
हापुड़/बाबूगढ़ छावनी,
नगर पंचायत बाबूगढ़ छावनी क्षेत्र में एक घायल गोवंश के दो दिनों से सड़क पर पड़े रहने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद नगर पंचायत और संबंधित विभागों की ओर से समय रहते उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई। बारिश के बीच सड़क पर घायल अवस्था में पड़े गोवंश की हालत बिगड़ती देख स्थानीय लोगों ने आगे बढ़कर उसका उपचार कराया।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, पिछले दो दिनों से एक घायल गोवंश सड़क किनारे दर्द और परेशानी की स्थिति में पड़ा हुआ था। लगातार बारिश के कारण वह भीगता रहा, जिससे उसकी स्थिति और खराब होने की आशंका बनी हुई थी। सड़क पर घायल पशु के पड़े रहने से राहगीरों और वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। स्थानीय लोगों ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को इसकी सूचना देकर तत्काल सहायता की मांग की।
लोगों का आरोप है कि सूचना मिलने के बाद नगर पंचायत और पशुपालन विभाग से जुड़े कर्मचारी मौके पर पहुंचे, लेकिन उनके स्तर से केवल प्राथमिक उपचार किया गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, घायल गोवंश को गौशाला या पशु आश्रय केंद्र तक पहुंचाने की जिम्मेदारी को लेकर विभागीय स्तर पर स्पष्टता नहीं दिखाई गई। लोगों का कहना है कि अलग-अलग विभाग और कर्मचारी अपने-अपने क्षेत्र का हवाला देते रहे, जिसके कारण घायल गोवंश सड़क पर ही पड़ा रहा।
स्थिति गंभीर होती देख स्थानीय समाजसेवी डॉ. राजवीर और पवन शर्मा ने स्थानीय लोगों के सहयोग से घायल गोवंश की मदद के लिए पहल की। उन्होंने मौके पर पहुंचकर गोवंश को पानी पिलाया और उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से दवा एवं मरहम-पट्टी कर उपचार किया। स्थानीय लोगों ने भी इस कार्य में सहयोग किया और बारिश के बीच घायल गोवंश की देखभाल करने का प्रयास किया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि घायल पशु को केवल प्राथमिक उपचार देने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर समुचित चिकित्सा उपलब्ध कराना जरूरी है। लोगों ने मांग की है कि संबंधित विभाग तत्काल कार्रवाई करते हुए घायल गोवंश को नजदीकी गौशाला या पशु आश्रय केंद्र में भर्ती कराएं, ताकि उसका उपचार और देखभाल व्यवस्थित तरीके से हो सके।
इस मामले को लेकर स्थानीय निवासियों में नगर पंचायत की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी भी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि गोवंश संरक्षण के लिए सरकारी स्तर पर योजनाएं और व्यवस्थाएं संचालित हैं, लेकिन जरूरत के समय घायल पशु को समय पर उपचार और आश्रय उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। ऐसे में योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
स्थानीय लोगों ने कहा कि बाबूगढ़ नगर पंचायत क्षेत्र में आवारा और घायल गोवंश की समस्या के लिए स्थायी व्यवस्था की आवश्यकता है। उनका कहना है कि किसी पशु के घायल होने या सड़क पर असहाय अवस्था में पाए जाने पर सूचना देने के लिए प्रभावी तंत्र होना चाहिए। सूचना मिलने के बाद संबंधित टीम को तत्काल मौके पर पहुंचकर पशु को सुरक्षित स्थान पर ले जाना चाहिए।
लोगों ने यह भी मांग की कि नगर पंचायत क्षेत्र में घायल और बीमार गोवंश को अस्पताल या गौशाला तक पहुंचाने के लिए पशु एंबुलेंस जैसी सुविधा उपलब्ध कराई जाए। इससे सड़क पर घायल पड़े पशुओं को समय रहते उपचार मिल सकेगा और दुर्घटनाओं का खतरा भी कम होगा।

सड़क पर घायल गोवंश के पड़े रहने से यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। विशेषकर बारिश के दौरान सड़क पर दृश्यता कम होने और फिसलन के कारण वाहन चालकों के लिए जोखिम बढ़ जाता है। यदि सड़क पर कोई घायल पशु पड़ा हो तो अचानक वाहन सामने आने पर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इसलिए स्थानीय लोगों ने इसे पशु कल्याण के साथ-साथ सड़क सुरक्षा से भी जुड़ा विषय बताया है।
स्थानीय निवासियों और गौ-सेवकों ने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेने की अपील की है। उनका कहना है कि घायल गोवंश को तत्काल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के साथ-साथ उसके स्वास्थ्य की नियमित निगरानी भी की जानी चाहिए। यदि पशु की हालत गंभीर है तो पशु चिकित्सक द्वारा समुचित उपचार कराया जाना चाहिए।
लोगों ने नगर पंचायत बाबूगढ़ में आवारा गोवंश के लिए स्थायी उपचार व्यवस्था बनाने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि केवल किसी एक घटना के बाद अस्थायी उपचार करने के बजाय ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिसके तहत घायल पशु की सूचना मिलते ही संबंधित टीम सक्रिय हो जाए।
स्थानीय लोगों ने जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सूचना मिलने के बावजूद घायल गोवंश को समय पर सुरक्षित स्थान पर नहीं पहुंचाया गया, तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए स्पष्ट जिम्मेदारी निर्धारित की जानी चाहिए।
फिलहाल स्थानीय समाजसेवियों और लोगों की मदद से घायल गोवंश को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया है। हालांकि, उसकी बेहतर देखभाल और पूर्ण उपचार के लिए उसे सुरक्षित पशु आश्रय केंद्र तक पहुंचाना जरूरी बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों को अब प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार है।
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि घायल गोवंश को तत्काल गौशाला में भर्ती कराया जाए, पशु चिकित्सा की स्थायी व्यवस्था की जाए और आवश्यकता पड़ने पर एंबुलेंस उपलब्ध कराई जाए। साथ ही मामले में लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि किसी भी घायल और असहाय पशु को सड़क पर लंबे समय तक नहीं छोड़ा जाना चाहिए। समय पर उपचार और सुरक्षित आश्रय मिलने से उसकी जान बचाई जा सकती है और आम लोगों के लिए सड़क पर बने दुर्घटना के खतरे को भी कम किया जा सकता है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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