Public in distress : 33 केवी रहीमाबाद लाइन में फिर ब्रेकडाउन, बार-बार बिजली कटौती से जनता परेशान ?

Public in distress : 33 केवी रहीमाबाद लाइन में फिर ब्रेकडाउन, बार-बार बिजली कटौती से जनता परेशान ?
Public in distress : 33 केवी रहीमाबाद लाइन में फिर ब्रेकडाउन, बार-बार बिजली कटौती से जनता परेशान ?

मलिहाबाद। मलिहाबाद तहसील क्षेत्र में 33 केवी रहीमाबाद सप्लाई लाइन में एक बार फिर ब्रेकडाउन होने से बिजली आपूर्ति प्रभावित हो गई। बार-बार बिजली कटौती और तकनीकी खराबी से परेशान स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि 33 केवी रहीमाबाद लाइन में लंबे समय से बार-बार ब्रेकडाउन की समस्या बनी हुई है। इस संबंध में तहसील दिवस से लेकर बिजली विभाग के संबंधित अधिकारियों तक कई बार लिखित शिकायतें और आवेदन दिए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। लोगों का कहना है कि हर बार खराबी आने के बाद अस्थायी रूप से आपूर्ति बहाल कर दी जाती है, लेकिन कुछ समय बाद फिर वही समस्या सामने आ जाती है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक 33 केवी रहीमाबाद सप्लाई लाइन में महीने में करीब तीन से पांच बार ब्रेकडाउन होने की समस्या सामने आती है। बार-बार होने वाली इस तकनीकी खराबी के कारण क्षेत्र की बिजली आपूर्ति प्रभावित होती है। कभी कुछ घंटे तो कभी इससे अधिक समय तक बिजली बाधित रहने से लोगों को रोजमर्रा के कामकाज में परेशानी उठानी पड़ती है। गर्मी और उमस के मौसम में बिजली कटौती की समस्या और अधिक परेशान करने वाली साबित होती है। बिजली पर निर्भर घरेलू उपकरणों से लेकर दुकानों और छोटे कारोबार तक प्रभावित होते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि बिजली आपूर्ति किसी भी क्षेत्र की मूलभूत जरूरतों में शामिल है। घरों में पंखे, कूलर, पानी की मोटर, फ्रिज और अन्य उपकरण बिजली पर निर्भर हैं। बिजली की आपूर्ति बार-बार बाधित होने से इन उपकरणों का उपयोग प्रभावित होता है। इसके अलावा पेयजल और घरेलू जरूरतों के लिए पानी की मोटर नहीं चल पाने से भी लोगों को परेशानी होती है। लंबे समय तक बिजली नहीं आने पर लोगों को वैकल्पिक व्यवस्था का सहारा लेना पड़ता है।

स्थानीय दुकानदारों और कारोबारियों के सामने भी बिजली कटौती के कारण कई तरह की समस्याएं पैदा हो रही हैं। जिन दुकानों और छोटे कारोबारों में बिजली से चलने वाले उपकरणों का इस्तेमाल होता है, वहां काम प्रभावित होता है। कंप्यूटर, प्रिंटर, कूलिंग सिस्टम, मशीन और अन्य उपकरण बिजली उपलब्ध होने पर ही संचालित हो पाते हैं। बार-बार बिजली जाने से कारोबारियों का काम रुक जाता है और उन्हें आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि 33 केवी रहीमाबाद लाइन की समस्या नई नहीं है। लंबे समय से लाइन में बार-बार खराबी आने की शिकायत की जा रही है। लोगों के मुताबिक कई बार संबंधित अधिकारियों को लिखित रूप से समस्या से अवगत कराया गया। तहसील दिवस के दौरान भी शिकायतें दर्ज कराई गईं। इसके अलावा बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी समस्या की जानकारी दी गई। बावजूद इसके बार-बार होने वाले ब्रेकडाउन की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

स्थानीय लोगों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर 33 केवी रहीमाबाद सप्लाई लाइन में बार-बार ब्रेकडाउन क्यों हो रहा है। यदि लाइन में तकनीकी समस्या है तो उसकी पूरी जांच क्यों नहीं कराई जा रही है। लोगों का कहना है कि प्रत्येक बार फाल्ट आने के बाद मरम्मत कर बिजली आपूर्ति बहाल कर देना स्थायी समाधान नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि लाइन की तकनीकी स्थिति की विस्तृत जांच कर खराबी के मूल कारण का पता लगाया जाए और उसी के अनुसार आवश्यक कार्य कराया जाए।

Public in distress : 33 केवी रहीमाबाद लाइन में फिर ब्रेकडाउन, बार-बार बिजली कटौती से जनता परेशान ?
Public in distress : 33 केवी रहीमाबाद लाइन में फिर ब्रेकडाउन, बार-बार बिजली कटौती से जनता परेशान ?

ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि 33 केवी रहीमाबाद सप्लाई लाइन का तकनीकी निरीक्षण कराया जाए। लाइन के पुराने उपकरण, तार, इंसुलेटर, जंपर, ट्रांसमिशन से जुड़े हिस्सों और अन्य तकनीकी बिंदुओं की जांच कराई जाए, ताकि यह पता चल सके कि बार-बार ब्रेकडाउन का वास्तविक कारण क्या है। हालांकि इन तकनीकी हिस्सों की वास्तविक स्थिति विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

लोगों का कहना है कि यदि किसी उपकरण या लाइन के किसी हिस्से में बार-बार खराबी आ रही है तो उसकी स्थायी मरम्मत या आवश्यकतानुसार उसे बदलने की व्यवस्था की जानी चाहिए। इससे बार-बार होने वाले फाल्ट को कम करने में मदद मिल सकती है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि समस्या के समाधान के लिए विभाग को केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करने के बजाय संवेदनशील लाइनों की नियमित जांच और रखरखाव पर भी ध्यान देना चाहिए।

बार-बार बिजली कटौती का असर केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं रहता। बिजली आपूर्ति बाधित होने से छोटे उद्योग, दुकानें, कार्यालय, शिक्षण संस्थान और अन्य संस्थान भी प्रभावित हो सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की उपलब्धता कृषि कार्यों के लिए भी महत्वपूर्ण होती है। सिंचाई के लिए बिजली पर निर्भर किसानों को आपूर्ति बाधित होने पर अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में 33 केवी लाइन में बार-बार होने वाला ब्रेकडाउन क्षेत्र के विभिन्न वर्गों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

स्थानीय लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि जब समस्या की शिकायत लगातार अधिकारियों के सामने रखी जा रही है तो अब तक इसका स्थायी समाधान क्यों नहीं किया गया। ग्रामीणों के अनुसार, शिकायतों के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने से लोगों का भरोसा प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि विभाग को शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए एक समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए, जिससे यह पता चले कि लाइन की समस्या दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

इसी बीच कुछ स्थानीय लोगों ने संबंधित अधिकारियों पर लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए इन आरोपों को फिलहाल आरोप के रूप में ही देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, ताकि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई है तो उसका पता लगाया जा सके। साथ ही लोगों का कहना है कि जांच में यदि कोई जिम्मेदार पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

ग्रामीणों का कहना है कि बिजली विभाग की जिम्मेदारी केवल फाल्ट होने के बाद लाइन को चालू करना नहीं है, बल्कि ऐसी तकनीकी समस्याओं को दोबारा होने से रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाना भी जरूरी है। यदि किसी लाइन में लगातार ब्रेकडाउन हो रहा है तो उसके पीछे की तकनीकी वजह को समझना और उसका स्थायी समाधान करना विभाग के लिए प्राथमिकता होनी चाहिए। इससे उपभोक्ताओं को बार-बार होने वाली परेशानी से राहत मिल सकती है।

क्षेत्र के लोगों ने अधिकारियों से यह भी मांग की है कि शिकायतों का रिकॉर्ड तैयार कर यह देखा जाए कि 33 केवी रहीमाबाद लाइन में पिछले कुछ महीनों के दौरान कितनी बार ब्रेकडाउन हुआ। हर ब्रेकडाउन के कारण, मरम्मत में लगा समय और किए गए तकनीकी कार्य की जानकारी की समीक्षा की जाए। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि समस्या किसी विशेष उपकरण, लाइन के किसी हिस्से या अन्य तकनीकी कारण से बार-बार उत्पन्न हो रही है।

लोगों का कहना है कि यदि विभाग द्वारा लाइन का तकनीकी ऑडिट कराया जाता है और विशेषज्ञों की टीम से जांच कराई जाती है तो समस्या की वास्तविक वजह सामने आ सकती है। इसके बाद आवश्यकतानुसार लाइन की मरम्मत, उपकरणों के रखरखाव या अन्य तकनीकी कार्य कराए जा सकते हैं। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि अधिकारियों द्वारा इस बार केवल अस्थायी रूप से बिजली आपूर्ति बहाल करने के बजाय समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।

बार-बार बिजली कटौती से परेशान लोगों ने अधिकारियों से जल्द हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें नियमित और निर्बाध बिजली आपूर्ति की आवश्यकता है। लोगों ने यह भी कहा कि यदि समस्या लंबे समय से बनी हुई है तो विभागीय स्तर पर इसकी समीक्षा होनी चाहिए। शिकायतों के बाद भी समस्या जारी रहने की स्थिति में जिम्मेदारी तय करने की जरूरत है।

फिलहाल 33 केवी रहीमाबाद सप्लाई लाइन में एक बार फिर ब्रेकडाउन के बाद क्षेत्र में बिजली आपूर्ति को लेकर लोगों की चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों की मांग है कि संबंधित अधिकारी मौके की तकनीकी स्थिति की जांच कराएं और बार-बार होने वाले फाल्ट की वास्तविक वजह सामने लाएं। साथ ही लाइन की आवश्यक मरम्मत और रखरखाव का कार्य कराया जाए, ताकि उपभोक्ताओं को बार-बार बिजली कटौती का सामना न करना पड़े। अब देखना यह होगा कि संबंधित बिजली विभाग इस समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाता है और लंबे समय से चली आ रही ब्रेकडाउन की समस्या का स्थायी समाधान कब तक हो पाता है।

Check Also

The victim reached the court : मनीपुर मंदिर भूमि विवाद में पुलिस की भूमिका पर सवाल, छह माह बाद एसपी के दरबार पहुंचा पीड़ित ?

The victim reached the court : मनीपुर मंदिर भूमि विवाद में पुलिस की भूमिका पर सवाल, छह माह बाद एसपी के दरबार पहुंचा पीड़ित ?

मनीपुर मंदिर विवाद में पुलिस की भूमिका पर सवाल-मंदिर की जमीन का विवाद या समझौते …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *