
फतेहपुर,
बरसात के मौसम में होने वाली बीमारियों से बचाव, स्वच्छता के प्रति जागरूकता, नशामुक्ति और जल संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से गुरुवार को कुसुम्भी क्षेत्र में विशेष जागरूकता एवं औषधि वितरण अभियान चलाया गया। यह अभियान इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी, आरोग्य भारती और दि होमियोपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के तत्वावधान तथा डॉ. सत्यनारायण सेवा फाउंडेशन के संयोजकत्व में आयोजित किया गया।
अभियान का नेतृत्व इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी के चेयरमैन फतेहपुर एवं उत्तर प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य तथा आरोग्य भारती के जिला सचिव डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने किया। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों को बरसात के मौसम में होने वाली बीमारियों से बचाव और स्वास्थ्य के प्रति आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी गई। साथ ही बच्चों को स्वच्छता, नशामुक्ति और जल संरक्षण के प्रति जागरूक करते हुए उन्हें सामाजिक जिम्मेदारियों का महत्व समझाया गया।
अभियान के अंतर्गत कुसुम्भी क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों में कुल 553 बच्चों को बरसात के मौसम में होने वाली बीमारियों से बचाव एवं रोगप्रतिरोधक क्षमता विकसित करने में सहायक बताई गई होम्योपैथिक औषधि उपलब्ध कराई गई। कार्यक्रम के तहत पीएम श्री कम्पोजिट विद्यालय कुसुम्भी हसवा के 283 बच्चे, आंगनबाड़ी के 43 बच्चे, बाल वाटिका के 15 बच्चे, राजकीय हाईस्कूल कुसुम्भी के 70 बच्चे, प्राथमिक विद्यालय कुसुम्भी द्वितीय के 104 बच्चे तथा प्राथमिक विद्यालय कासिमपुर के 38 बच्चे शामिल रहे।
इस अवसर पर डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने बच्चों को बरसात के मौसम में स्वास्थ्य के प्रति विशेष सावधानी बरतने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वर्षा ऋतु में वातावरण में नमी बढ़ने के कारण विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं सामने आ सकती हैं। ऐसे में बच्चों को स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल, साफ भोजन और व्यक्तिगत साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
उन्होंने बच्चों को नियमित रूप से हाथ धोने, स्वच्छ पानी पीने और अपने आसपास साफ-सफाई रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए साफ-सफाई और जागरूकता बेहद महत्वपूर्ण है। बच्चों को अपने परिवार के सदस्यों और आसपास के लोगों को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक करने की अपील की गई।
औषधि वितरण के साथ-साथ कार्यक्रम में नशामुक्ति जागरूकता अभियान भी चलाया गया। डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने बच्चों को तंबाकू उत्पादों और एल्कोहल के सेवन से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बच्चों से कहा कि वे स्वयं नशे से दूर रहें और अपने आसपास के लोगों को भी नशे से बचने के लिए प्रेरित करें।
डॉ. अनुराग ने बताया कि तंबाकू उत्पादों का सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर रूप से नुकसानदायक हो सकता है और इससे मुंह के कैंसर सहित अनेक गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ता है। इसी प्रकार एल्कोहल के सेवन से लीवर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और लंबे समय में लीवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने बच्चों को समझाया कि नशे की शुरुआत अक्सर छोटी उम्र में आकर्षण या साथियों के प्रभाव से हो सकती है, इसलिए शुरुआत से ही इससे दूर रहना जरूरी है।
उन्होंने बच्चों से अपील की कि वे नशे को जीवन का हिस्सा न बनने दें और अपने मित्रों तथा परिवार के सदस्यों को भी नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करें। कार्यक्रम के दौरान सभी बच्चों को नशामुक्ति की शपथ भी दिलाई गई। बच्चों ने नशे से दूर रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम में जल संरक्षण अभियान को भी विशेष रूप से शामिल किया गया। डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने बच्चों को पानी के महत्व के बारे में बताते हुए जल की बर्बादी रोकने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जल जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों में से एक है और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे सुरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने बच्चों को घर, विद्यालय और सार्वजनिक स्थानों पर पानी का अनावश्यक इस्तेमाल न करने की अपील की। साथ ही ‘वाटर बेल’ लगाने के लिए प्रेरित किया गया, ताकि बच्चों और विद्यालय के कर्मचारियों को नियमित अंतराल पर पानी पीने की याद दिलाई जा सके। