
नई दिल्ली।
पहलगाम आतंकी हमले के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पाकिस्तान में मौजूद लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाने की तैयारी की है। रिपोर्टों के मुताबिक, जम्मू की विशेष NIA अदालत की ओर से हाफिज सईद को अदालत में पेश होने के लिए समन पाकिस्तान भेजा जाएगा। यह समन विदेश मंत्रालय के माध्यम से भेजे जाने की प्रक्रिया में है। मामले में पहले ही उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया जा चुका है।
पहलगाम हमले की जांच कर रही NIA ने जुलाई 2026 में दाखिल अपनी पूरक आरोपपत्र में हाफिज सईद को आरोपी बनाया था। जांच एजेंसी के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा और उसके प्रॉक्सी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) से जुड़े सईद का नाम इस मामले में शामिल किया गया है। NIA ने उस पर भारत के खिलाफ साजिश और सीमा पार आतंकवाद से जुड़े गंभीर आरोप लगाए हैं।
हाफिज सईद पाकिस्तान में मौजूद है और भारतीय जांच एजेंसी के सामने उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इसी वजह से मामले में अदालत की ओर से कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। जुलाई में जम्मू की विशेष NIA अदालत ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। अदालत का यह आदेश NIA की ओर से पूरक आरोपपत्र दाखिल किए जाने के दो दिन बाद 8 जुलाई को आया था।
अब समन भेजने की प्रक्रिया इस मामले में अगला महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अदालत का समन पाकिस्तान में विदेश मंत्रालय के माध्यम से भेजा जाएगा। इसका उद्देश्य आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया और सुनवाई के बारे में औपचारिक रूप से सूचित करना है।
मामले की कानूनी प्रक्रिया इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आरोपी भारत की हिरासत में नहीं है। ऐसे मामलों में अदालत के सामने यह सवाल रहता है कि आरोपी की अनुपस्थिति में मुकदमे की कार्यवाही किस तरह आगे बढ़ाई जा सकती है। इसी संदर्भ में भारतीय कानून में अनुपस्थित आरोपी के खिलाफ कुछ परिस्थितियों में मुकदमे की कार्यवाही आगे बढ़ाने का प्रावधान मौजूद है।
आपके दिए विवरण में BNSS की धारा 356 के तहत ट्रायल इन एब्सेंटिया यानी आरोपी की गैर-मौजूदगी में मुकदमे की बात कही गई है। हालांकि, इस प्रावधान के इस्तेमाल के लिए कानून में निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया और आवश्यक शर्तों का पालन करना जरूरी होता है। इसलिए समन और अन्य न्यायिक प्रक्रियाओं के बाद अदालत ही यह तय करेगी कि मामले में आगे की कार्यवाही किस तरीके से होगी।
NIA की जांच में हाफिज सईद को मामले में आरोपी बनाए जाने के बाद से इस केस का अंतरराष्ट्रीय और कूटनीतिक पहलू भी महत्वपूर्ण हो गया है। आरोपी पाकिस्तान में है, जबकि मामला भारत में दर्ज है और इसकी जांच भारतीय जांच एजेंसी कर रही है। ऐसे में न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज पाकिस्तान तक पहुंचाने के लिए विदेश मंत्रालय की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

NIA ने 6 जुलाई 2026 को हाफिज सईद के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दाखिल करने की जानकारी आधिकारिक तौर पर जारी की थी। इसके बाद जम्मू की विशेष अदालत में उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ी। NIA के मुताबिक, सईद को व्यक्तिगत रूप से और लश्कर-ए-तैयबा तथा TRF से जुड़े उसके कथित नेतृत्व की भूमिका के संदर्भ में आरोपी बनाया गया है।
पहलगाम आतंकी हमला 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में हुआ था। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। घटना के बाद जांच एजेंसियों ने हमले की साजिश, आतंकियों के नेटवर्क और सीमा पार मौजूद कथित हैंडलरों की भूमिका की जांच शुरू की। NIA इसी व्यापक जांच के तहत मामले में आरोपियों और उनके कथित नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।
जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर NIA ने पहले गिरफ्तार और अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की। इसके बाद जांच आगे बढ़ने पर पाकिस्तान स्थित साजिशकर्ताओं और आतंकी संगठनों से जुड़े लोगों को भी मामले में आरोपी बनाया गया। हाफिज सईद का नाम इसी क्रम में पूरक आरोपपत्र में सामने आया।
गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद अब समन भेजने की प्रक्रिया शुरू होना इस मामले में एक और महत्वपूर्ण न्यायिक कदम है। यदि आरोपी अदालत की प्रक्रिया में शामिल नहीं होता है तो आगे की कानूनी कार्रवाई कानून के प्रावधानों और अदालत के आदेश के अनुसार तय होगी।
इस पूरे मामले में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि आरोपपत्र में किसी व्यक्ति का नाम होना या उसके खिलाफ वारंट जारी होना अपने आप में दोष सिद्ध होना नहीं है। अंतिम दोषसिद्धि अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही हो सकती है। इसलिए हाफिज सईद के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत की कार्यवाही के बाद ही होगा।
NIA की कार्रवाई से यह संकेत मिलता है कि जांच एजेंसी पहलगाम हमले की जांच को केवल हमले में शामिल स्थानीय आरोपियों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि कथित सीमा पार नेटवर्क और साजिश से जुड़े लोगों तक भी कानूनी प्रक्रिया पहुंचाने का प्रयास कर रही है। पाकिस्तान में मौजूद आरोपी तक अदालत का समन पहुंचाना इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।
आने वाले समय में अदालत के समक्ष समन की तामील, आरोपी की स्थिति और मुकदमे की आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। यदि अदालत अनुपस्थित आरोपी के खिलाफ कानून के तहत आगे की कार्यवाही की अनुमति देती है, तो मामले की सुनवाई उसके भारत में मौजूद न होने की स्थिति में भी आगे बढ़ सकती है।
फिलहाल NIA की ओर से हाफिज सईद को पाकिस्तान में अदालत का समन भेजने की तैयारी की खबर सामने आई है। जम्मू की विशेष NIA अदालत पहले ही उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर चुकी है और NIA ने पूरक आरोपपत्र में उसे आरोपी बनाया है।
इस मामले में आगे की दिशा अदालत की कार्यवाही और जांच एजेंसी द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों पर निर्भर करेगी। पहलगाम हमले से जुड़े सभी आरोपों और कथित साजिश की अंतिम कानूनी स्थिति न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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