
गढ़मुक्तेश्वर (हापुड़)। गंगा नदी में मत्स्य संपदा के संरक्षण, संवर्धन और जलीय जैव विविधता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 8 अक्टूबर 2026 को ब्रजघाट, गढ़मुक्तेश्वर में मत्स्य विभाग की ओर से रिवर रैचिंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। राज्य सरकार के माध्यम से संचालित इस कार्यक्रम के अंतर्गत गंगा नदी में एक लाख मत्स्य अंगुलिकाएं प्रवाहित की गईं। इस पहल का उद्देश्य नदी में मछलियों की संख्या बढ़ाने, मत्स्य संसाधनों के संरक्षण और जलीय पारिस्थितिकी को मजबूत करने की दिशा में प्रयास करना है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में गढ़मुक्तेश्वर के विधायक श्री हरेंद्र सिंह तेवतिया उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त सहायक पुलिस अधीक्षक श्री महेश कुमार, गाजियाबाद की सहायक निदेशक मत्स्य श्रीमती ऋचा चौधरी, निषाद पार्टी के हापुड़ जिलाध्यक्ष श्री डी.पी. निषाद तथा मत्स्य पालक विकास अभिकरण, हापुड़ के प्रभारी मुख्य कार्यकारी अधिकारी सहित क्षेत्र के मत्स्य कृषकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान गंगा नदी की स्वच्छता बनाए रखने, जलीय जीवों के संरक्षण और मत्स्य पालन से जुड़े लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया गया।
गंगा में एक लाख मत्स्य अंगुलिकाएं प्रवाहित
रिवर रैचिंग कार्यक्रम के तहत गंगा नदी में एक लाख मत्स्य अंगुलिकाएं प्रवाहित की गईं। मत्स्य अंगुलिकाएं मछलियों की प्रारंभिक विकास अवस्था को दर्शाती हैं, जिन्हें उचित जलीय वातावरण में छोड़कर मत्स्य संसाधनों को बढ़ाने का प्रयास किया जाता है। नदी में मत्स्य बीज छोड़ने की ऐसी पहल प्राकृतिक मत्स्य आबादी के संरक्षण और संवर्धन के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
गंगा नदी उत्तर भारत की प्रमुख नदियों में से एक है। यह नदी न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि जलीय जीवों और विभिन्न प्रजातियों के लिए भी प्राकृतिक आवास उपलब्ध कराती है। नदी की पारिस्थितिकी में मछलियों की अहम भूमिका होती है। वे खाद्य शृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और जलीय पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखने में योगदान देती हैं।
ऐसे में नदी में मत्स्य संसाधनों को बढ़ावा देने के लिए किए जाने वाले प्रयासों का उद्देश्य केवल मछलियों की संख्या में वृद्धि करना नहीं, बल्कि जलीय पारिस्थितिकी के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है। ब्रजघाट में आयोजित कार्यक्रम के माध्यम से इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया।
जलीय जैव विविधता के संरक्षण पर दिया जोर
कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने गंगा नदी की स्वच्छता एवं निर्मलता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नदी का संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है। गंगा को स्वच्छ रखने के लिए नदी में कचरा, प्लास्टिक और अन्य प्रदूषक पदार्थों को जाने से रोकना आवश्यक है। नदी का जल स्वच्छ रहेगा तो जलीय जीवों के लिए बेहतर वातावरण बनाए रखने में मदद मिलेगी।
जलीय जैव विविधता किसी भी नदी के स्वस्थ पर्यावरण का महत्वपूर्ण संकेतक है। नदी में मछलियों और अन्य जलीय जीवों की विभिन्न प्रजातियां प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में योगदान देती हैं। यदि नदी में प्रदूषण बढ़ता है या जलीय आवास प्रभावित होता है, तो इसका असर मछलियों के प्रजनन, विकास और अस्तित्व पर पड़ सकता है। इसलिए मत्स्य संसाधनों के संवर्धन के साथ-साथ नदी के प्राकृतिक वातावरण की सुरक्षा भी जरूरी है।
रिवर रैचिंग कार्यक्रम के दौरान इस बात को रेखांकित किया गया कि मत्स्य संपदा का संरक्षण तभी प्रभावी हो सकता है, जब नदी की स्वच्छता और जलीय पर्यावरण की सुरक्षा पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाए। इसके लिए सरकारी विभागों के प्रयासों के साथ स्थानीय नागरिकों, मत्स्य कृषकों और नदी के आसपास रहने वाले लोगों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है।
मत्स्य कृषकों को आत्मनिर्भर बनने के लिए किया प्रेरित