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के साथ-साथ पर्याप्त मात्रा में सुरक्षित पानी पीना भी स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने स्वास्थ्य, स्वच्छता, नशामुक्ति और जल संरक्षण से जुड़े संदेशों को ध्यानपूर्वक सुना। आयोजकों ने कहा कि बच्चों के माध्यम से इन जागरूकता संदेशों को परिवारों तक भी पहुंचाया जा सकता है। बच्चे अपने घरों में स्वच्छता और जल संरक्षण के प्रति परिवार के सदस्यों को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कार्यक्रम में विद्यालय की प्रधानाचार्या पूजा सेंगर सहित पुष्पांजलि गुप्ता, दिलीप कुमार, अनुपम सिंह तथा शिक्षकगण अभिषेक सेंगर, कुलदीप सहित अन्य अध्यापक एवं संबंधित लोग उपस्थित रहे। विद्यालय परिवार की ओर से अभियान के आयोजन और बच्चों को स्वास्थ्य एवं सामाजिक सरोकारों से जोड़ने के प्रयास की सराहना की गई।
प्रधानाचार्या एवं विद्यालय के शिक्षकों ने कहा कि विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक शिक्षा देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें स्वास्थ्य, स्वच्छता, सामाजिक जिम्मेदारी और पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी जागरूक करना आवश्यक है। इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम बच्चों के व्यक्तित्व विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अभियान के आयोजकों ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों और युवाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना बेहद जरूरी है। बरसात के मौसम में साफ-सफाई और सुरक्षित पेयजल को लेकर विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। इसी प्रकार नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता और जल संरक्षण की आदतें बचपन से विकसित करने से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि स्वास्थ्य जागरूकता का उद्देश्य केवल बीमारी होने के बाद उपचार करना नहीं, बल्कि लोगों को बीमारियों से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करना भी है। उन्होंने कहा कि बच्चों को स्वस्थ आदतों के बारे में जानकारी देकर उन्हें भविष्य में स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।
उन्होंने बच्चों से कहा कि वे अपने हाथ साफ रखें, स्वच्छ भोजन और सुरक्षित पानी का उपयोग करें तथा आसपास गंदगी जमा न होने दें। साथ ही नशीले पदार्थों से हमेशा दूरी बनाए रखें। उन्होंने जल संरक्षण को लेकर भी बच्चों से आग्रह किया कि वे पानी की हर बूंद का महत्व समझें और अनावश्यक रूप से पानी बर्बाद न करें।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य जागरूकता, औषधि वितरण, नशामुक्ति और जल संरक्षण जैसे विभिन्न विषयों को एक साथ जोड़कर बच्चों को समग्र रूप से जागरूक किया गया। आयोजकों का कहना है कि ऐसे कार्यक्रमों को आगे भी विभिन्न विद्यालयों और क्षेत्रों में संचालित किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक बच्चों और आमजन तक स्वास्थ्य एवं सामाजिक जागरूकता का संदेश पहुंच सके।
कुसुम्भी में आयोजित इस अभियान के दौरान कुल 553 बच्चों को होम्योपैथिक औषधि उपलब्ध कराई गई और उन्हें स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया। साथ ही नशामुक्ति की शपथ दिलाकर बच्चों को तंबाकू उत्पादों और एल्कोहल से दूर रहने का संदेश दिया गया। जल संरक्षण के लिए वाटर बेल लगाने और पानी की बचत करने के प्रति भी बच्चों को प्रेरित किया गया।
इस अवसर पर उपस्थित शिक्षकों और विद्यालय स्टाफ ने अभियान में सहयोग किया। कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित किया गया।
आयोजकों ने कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए स्वास्थ्य, स्वच्छता, नशामुक्ति और जल संरक्षण जैसे विषयों पर निरंतर जागरूकता अभियान चलाना आवश्यक है। बच्चों को इन अभियानों से जोड़कर समाज में जागरूकता का संदेश व्यापक स्तर तक पहुंचाया जा सकता है।
कुल मिलाकर कुसुम्भी में आयोजित अभियान में 553 बच्चों को स्वास्थ्य जागरूकता के साथ होम्योपैथिक औषधि वितरण, नशामुक्ति की शपथ और जल संरक्षण का संदेश दिया गया। कार्यक्रम ने बच्चों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, नशे से दूर रहने, स्वच्छता बनाए रखने और पानी की एक-एक बूंद बचाने के लिए प्रेरित किया।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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