Indian Poet : अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में कवियों ने मातृ प्रेम, संवेदनाओं और संस्कृति का सुंदर चित्रण प्रस्तुत किया ?

Indian Poet : अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में कवियों ने मातृ प्रेम, संवेदनाओं और संस्कृति का सुंदर चित्रण प्रस्तुत किया

Indian Poet : अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में कवियों ने मातृ प्रेम, संवेदनाओं और संस्कृति का सुंदर चित्रण प्रस्तुत किया
Indian Poet : अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में कवियों ने मातृ प्रेम, संवेदनाओं और संस्कृति का सुंदर चित्रण प्रस्तुत किया

पिलखुवा में मातृ दिवस के अवसर पर आयोजित अखिल भारतीय ऑनलाइन कवि सम्मेलन में देशभर से जुड़े कवियों और साहित्यकारों ने अपनी भावपूर्ण रचनाओं के माध्यम से मां के प्रेम, त्याग और ममता का मार्मिक चित्रण प्रस्तुत किया। श्री राम राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था अयोध्याधाम के तत्वावधान में आयोजित इस भव्य साहित्यिक आयोजन में कविताओं के माध्यम से मां के प्रति श्रद्धा, सम्मान और भावनाओं की अभिव्यक्ति ने श्रोताओं को भावुक कर दिया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों और शहरों से जुड़े साहित्यकारों ने भाग लेकर साहित्य और संस्कृति की गरिमा को नई ऊंचाइयां प्रदान कीं।

मातृ दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित इस ऑनलाइन कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक गोयल चक्रवर्ती ने की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में हेमंत सक्सेना तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में योगेश वशिष्ठ उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ साहित्यिक एवं आध्यात्मिक वातावरण के बीच हुआ, जिसमें मां सरस्वती की वंदना के साथ कवि सम्मेलन की शुरुआत की गई।

कार्यक्रम की शुरुआत दिलीप कुमार शर्मा द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुई। उनकी वंदना ने पूरे आयोजन को आध्यात्मिक और साहित्यिक गरिमा प्रदान की। इसके बाद कार्यक्रम का संचालन बेहद प्रभावशाली और व्यवस्थित रूप से अरुणा पवार तथा राम कुमारी द्वारा किया गया। दोनों संचालिकाओं ने अपनी साहित्यिक शैली और मधुर प्रस्तुति से कार्यक्रम को रोचक बनाए रखा।

इस अवसर पर वरिष्ठ कवयित्री एवं राष्ट्रीय प्रभारी बीना गोयल का विशेष सान्निध्य भी प्राप्त हुआ। उन्होंने साहित्य की भूमिका और मातृत्व के महत्व पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मां केवल एक शब्द नहीं बल्कि सम्पूर्ण जीवन की सबसे बड़ी शक्ति और प्रेरणा होती है। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज की भावनाओं का दर्पण है और मां पर लिखी गई कविताएं हमेशा मनुष्य के हृदय को स्पर्श करती हैं।

कार्यक्रम में विभिन्न शहरों और राज्यों से जुड़े अनेक कवियों एवं साहित्यकारों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। कवियों ने मां के त्याग, प्रेम, संघर्ष, करुणा और स्नेह को अपनी कविताओं के माध्यम से अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया। श्रोताओं ने कविताओं का भरपूर आनंद लिया और कई प्रस्तुतियों पर भावुक भी हो उठे।

कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक गोयल चक्रवर्ती की पंक्तियां “तुझसे बड़ा है कौन जगत में महान मां” विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रहीं। उनकी कविता ने मां की महिमा, ममता और त्याग का ऐसा चित्र प्रस्तुत किया जिसने उपस्थित साहित्यकारों और श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उनकी कविता में भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों की सुंदर झलक दिखाई दी।

कवि सम्मेलन में प्रेमचंद, सारिका मेहता, चुन्नी रस्तोगी, सुशीला जांगड़ा, सुरेश कुमार सुलोदिया, सपना अग्रवाल, राजीव कुमार, गुलाब सिंह, डॉ. शेषपाल सिंह, रामस्वरूप मयूरेश, कल्पक कल्पश, किरण अग्रवाल, रीना मित्तल तथा कविता मधुर सहित अनेक साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी।

Indian Poet : अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में कवियों ने मातृ प्रेम, संवेदनाओं और संस्कृति का सुंदर चित्रण प्रस्तुत किया
Indian Poet : अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में कवियों ने मातृ प्रेम, संवेदनाओं और संस्कृति का सुंदर चित्रण प्रस्तुत किया

कवियों ने अपनी कविताओं में मां के संघर्ष और जीवन में उनके योगदान को बेहद संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया। किसी ने मां को ईश्वर का रूप बताया तो किसी ने मां की ममता को जीवन का सबसे बड़ा सहारा कहा। कई कविताओं में भारतीय संस्कृति, परिवार और रिश्तों की गरिमा का सुंदर चित्रण देखने को मिला। कवियों की प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि मां का स्थान संसार में सर्वोच्च है और उसके त्याग का कोई मूल्य नहीं लगाया जा सकता।

मुख्य अतिथि हेमंत सक्सेना ने अपने संबोधन में कहा कि साहित्य समाज को जोड़ने का कार्य करता है और मां जैसे विषय पर लिखी गई कविताएं हमेशा समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में परिवार और संस्कारों को मजबूत बनाए रखने के लिए साहित्य की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी साहित्यकारों की रचनाओं की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में संवेदनशीलता और सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखते हैं।

विशिष्ट अतिथि योगेश वशिष्ठ ने कहा कि मां पर लिखना किसी भी कवि के लिए सबसे भावुक अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि मां का प्रेम निस्वार्थ होता है और उसकी तुलना संसार में किसी अन्य रिश्ते से नहीं की जा सकती। उन्होंने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऑनलाइन माध्यम से देशभर के साहित्यकारों को जोड़ना संस्था का सराहनीय प्रयास है।

कार्यक्रम के दौरान साहित्यकारों ने केवल कविताएं ही प्रस्तुत नहीं कीं, बल्कि साहित्य, संस्कृति और मानवीय मूल्यों पर भी अपने विचार साझा किए। सभी वक्ताओं ने कहा कि साहित्य समाज को दिशा देने का माध्यम है और कवियों की जिम्मेदारी है कि वे अपनी लेखनी से समाज में प्रेम, सद्भाव और संस्कारों को मजबूत करें।

कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक गोयल चक्रवर्ती ने सभी साहित्यकारों, अतिथियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मातृ दिवस के अवसर पर आयोजित यह कवि सम्मेलन केवल साहित्यिक आयोजन नहीं, बल्कि मां के प्रति सम्मान और भावनाओं की अभिव्यक्ति का मंच भी था। उन्होंने सभी साहित्यकारों की रचनाओं की सराहना करते हुए कहा कि साहित्य समाज की आत्मा है और ऐसे आयोजन साहित्यिक परंपराओं को जीवित रखने का कार्य करते हैं।

यह अखिल भारतीय ऑनलाइन कवि सम्मेलन साहित्य, संस्कृति और भावनाओं का सुंदर संगम साबित हुआ। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि मां के प्रति सम्मान और प्रेम भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान है तथा साहित्य समाज में संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों को जीवित रखने का सबसे प्रभावशाली माध्यम है।

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