ने खुद को केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई का अधिकारी बताया और वैद्य को अपने प्रभाव में लेने का प्रयास किया। कथित तौर पर आरोपियों ने किसी जांच या कार्रवाई का हवाला देते हुए वैद्य से 70 हजार रुपये की रकम और सोने की अंगूठी ले ली थी। इसके बाद दोनों आरोपी वहां से निकल गए।
वैद्य और उसके आसपास के लोगों को उस समय मामले की पूरी जानकारी नहीं हो सकी। हालांकि बाद में जब आरोपियों की गतिविधियों को लेकर संदेह बढ़ा तो मामला चर्चा में आने लगा। इसी बीच सोमवार सुबह दोनों आरोपी दोबारा वैद्य के घर पहुंच गए। आरोप है कि इस बार उन्होंने वैद्य से पांच लाख रुपये की मांग की। उन्होंने अधिकारियों के आने का झांसा देकर वैद्य पर दबाव बनाने की कोशिश की।
बताया जा रहा है कि आरोपियों की दोबारा क्षेत्र में मौजूदगी देखकर कुछ ग्रामीणों को शक हुआ। ग्रामीणों ने दोनों की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू कर दी। जैसे-जैसे लोगों को मामले की जानकारी होती गई, मौके पर भीड़ जुटने लगी। ग्रामीणों की बढ़ती संख्या देखकर दोनों आरोपी घबरा गए और वहां से भागने का प्रयास करने लगे।
इसके बाद ग्रामीणों ने दोनों आरोपियों का पीछा किया। काफी दूर तक पीछा करने के बाद ग्रामीणों ने दोनों को पकड़ लिया। ग्रामीणों ने दोनों आरोपियों को मौके पर ही रोक लिया और मामले की सूचना पुलिस को दी। कुछ ही समय बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए थाने ले गई।
पुलिस के पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने पूरे मामले की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी। पीड़ित वैद्य की ओर से भी घटना के संबंध में जानकारी पुलिस को दी गई। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि उन्होंने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर वैद्य से किस आधार पर रकम और सोने की अंगूठी ली थी।
मामले में एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि पकड़े गए आरोपियों में से एक के होमगार्ड होने की जानकारी सामने आई है और वह दूसरे जनपद में तैनात बताया जा रहा है। हालांकि इस संबंध में पुलिस की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपी वास्तव में होमगार्ड है या उसके नाम पर कोई अन्य व्यक्ति ठगी की गतिविधियों में शामिल था।
पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि दोनों आरोपियों का किसी संगठित गिरोह से संबंध तो नहीं है। खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों से रकम ऐंठने के आरोप को पुलिस गंभीरता से देख रही है। पूछताछ के दौरान आरोपियों से उनके साथियों, पूर्व की गतिविधियों और इस तरह की अन्य घटनाओं के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा सकती है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक,
घटना के बाद क्षेत्र में ठगी करने वाले लोगों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति के पास कोई सरकारी अधिकारी बनकर आता है और जांच या कार्रवाई के नाम पर पैसे की मांग करता है तो उसकी पहचान की पुष्टि करना बेहद जरूरी है। किसी भी परिस्थिति में केवल डर या दबाव में आकर रकम देने के बजाय पुलिस को सूचना देना अधिक सुरक्षित कदम हो सकता है।
इस मामले में ग्रामीणों की सतर्कता भी महत्वपूर्ण रही। यदि ग्रामीणों को दोनों आरोपियों की गतिविधियों पर संदेह नहीं होता तो कथित तौर पर वे दोबारा वैद्य के घर पहुंचकर पांच लाख रुपये की मांग करने में सफल हो सकते थे। ग्रामीणों ने संदिग्ध गतिविधि को देखते हुए एकजुट होकर दोनों का पीछा किया और पुलिस को सूचना देकर उन्हें सौंप दिया।
पुलिस के सामने अब यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि तीन दिन पहले हुई कथित ठगी और सोमवार को हुई पांच लाख रुपये की मांग के पीछे पूरी योजना क्या थी। आरोपियों ने वैद्य को सीबीआई अधिकारी होने का विश्वास कैसे दिलाया, उन्होंने कथित तौर पर 70 हजार रुपये और सोने की अंगूठी किस तरह हासिल की तथा दोबारा पांच लाख रुपये मांगने के पीछे उनका उद्देश्य क्या था, इन सभी बिंदुओं पर पुलिस जांच कर रही है।
पुलिस पीड़ित की तहरीर के आधार पर आगे की कार्रवाई में जुटी है। दोनों आरोपियों से पूछताछ के साथ-साथ उनके पहचान संबंधी दस्तावेजों और अन्य विवरणों की भी जांच की जा सकती है। यदि आरोपियों के खिलाफ पूर्व में भी किसी प्रकार की शिकायत या मामला दर्ज होने की जानकारी मिलती है तो पुलिस उस दिशा में भी जांच आगे बढ़ा सकती है।
मामले को लेकर पुलिस का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है और पूछताछ के आधार पर तथ्यों को स्पष्ट किया जाएगा। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपियों ने किसी अन्य व्यक्ति के साथ इसी तरह की ठगी तो नहीं की है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि कथित रूप से सरकारी अधिकारी बनकर लोगों को डराने और पैसे मांगने के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है।
घटना के बाद पिलखुवा क्षेत्र में लोगों के बीच सतर्कता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा सरकारी अधिकारी बनकर दबाव बनाने की स्थिति में उसकी पहचान और विभाग की पुष्टि करना आवश्यक है। ग्रामीणों की तत्परता से दोनों संदिग्धों को पुलिस तक पहुंचाया जा सका, जिसके बाद पुलिस अब पूरे मामले की तह तक पहुंचने में जुटी है।
फिलहाल दोनों आरोपियों को पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। एक आरोपी के होमगार्ड होने की सामने आई जानकारी की भी जांच की जा रही है। पुलिस पीड़ित की तहरीर और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई करेगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपियों ने कथित तौर पर किस योजना के तहत वैद्य को निशाना बनाया था और इस पूरे घटनाक्रम में उनके साथ और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
पिलखुवा कोतवाली क्षेत्र में सामने आए इस मामले ने एक बार फिर लोगों को ऐसे ठगों से सावधान रहने का संदेश दिया है, जो सरकारी अधिकारी या किसी जांच एजेंसी का नाम लेकर लोगों पर दबाव बनाने का प्रयास करते हैं। पुलिस की जांच के बाद मामले से जुड़े अन्य तथ्य सामने आने की उम्मीद है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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