Olympian Yogeshwar Dutt : कठिन परिश्रम और अनुशासन से ही मिलती है सफलता : ओलंपियन योगेश्वर दत्त

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के एकलव्य स्टेडियम में सोमवार का दिन खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों के लिए अविस्मरणीय बन गया, जब लंदन ओलंपिक 2012 के कांस्य पदक विजेता, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पहलवान और देश के गौरव ओलंपियन श्री योगेश्वर दत्त का आगमन हुआ। उनके आगमन से विश्वविद्यालय परिसर में खेल भावना, उत्साह और प्रेरणा की नई ऊर्जा का संचार देखने को मिला। स्टेडियम में मौजूद खिलाड़ी, प्रशिक्षक और खेल प्रेमी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने, जब एक ओलंपियन ने अपने अनुभवों और विचारों से युवा खिलाड़ियों का मार्गदर्शन किया।
एकलव्य स्टेडियम में आयोजित प्रेरणादायी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओलंपियन योगेश्वर दत्त ने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। कठिन परिश्रम, अनुशासन, आत्मविश्वास और निरंतर अभ्यास ही वह रास्ता है, जो किसी भी खिलाड़ी को उसके लक्ष्य तक पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि खेल के मैदान में हार-जीत दोनों जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन जो खिलाड़ी हार से सीखकर आगे बढ़ता है, वही सच्चा विजेता बनता है। उन्होंने खिलाड़ियों से आह्वान किया कि वे अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार रहें और कभी भी परिस्थितियों से समझौता न करें।
योगेश्वर दत्त ने अपने संघर्षपूर्ण जीवन और खेल यात्रा के अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक छोटे से गांव से निकलकर ओलंपिक पदक तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था। इसके पीछे वर्षों की तपस्या, अनुशासन और त्याग छिपा है। उन्होंने कहा कि माता-पिता और कोच का सम्मान करना हर खिलाड़ी का कर्तव्य है, क्योंकि वही खिलाड़ी के जीवन की नींव मजबूत करते हैं। जिन खिलाड़ियों में संस्कार, समर्पण और अनुशासन होता है, वही न केवल खेल में बल्कि जीवन में भी ऊंचाइयों को छूते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि आज देश में खेलों के प्रति माहौल लगातार बेहतर हो रहा है। सरकार और खेल संस्थानों द्वारा खिलाड़ियों को सुविधाएं, प्रशिक्षण और मंच उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन इन अवसरों का सही लाभ तभी मिलेगा जब खिलाड़ी पूरी ईमानदारी और मेहनत से अभ्यास करेंगे। उन्होंने युवाओं से नशे और गलत संगत से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि एक खिलाड़ी का शरीर और मन ही उसकी सबसे बड़ी पूंजी होती है।
इस अवसर पर योगेश्वर दत्त का भव्य, गरिमामय और आत्मीय स्वागत किया गया। विश्वविद्यालय के खेल सचिव प्रो. शेखर सिंह के नेतृत्व में उन्हें बुके, माल्यार्पण, अंगवस्त्रम और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। स्वागत करने वालों में डॉ. रणधीर सिंह, डॉ. राजेश सिंह (जिला मंत्री, क्रीड़ा भारती), बाबा मौर्य (जिला अध्यक्ष, क्रीड़ा भारती), डॉ. रामधारी, पूर्व कर्मचारी संघ के महामंत्री रमेश यादव, अलका सिंह, अशोक सोनकर, योग प्रशिक्षक जय सिंह, भानु प्रताप शर्मा, सत्येंद्र सिंह, अजय प्रताप सिंह, परशुराम, संत राज, सिकंदर सहित विश्वविद्यालय और खेल जगत से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्रशिक्षण शिविर में भाग ले रही महिला क्रिकेट टीम, महिला योग टीम तथा कुश्ती के कई दर्जन खिलाड़ी और प्रशिक्षक भी मौजूद रहे। खिलाड़ियों में ओलंपियन योगेश्वर दत्त को प्रत्यक्ष देखने और उनसे संवाद करने को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। खिलाड़ियों ने अपने आदर्श को सामने पाकर न केवल उनसे प्रेरणा ली, बल्कि उनके अनुभवों को अपने खेल जीवन में उतारने का संकल्प भी लिया।
अपने संबोधन में योगेश्वर दत्त ने विशेष रूप से महिला खिलाड़ियों की सराहना की और कहा कि आज महिलाएं खेल के हर क्षेत्र में देश का नाम रोशन कर रही हैं। उन्होंने महिला खिलाड़ियों से आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और किसी भी चुनौती से न डरने की अपील की। उन्होंने कहा कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी शक्ति सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित खिलाड़ियों ने योगेश्वर दत्त से प्रशिक्षण, फिटनेस, मानसिक मजबूती और प्रतियोगिताओं की तैयारी से जुड़े प्रश्न भी पूछे, जिनका उन्होंने सरल और प्रेरक शब्दों में उत्तर दिया। उन्होंने बताया कि नियमित अभ्यास के साथ-साथ मानसिक संतुलन और आत्मविश्वास बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है, जितना शारीरिक प्रशिक्षण। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी को हमेशा अपने प्रदर्शन का आत्ममंथन करना चाहिए और हर दिन खुद को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय प्रशासन और खेल विभाग की ओर से योगेश्वर दत्त का आभार व्यक्त किया गया। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे महान खिलाड़ियों का मार्गदर्शन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत होता है और इससे खेल संस्कृति को मजबूती मिलती है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भविष्य में भी इस प्रकार के प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता जताई।
कुल मिलाकर, एकलव्य स्टेडियम में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल एक औपचारिक आयोजन था, बल्कि यह युवा खिलाड़ियों के लिए सपनों को साकार करने की प्रेरणा का मंच भी बना। ओलंपियन योगेश्वर दत्त के विचारों, अनुभवों और संदेशों ने यह स्पष्ट कर दिया कि कठिन परिश्रम, अनुशासन और ईमानदारी ही सफलता की सच्ची कुंजी है। जौनपुर और पूर्वांचल विश्वविद्यालय के खिलाड़ियों के लिए यह दिन लंबे समय तक स्मरणीय रहेगा, जो उन्हें अपने लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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