कार्यक्रम में क्षेत्र के मत्स्य कृषकों को मत्स्य विभाग की ओर से संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी लेकर उनका लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया गया। मत्स्य पालन ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय का महत्वपूर्ण साधन बन सकता है। योजनाओं की जानकारी, उचित प्रशिक्षण और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करके मत्स्य कृषक अपनी आजीविका को मजबूत कर सकते हैं।
मत्स्य पालन से जुड़े किसानों के लिए उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज, तालाबों का उचित प्रबंधन, जल की गुणवत्ता और मछलियों के स्वास्थ्य पर ध्यान देना आवश्यक होता है। वैज्ञानिक तरीके अपनाने से मत्स्य पालन को अधिक व्यवस्थित और लाभकारी बनाने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही सरकारी योजनाओं की पात्रता और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी होने से किसानों को उपलब्ध सुविधाओं का लाभ लेने में आसानी होती है।
कार्यक्रम में मत्स्य कृषकों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनने के लिए प्रोत्साहित किया गया। उद्देश्य यह है कि मत्स्य पालन से जुड़े परिवारों को आजीविका के बेहतर अवसर मिलें और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिले। विभागीय योजनाओं के माध्यम से मत्स्य पालन को प्रोत्साहन देने के प्रयास स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावनाएं बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की रही सहभागिता
ब्रजघाट में आयोजित रिवर रैचिंग कार्यक्रम में गढ़मुक्तेश्वर विधायक हरेंद्र सिंह तेवतिया मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ सहायक पुलिस अधीक्षक महेश कुमार, सहायक निदेशक मत्स्य, गाजियाबाद श्रीमती ऋचा चौधरी, निषाद पार्टी के हापुड़ जिलाध्यक्ष डी.पी. निषाद और मत्स्य पालक विकास अभिकरण, हापुड़ के प्रभारी मुख्य कार्यकारी अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में क्षेत्र के मत्स्य कृषकों ने भी सहभागिता की।
अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में गंगा नदी में मत्स्य अंगुलिकाएं प्रवाहित करने की गतिविधि संपन्न हुई। इस अवसर पर मत्स्य संपदा के संरक्षण और नदी के पर्यावरण को सुरक्षित रखने के महत्व पर चर्चा की गई। कार्यक्रम के माध्यम से मत्स्य पालन से जुड़े लोगों को जागरूक करने और विभागीय योजनाओं के प्रति उनकी जानकारी बढ़ाने का प्रयास भी किया गया।
इस तरह के कार्यक्रम प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और आजीविका के अवसरों को एक साथ आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि इनके दीर्घकालिक परिणाम नदी की जल गुणवत्ता, मछलियों के लिए उपयुक्त आवास, प्रजातियों के चयन और संरक्षण संबंधी उपायों पर भी निर्भर करते हैं।

नदी संरक्षण में जनभागीदारी जरूरी
गंगा नदी की स्वच्छता बनाए रखना केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों, श्रद्धालुओं, व्यापारियों और नदी के आसपास रहने वाले लोगों की भी अहम भूमिका है। ब्रजघाट जैसे धार्मिक और पर्यटन महत्व वाले क्षेत्रों में स्वच्छता बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि लोग कचरे का उचित निस्तारण करें और नदी में गंदगी न डालें।
मत्स्य संसाधनों के संरक्षण के लिए भी नदी के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण है। नदी में प्रदूषण को कम करना, जलीय जीवों के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाए रखना और मत्स्य संसाधनों का जिम्मेदारी से उपयोग करना आवश्यक कदम हैं। रिवर रैचिंग जैसी पहल इन प्रयासों का एक हिस्सा है, जिसका उद्देश्य मत्स्य संपदा के संवर्धन के प्रति जागरूकता बढ़ाना और जलीय जैव विविधता को संरक्षण देना है।
ब्रजघाट में आयोजित कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और आर्थिक आत्मनिर्भरता एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। मत्स्य पालन से जुड़े किसानों को योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित करने के साथ ही गंगा की स्वच्छता और जलीय जीवों की सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी है।
गंगा नदी में एक लाख मत्स्य अंगुलिकाएं प्रवाहित करने का यह कार्यक्रम हापुड़ जनपद में मत्स्य संपदा के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा। मत्स्य विभाग की इस गतिविधि के साथ नदी की स्वच्छता, जलीय जैव विविधता और मत्स्य कृषकों की आर्थिक उन्नति को लेकर जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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