Mothers in old age homes : मदर्स डे पर वृद्धाश्रम में मातृशक्तियों का सम्मान, सेवा और स्नेह का अनुपम उदाहरण बना आयोजन ?

Mothers in old age homes : मदर्स डे पर वृद्धाश्रम में मातृशक्तियों का सम्मान, सेवा और स्नेह का अनुपम उदाहरण बना आयोजन

Mothers in old age homes : मदर्स डे पर वृद्धाश्रम में मातृशक्तियों का सम्मान, सेवा और स्नेह का अनुपम उदाहरण बना आयोजन
Mothers in old age homes : मदर्स डे पर वृद्धाश्रम में मातृशक्तियों का सम्मान, सेवा और स्नेह का अनुपम उदाहरण बना आयोजन

“पृथ्वी से भी बड़ी माँ का कद होता है” — इसी भाव को आत्मसात करते हुए मदर्स डे के पावन अवसर पर 10 मई 2026 को प्रातः 7 बजे एक अत्यंत भावुक, प्रेरणादायक एवं सेवा-समर्पण से ओतप्रोत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इंडियन रेडक्रास सोसाइटी के तत्वावधान एवं डॉ सत्यनारायण सेवा फाउंडेशन के संयोजकत्व में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम का नेतृत्व इंडियन रेडक्रास सोसाइटी उत्तर प्रदेश के कार्यकारी चेयरमैन एवं कार्यकारिणी सदस्य डॉ अनुराग श्रीवास्तव ने किया। कार्यक्रम का आयोजन समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित मवइया स्थित वृद्धाश्रम में किया गया, जहाँ निवास कर रही 35 मातृशक्तियों का पूजन, अभिनंदन एवं सम्मान कर उन्हें आत्मीयता और स्नेह का अनुभव कराया गया।

मदर्स डे केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह माँ के त्याग, प्रेम, करुणा और समर्पण को नमन करने का अवसर होता है। आधुनिक समाज में जहाँ वृद्धजनों की उपेक्षा की घटनाएँ बढ़ रही हैं, वहीं इस प्रकार के आयोजन समाज को संवेदनशीलता और मानवता का संदेश देने का कार्य करते हैं। कार्यक्रम का वातावरण अत्यंत भावुक और श्रद्धामय था। वृद्धाश्रम में निवासरत माताएँ इस आत्मीय सम्मान को पाकर भावविभोर हो उठीं।

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ अनुराग श्रीवास्तव द्वारा सभी माताओं के चरण पखारने से हुई। भारतीय संस्कृति में माता-पिता को देवतुल्य माना गया है और उनके चरणों का स्पर्श सम्मान और श्रद्धा का प्रतीक होता है। डॉ अनुराग ने सभी माताओं के चरण धोकर उन्हें तिलक लगाया तथा माल्यार्पण कर उनका अभिनंदन किया। इसके पश्चात उन्होंने सभी माताओं की आरती उतारी और उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया। यह दृश्य उपस्थित सभी लोगों को भावुक कर देने वाला था।

इस आयोजन का उद्देश्य केवल औपचारिक सम्मान तक सीमित नहीं था, बल्कि वृद्ध माताओं को यह एहसास कराना भी था कि समाज आज भी उनके प्रति संवेदनशील और कृतज्ञ है। कई माताएँ भावुक होकर अपने आँसू नहीं रोक सकीं। उनके चेहरे पर वर्षों बाद ऐसा अपनापन और सम्मान झलक रहा था, जिसने पूरे वातावरण को करुणा और प्रेम से भर दिया।

