Promise of Cooperation : मेधावी छात्रा चंद्रवती सोलंकी का सम्मान, पथरिया बीआरसीसी ने निभाया शिक्षा सहयोग का वादा

दमोह जिले के पथरिया क्षेत्र में शिक्षा और प्रतिभा को प्रोत्साहित करने का एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है। गांव की होनहार बेटी चंद्रवती सोलंकी ने कक्षा दसवीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर न केवल अपने परिवार और गांव का नाम रोशन किया, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गई। छात्रा की इस उपलब्धि से प्रभावित होकर पथरिया के बीआरसीसी अधिकारी ने उससे किया गया वादा निभाते हुए उसके घर पहुंचकर कक्षा 11वीं की शिक्षण शुल्क राशि सौंपी। इस सम्मान और सहयोग ने यह संदेश दिया कि प्रतिभा यदि मेहनत और लगन के साथ आगे बढ़े तो समाज और प्रशासन दोनों उसका साथ देने के लिए आगे आते हैं।
जानकारी के अनुसार दमोह जिले के शासकीय प्राथमिक शाला देवरान में आयोजित एक विदाई कार्यक्रम के दौरान पथरिया बीआरसीसी पहुंचे थे। इसी कार्यक्रम में गांव की प्रतिभाशाली छात्रा चंद्रवती सोलंकी के बारे में जानकारी मिली। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की शिक्षिका टीना साहू ने छात्रा की मेहनत, संघर्ष और उपलब्धियों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि चंद्रवती ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के शासकीय विद्यालय से प्राप्त की और सीमित संसाधनों के बावजूद लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
शिक्षिका ने बताया कि चंद्रवती सोलंकी ने इस वर्ष कक्षा दसवीं की परीक्षा में 96.6 प्रतिशत अंक प्राप्त कर शानदार सफलता हासिल की है। इसके साथ ही उसने गणित विषय में मध्यप्रदेश के प्रतिष्ठित “सुपर 100” कार्यक्रम में भी अपना स्थान बनाया है। गांव के सामान्य परिवार से आने वाली इस छात्रा की सफलता ने पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित कर दिया।
जब बीआरसीसी अधिकारी को छात्रा की आर्थिक स्थिति और आगे की पढ़ाई को लेकर आने वाली चुनौतियों के बारे में जानकारी मिली, तब उन्होंने मंच से ही चंद्रवती की सहायता करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इतनी प्रतिभाशाली बेटी की शिक्षा किसी भी परिस्थिति में रुकनी नहीं चाहिए। इसी भावना के साथ उन्होंने छात्रा को पुरस्कार स्वरूप कक्षा 11वीं की शिक्षण शुल्क राशि 6500 रुपये देने का वादा किया।
समय बीतने के बाद भी बीआरसीसी अधिकारी ने अपना वादा नहीं भुलाया। उन्होंने स्वयं छात्रा के घर पहुंचकर उसे शिक्षण शुल्क की राशि सौंपी। इस अवसर पर गांव में खुशी और गर्व का माहौल देखने को मिला। छात्रा के परिवार के लिए यह पल बेहद भावुक और प्रेरणादायक था। गांव के लोगों ने भी इस पहल की सराहना की और कहा कि ऐसे कदम ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों को आगे बढ़ने के लिए नई प्रेरणा देते हैं।

इस अवसर पर शिक्षिका शीला पटेल, टीना साहू, किरण पटेल, बालमुकुंद नामदेव तथा बीआरसी कार्यालय पथरिया के लेखपाल सुरेंद्र तिवारी भी उपस्थित रहे। सभी ने छात्रा को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं और उसकी सफलता को क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया।
कार्यक्रम के दौरान गांव की सरपंच और स्थानीय नागरिक भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि चंद्रवती जैसी बेटियां गांव की पहचान होती हैं और उनकी सफलता से अन्य बच्चों को भी प्रेरणा मिलती है। ग्रामीणों ने कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।
चंद्रवती सोलंकी की सफलता केवल एक छात्रा की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले उन हजारों बच्चों के लिए उम्मीद की किरण है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। अक्सर यह धारणा बनाई जाती है कि केवल निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र ही बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं, लेकिन चंद्रवती ने अपनी मेहनत और लगन से इस सोच को बदलने का कार्य किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, जरूरत केवल सही मार्गदर्शन और प्रोत्साहन की होती है। यदि समाज, शिक्षक और प्रशासन मिलकर बच्चों को सहयोग दें तो वे किसी भी क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल कर सकते हैं। चंद्रवती की उपलब्धि इसका जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई है।
इस अवसर पर शिक्षकों ने भी कहा कि छात्रा शुरू से ही पढ़ाई में बेहद मेहनती और अनुशासित रही है। गणित विषय में उसकी विशेष रुचि थी और वह हर चुनौती को सीखने के अवसर के रूप में देखती थी। यही कारण है कि उसने “सुपर 100” जैसे प्रतिष्ठित कार्यक्रम में भी अपनी जगह बनाई।
बीआरसीसी द्वारा छात्रा के घर पहुंचकर राशि सौंपने की घटना ने यह भी साबित किया कि यदि अधिकारी संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच के साथ कार्य करें तो समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। केवल मंच से घोषणा करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसे निभाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इस पहल ने शिक्षा के क्षेत्र में विश्वास और प्रेरणा का नया संदेश दिया है।
छात्रा के परिवार ने भी इस सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। परिवार का कहना है कि आर्थिक परिस्थितियां हमेशा चुनौती रही हैं, लेकिन बेटी की मेहनत और शिक्षकों के सहयोग ने उसे आगे बढ़ने का साहस दिया। उन्होंने कहा कि यह सहायता केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि बेटी के सपनों को नई उड़ान देने वाला कदम है।
आज जब ग्रामीण क्षेत्रों में कई छात्र-छात्राएं संसाधनों की कमी के कारण पढ़ाई बीच में छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं, तब चंद्रवती सोलंकी जैसी कहानियां समाज को नई दिशा देती हैं। यह घटना यह संदेश देती है कि यदि किसी बच्चे में प्रतिभा और मेहनत है तो उसे आगे बढ़ाने के लिए पूरा समाज साथ खड़ा हो सकता है।
चंद्रवती की सफलता और उसे मिला सम्मान आने वाले समय में निश्चित रूप से अन्य विद्यार्थियों को भी प्रेरित करेगा। यह केवल एक छात्रा का सम्मान नहीं, बल्कि शिक्षा, मेहनत और सपनों के प्रति समाज के विश्वास का सम्मान है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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