Nitin Gadkari : मुंबई-गोवा हाईवे के काम में देरी पर नितिन गडकरी नाराज, बोले- काम पूरा होने के बाद भी उद्घाटन में नहीं जाऊंगा ?

Nitin Gadkari : मुंबई-गोवा हाईवे के काम में देरी पर नितिन गडकरी नाराज, बोले- काम पूरा होने के बाद भी उद्घाटन में नहीं जाऊंगा
Nitin Gadkari : मुंबई-गोवा हाईवे के काम में देरी पर नितिन गडकरी नाराज, बोले- काम पूरा होने के बाद भी उद्घाटन में नहीं जाऊंगा

मुंबई।

मुंबई-गोवा हाईवे के चौड़ीकरण कार्य में लगातार हो रही देरी को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कड़ी नाराजगी जताई है। हाईवे चौड़ीकरण के काम की धीमी रफ्तार से नाराज गडकरी ने यहां तक कहा कि काम पूरा होने के बाद वह इसके उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने नहीं जाएंगे। उन्होंने निर्माण कार्य में देरी करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि वह ऐसे ठेकेदारों को ब्लैक लिस्ट करने का रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं।

मुंबई-गोवा हाईवे चौड़ीकरण परियोजना लंबे समय से चर्चा में रही है। इस परियोजना का उद्देश्य मुंबई और गोवा के बीच सड़क संपर्क को बेहतर बनाना, यात्रा का समय कम करना और मार्ग पर यातायात व्यवस्था को अधिक सुगम बनाना है। हाईवे के चौड़ीकरण से महाराष्ट्र के कई क्षेत्रों को बेहतर सड़क कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। हालांकि, परियोजना के काम में लगातार देरी के कारण इसकी समयसीमा कई बार प्रभावित हुई है।

परियोजना की धीमी प्रगति को लेकर केंद्रीय मंत्री की नाराजगी उस समय सामने आई जब वह हाईवे चौड़ीकरण से जुड़े कार्यक्रम में शामिल होने वाले थे। बताया गया कि मंत्री ने उद्घाटन कार्यक्रम में जाने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि जिस परियोजना को निर्धारित समय में पूरा किया जाना चाहिए था, उसके लिए वर्षों तक इंतजार करना पड़ा। गडकरी ने निर्माण कार्य में देरी को लेकर संबंधित एजेंसियों और ठेकेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

गडकरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि काम पूरा होने के बाद भी वह इसके उद्घाटन में शामिल नहीं होंगे। उनके इस बयान को परियोजनाओं में समय पर काम पूरा नहीं करने वाले ठेकेदारों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है। केंद्रीय मंत्री लंबे समय से सड़क निर्माण परियोजनाओं में गुणवत्ता और समयसीमा का पालन करने पर जोर देते रहे हैं। उनका कहना है कि सरकारी परियोजनाओं में देरी का सीधा असर जनता पर पड़ता है और इससे लागत तथा समय दोनों बढ़ते हैं।

मुंबई-गोवा हाईवे परियोजना को लेकर सबसे बड़ी चिंता इसकी लंबी समयसीमा को लेकर है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसका काम वर्ष 2016 तक पूरा किया जाना था, लेकिन निर्धारित समय तक परियोजना पूरी नहीं हो सकी। करीब डेढ़ दशक के लंबे अंतराल के बाद भी परियोजना का लगभग 94 प्रतिशत काम पूरा होने की बात सामने आई है। शेष काम पूरा करने को लेकर भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री की नाराजगी का एक प्रमुख कारण यही है कि लंबे समय से चल रही परियोजना अभी तक पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी है। गडकरी ने संकेत दिया कि भविष्य में ऐसे ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी जो निर्धारित समय में परियोजनाओं को पूरा नहीं करते। उन्होंने कहा कि ठेकेदारों की जवाबदेही तय करना जरूरी है, ताकि सड़क निर्माण से जुड़ी परियोजनाओं में अनावश्यक देरी को रोका जा सके।

गडकरी के बयान से यह भी स्पष्ट होता है कि सरकार सड़क निर्माण परियोजनाओं की निगरानी और समयबद्ध तरीके से पूरा करने को लेकर गंभीर है। देश में बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण और चौड़ीकरण किया जा रहा है। इन परियोजनाओं पर भारी सार्वजनिक धन खर्च होता है। ऐसे में यदि परियोजनाएं वर्षों तक लंबित रहती हैं तो इसका असर यातायात, व्यापार, स्थानीय अर्थव्यवस्था और आम लोगों की सुविधा पर पड़ता है।

Nitin Gadkari : मुंबई-गोवा हाईवे के काम में देरी पर नितिन गडकरी नाराज, बोले- काम पूरा होने के बाद भी उद्घाटन में नहीं जाऊंगा
Nitin Gadkari : मुंबई-गोवा हाईवे के काम में देरी पर नितिन गडकरी नाराज, बोले- काम पूरा होने के बाद भी उद्घाटन में नहीं जाऊंगा

मुंबई-गोवा हाईवे महाराष्ट्र और गोवा के बीच एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। इस मार्ग पर बड़ी संख्या में वाहन चलते हैं। पर्यटन के लिहाज से भी यह मार्ग महत्वपूर्ण है, क्योंकि गोवा जाने वाले पर्यटकों के अलावा महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों को जोड़ने में इसकी अहम भूमिका है। हाईवे के चौड़ीकरण और सुधार से सड़क की क्षमता बढ़ाने तथा यातायात को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

परियोजना पूरी होने के बाद मुंबई और गोवा के बीच सड़क यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार होने की संभावना है। इसके साथ ही मार्ग से जुड़े कस्बों और शहरों में यातायात व्यवस्था को भी लाभ मिल सकता है। बेहतर सड़क संपर्क से व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और माल परिवहन में सुविधा होने की उम्मीद है।

हालांकि, इन संभावित लाभों के बावजूद परियोजना में हुई देरी ने सरकार और निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। केंद्रीय मंत्री की नाराजगी को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। गडकरी ने साफ संकेत दिया है कि केवल परियोजना को पूरा कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा और गुणवत्ता के मानकों के अनुसार पूरा होना चाहिए।

ठेकेदारों को ब्लैक लिस्ट करने की बात भी इसी कड़ी में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि कोई ठेकेदार लगातार देरी करता है या निर्धारित शर्तों के अनुसार काम नहीं करता, तो उसके खिलाफ कार्रवाई किए जाने की व्यवस्था है। गडकरी ने अपने बयान के जरिए यह संदेश देने का प्रयास किया कि सरकार भविष्य में परियोजनाओं में अनावश्यक देरी को बर्दाश्त नहीं करेगी।

केंद्रीय मंत्री की नाराजगी के बाद संबंधित विभागों और निर्माण एजेंसियों पर शेष कार्य को जल्द पूरा करने का दबाव बढ़ सकता है। परियोजना का लगभग 94 प्रतिशत कार्य पूरा होने के बाद अब बचा हुआ हिस्सा पूरा करना प्राथमिकता माना जा रहा है। सरकार की कोशिश होगी कि शेष निर्माण कार्य में किसी तरह की नई बाधा न आए और हाईवे को जल्द से जल्द पूरी तरह उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जा सके।

गडकरी का उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल न होने का फैसला भी प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आम तौर पर किसी बड़ी सरकारी परियोजना के पूरा होने पर उद्घाटन कार्यक्रम को उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, लेकिन यहां केंद्रीय मंत्री ने देरी को लेकर अपनी नाराजगी सार्वजनिक रूप से जाहिर की है। इससे यह संकेत मिलता है कि परियोजनाओं की समयसीमा और जवाबदेही को लेकर सरकार का रुख सख्त है।

गौरतलब है कि नितिन गडकरी सड़क परिवहन क्षेत्र में परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने और निर्माण गुणवत्ता सुधारने को लेकर कई बार अधिकारियों एवं ठेकेदारों को निर्देश दे चुके हैं। उनका मानना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग देश की आर्थिक गतिविधियों की महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना हैं। इसलिए इनके निर्माण में देरी को केवल प्रशासनिक समस्या के रूप में नहीं देखा जा सकता।

मुंबई-गोवा हाईवे के मामले में भी अब निगाहें शेष कार्य को पूरा करने और परियोजना को पूरी तरह जनता के लिए उपलब्ध कराने पर हैं। केंद्रीय मंत्री की कड़ी टिप्पणी के बाद उम्मीद की जा रही है कि संबंधित विभाग निर्माण कार्य की प्रगति की निगरानी और अधिक प्रभावी तरीके से करेंगे।

फिलहाल गडकरी के बयान ने मुंबई-गोवा हाईवे परियोजना में हुई देरी को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। मंत्री का यह कहना कि वह काम पूरा होने के बाद भी उद्घाटन में शामिल नहीं होंगे और देरी करने वाले ठेकेदारों को ब्लैक लिस्ट करने का रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं, सरकार की सख्त कार्यशैली का संकेत माना जा रहा है। अब देखना होगा कि शेष लगभग छह प्रतिशत कार्य कितनी तेजी से पूरा होता है और लंबे समय से प्रतीक्षित यह परियोजना कब पूरी तरह जनता को समर्पित की जा सकेगी।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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