डॉ अनुराग श्रीवास्तव ने इस अवसर पर कहा कि माता-पिता पृथ्वी पर भगवान का स्वरूप होते हैं। उन्होंने कहा कि जिन माता-पिता ने अपने बच्चों को प्रेम, संस्कार और जीवन दिया, वृद्धावस्था में उन्हें उपेक्षा नहीं बल्कि सम्मान और स्नेह मिलना चाहिए। उन्होंने समाज से अपील करते हुए कहा कि माता-पिता की आँखों में आँसू नहीं आने चाहिए और उन्हें वृद्धाश्रम भेजने के बजाय परिवार में आदरपूर्वक स्थान देना चाहिए। उनके अनुसार किसी भी समाज की वास्तविक पहचान उसके बुजुर्गों के सम्मान से होती है।

कार्यक्रम के दौरान सभी वृद्धजनों को रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने तथा पाचन शक्ति सुदृढ़ करने हेतु होमियोपैथिक सिरप भी वितरित किए गए। यह पहल केवल भावनात्मक नहीं बल्कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का भी प्रतीक थी। वृद्धावस्था में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ सामान्य होती हैं, ऐसे में उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखना सामाजिक दायित्व भी है। डॉ अनुराग ने कहा कि स्वस्थ शरीर और प्रसन्न मन ही जीवन को सार्थक बनाते हैं।

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Mothers in old age homes : मदर्स डे पर वृद्धाश्रम में मातृशक्तियों का सम्मान, सेवा और स्नेह का अनुपम उदाहरण बना आयोजन

इसके अतिरिक्त सभी वृद्ध माता-पिता को स्नेहपूर्वक खीर खिलाई गई। भारतीय परंपरा में भोजन कराना सेवा और सम्मान का प्रतीक माना जाता है। माताओं ने बड़े प्रेम से खीर ग्रहण की और आयोजनकर्ताओं को आशीर्वाद दिया। वृद्धाश्रम का वातावरण मानो एक परिवार में परिवर्तित हो गया था, जहाँ प्रेम, सम्मान और अपनापन खुलकर दिखाई दे रहा था।

कार्यक्रम में प्रमुख सहयोगी के रूप में अभिनव श्रीवास्तव, वार्डेन नीतू वर्मा तथा अशोक कुमार भी उपस्थित रहे। सभी ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वृद्धाश्रम के कर्मचारियों ने भी इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम वृद्धजनों के जीवन में नई ऊर्जा और आशा का संचार करते हैं।

आज के समय में जब पारिवारिक मूल्यों में गिरावट देखने को मिल रही है और अनेक वृद्धजन अकेलेपन एवं उपेक्षा का जीवन जीने को विवश हैं, तब इस प्रकार के आयोजन समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनते हैं। यह कार्यक्रम केवल मदर्स डे का उत्सव नहीं था, बल्कि मानवीय संवेदनाओं, भारतीय संस्कारों और सेवा-भाव का जीवंत उदाहरण था।

डॉ अनुराग श्रीवास्तव द्वारा किया गया यह कार्य यह सिद्ध करता है कि समाज में आज भी ऐसे लोग मौजूद हैं जो निस्वार्थ भाव से मानव सेवा को अपना धर्म मानते हैं। माताओं के प्रति सम्मान और प्रेम की यह भावना समाज को नई दिशा देने का कार्य करती है। वृद्धजनों के चेहरे पर आई मुस्कान ही इस आयोजन की सबसे बड़ी सफलता थी।

यह आयोजन सभी लोगों को यह संदेश देता है कि माता-पिता का सम्मान केवल एक दिन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें जीवनभर प्रेम, आदर और साथ मिलना चाहिए। यदि हर व्यक्ति अपने माता-पिता के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझे, तो शायद किसी भी वृद्धजन को वृद्धाश्रम में रहने की आवश्यकता न पड़े।

अंततः मदर्स डे पर आयोजित यह सेवा और सम्मान का कार्यक्रम समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बना। यह आयोजन हमें याद दिलाता है कि माँ का स्थान संसार में सबसे ऊँचा है और उनका सम्मान करना प्रत्येक व्यक्ति का प्रथम कर्तव्य है। प्रेम, सेवा और संस्कारों से भरा यह आयोजन लंबे समय तक लोगों के हृदय में स्मरणीय रहेगा।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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