Questions Raised : मुजफ्फरनगर सीएमओ पर जनसमस्याओं की अनदेखी के आरोप, फोन नहीं उठाने को लेकर उठे सवाल ?

Questions Raised : मुजफ्फरनगर सीएमओ पर जनसमस्याओं की अनदेखी के आरोप, फोन नहीं उठाने को लेकर उठे सवाल ?
Questions Raised : मुजफ्फरनगर सीएमओ पर जनसमस्याओं की अनदेखी के आरोप, फोन नहीं उठाने को लेकर उठे सवाल ?

मुजफ्फरनगर।

सरकारी विभागों में तैनात अधिकारियों से आम लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद रहती है। खासकर स्वास्थ्य विभाग से जुड़े मामलों में लोगों की परेशानी और भी गंभीर हो जाती है, क्योंकि अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित शिकायतों का सीधा संबंध आम नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन से होता है। ऐसे में अधिकारियों से संपर्क स्थापित करना और शिकायतों को सुनना प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। लेकिन मुजफ्फरनगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) सुनील तेवतिया को लेकर अब फोन नहीं उठाने और लोगों की समस्याएं नहीं सुनने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि पत्रकारों, समाजसेवियों और आम लोगों द्वारा सीएमओ से संपर्क करने का प्रयास किए जाने के बावजूद कई बार फोन पर बात नहीं हो पाती। आरोप है कि सीयूजी नंबर पर भी संपर्क करने पर फोन नहीं उठाया जाता। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी किसी समस्या अथवा शिकायत को उच्च अधिकारी तक पहुंचाना लोगों के लिए मुश्किल हो जाता है। हालांकि इन आरोपों के संबंध में सीएमओ का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

प्रशासनिक अधिकारियों के फोन नहीं उठाने की शिकायत कोई नई बात नहीं है। विभिन्न जिलों में जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों और सामाजिक संगठनों की ओर से समय-समय पर यह सवाल उठता रहा है कि जब सरकार ने अधिकारियों को सीयूजी नंबर उपलब्ध कराए हैं तो आम नागरिकों की समस्याओं के समय पर समाधान के लिए इनका उपयोग क्यों नहीं हो रहा है। कई मामलों में जनप्रतिनिधियों द्वारा भी अधिकारियों से संपर्क नहीं होने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

बताया जाता है कि इस तरह की शिकायतें कई बार मंत्रियों और मुख्यमंत्री कार्यालय तक भी पहुंची हैं। विधानसभा और विधान परिषद में भी अधिकारियों द्वारा जनसमस्याओं को सुनने तथा फोन पर उपलब्ध रहने के मुद्दे पर चर्चा होती रही है। सरकार की ओर से अधिकारियों को लगातार यह निर्देश दिए जाते रहे हैं कि जनता की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाए और संबंधित मामलों का समयबद्ध तरीके से निस्तारण किया जाए।

इसी व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए समय-समय पर शासन स्तर से अधिकारियों की कार्यप्रणाली की समीक्षा भी की जाती है। हाल ही में मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से अधिकारियों की उपलब्धता और जनसमस्याओं के प्रति उनकी संवेदनशीलता को लेकर परीक्षण किए जाने की चर्चा सामने आई थी। इसके बाद अधिकारियों के फोन पर उपलब्ध रहने और जनता की समस्याओं को सुनने के तरीके को लेकर भी सवाल उठे।

मुजफ्फरनगर में सीएमओ सुनील तेवतिया को लेकर भी इसी संदर्भ में सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप लगाने वालों का कहना है कि यदि किसी पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता या पीड़ित व्यक्ति को स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी गंभीर समस्या के संबंध में अधिकारी से संपर्क करना हो और फोन पर बात ही न हो पाए तो वह अपनी शिकायत किसके सामने रखे। स्वास्थ्य विभाग में सीएमओ जिले के महत्वपूर्ण अधिकारियों में शामिल होते हैं और उनके स्तर पर अस्पतालों तथा स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित अनेक मामलों की निगरानी की जाती है।

जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर भी समय-समय पर अलग-अलग तरह की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में लोगों की अपेक्षा रहती है कि स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी अस्पताल की व्यवस्थाओं का नियमित निरीक्षण करें और सामने आने वाली समस्याओं का संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करें। आरोप है कि कई मामलों में शिकायतों के बावजूद अपेक्षित स्तर पर कार्रवाई नहीं दिखाई देती। हालांकि इन आरोपों की वास्तविकता की पुष्टि संबंधित विभागीय जांच और आधिकारिक पक्ष के आधार पर ही हो सकती है।

स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि किसी भी सरकारी अधिकारी का दायित्व केवल कार्यालय में बैठकर फाइलों का निस्तारण करना नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर जनता की समस्याओं को सुनना भी प्रशासनिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। खासकर स्वास्थ्य विभाग में यदि किसी मरीज या उसके परिजन को अस्पताल से संबंधित समस्या होती है तो वह तत्काल समाधान की उम्मीद करता है। ऐसे में अधिकारी तक संपर्क नहीं हो पाने से उसकी परेशानी बढ़ सकती है।

Questions Raised : मुजफ्फरनगर सीएमओ पर जनसमस्याओं की अनदेखी के आरोप, फोन नहीं उठाने को लेकर उठे सवाल ?
Questions Raised : मुजफ्फरनगर सीएमओ पर जनसमस्याओं की अनदेखी के आरोप, फोन नहीं उठाने को लेकर उठे सवाल ?

पत्रकारों की भूमिका भी इस व्यवस्था में महत्वपूर्ण मानी जाती है। किसी अस्पताल में मरीजों को परेशानी, स्वास्थ्य सेवाओं में कमी अथवा किसी अन्य समस्या की जानकारी सामने आने पर पत्रकार संबंधित अधिकारी से उसका पक्ष जानने का प्रयास करते हैं। यदि अधिकारी का पक्ष समय पर उपलब्ध न हो तो खबर को पूरी तरह संतुलित तरीके से प्रस्तुत करना भी कठिन हो जाता है। इसी कारण अधिकारियों से संपर्क और उनका पक्ष प्राप्त करना पत्रकारिता की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।

सीएमओ सुनील तेवतिया पहले बिजनौर जिले में भी स्वास्थ्य विभाग से जुड़े पद पर कार्य कर चुके हैं और वहां उनकी कार्यप्रणाली को लेकर अलग-अलग चर्चाएं रही हैं। अब मुजफ्फरनगर में उनकी तैनाती के बाद उनके कामकाज को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि किसी अधिकारी के बारे में लगाए गए आरोपों की पुष्टि बिना आधिकारिक जांच के नहीं की जा सकती। इसलिए इन आरोपों पर संबंधित अधिकारी या स्वास्थ्य विभाग का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि किसी नागरिक को स्वास्थ्य विभाग से संबंधित शिकायत है और वह जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी से संपर्क करना चाहता है, तो उसे किस माध्यम से अपनी समस्या बतानी चाहिए। शासन स्तर से अधिकारियों को जनता के प्रति जवाबदेह और संवेदनशील रहने के निर्देश दिए जाते हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर भी यह अपेक्षा की जाती है कि अधिकारी अपने सीयूजी नंबर पर उपलब्ध रहें और गंभीर मामलों में शिकायतकर्ता को उचित मार्गदर्शन दें।

मुजफ्फरनगर के स्वास्थ्य विभाग को लेकर उठ रहे इन सवालों के बीच अब लोगों की नजर इस बात पर है कि संबंधित अधिकारी इन आरोपों पर क्या जवाब देते हैं। यदि फोन नहीं उठाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं तो इसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए विभागीय स्तर पर समीक्षा भी की जा सकती है। साथ ही जिला अस्पताल और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी शिकायतों की भी निष्पक्ष जांच कराई जाए तो स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।

जनता की समस्याओं को सुनना और उनका समाधान कराना प्रशासनिक व्यवस्था की बुनियादी जिम्मेदारी है। ऐसे में अधिकारियों की उपलब्धता, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर उठने वाले सवालों को गंभीरता से लिया जाना जरूरी है। अब देखना होगा कि मुजफ्फरनगर के सीएमओ सुनील तेवतिया पर लगाए जा रहे फोन नहीं उठाने और जनसमस्याओं की अनदेखी के आरोपों पर विभाग की ओर से क्या स्पष्टीकरण सामने आता है और क्या शिकायतों के समाधान के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाता है।

 

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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