
फतेहपुर।
जनपद के असोथर थाना क्षेत्र में मोरम डंपों से कथित तौर पर खुलेआम ओवरलोड परिवहन का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में संचालित मोरम डंपों से क्षमता से अधिक मोरम लादकर ट्रक और डंपर दिन-रात सड़कों पर दौड़ रहे हैं। भारी ओवरलोड वाहनों की आवाजाही से जहां सड़कों की हालत खराब होने की बात कही जा रही है, वहीं तेज रफ्तार वाहनों के कारण सड़क हादसों का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि लगातार शिकायतों और समस्या की जानकारी होने के बावजूद संबंधित जिम्मेदार विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक असोथर क्षेत्र में मोरम डंपों से निकलने वाले भारी वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आरोप है कि इन वाहनों में निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक मोरम लादकर परिवहन किया जा रहा है। ओवरलोड वाहनों के कारण सड़कों पर दबाव बढ़ने के साथ-साथ यातायात व्यवस्था भी प्रभावित होती है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार भारी वाहन तेज रफ्तार में गांवों और आबादी वाले क्षेत्रों से गुजरते हैं, जिससे राहगीरों, बाइक सवारों और स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है।
मानकों को ताक पर रखकर परिवहन का आरोप
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि मोरम परिवहन में निर्धारित मानकों का पालन किया जाना जरूरी है, लेकिन असोथर क्षेत्र में इन नियमों की कथित तौर पर अनदेखी की जा रही है। आरोप है कि डंपों से निकलने वाले कुछ ट्रक और डंपर अपनी निर्धारित क्षमता से अधिक मोरम लेकर सड़कों पर पहुंचते हैं। ओवरलोड होने के कारण वाहनों का संतुलन और ब्रेकिंग क्षमता भी प्रभावित होने की आशंका रहती है।
ग्रामीणों के अनुसार दिन हो या रात, भारी वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। कई वाहन तेज गति से निकलते हैं, जिससे आसपास रहने वाले लोगों में दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते ओवरलोड परिवहन पर रोक नहीं लगाई गई तो किसी बड़े हादसे के बाद ही जिम्मेदार विभाग जागेंगे।
स्थानीय लोगों ने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि क्षेत्र में संचालित मोरम डंपों और वहां से निकलने वाले वाहनों की नियमित जांच कराई जाए। इसके साथ ही वाहनों की क्षमता, लोडिंग और दस्तावेजों की भी जांच की जाए, ताकि नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई हो सके।
ओवरलोड वाहनों से सड़कें क्षतिग्रस्त होने का आरोप
भारी ओवरलोड वाहनों की लगातार आवाजाही का असर सड़कों पर भी पड़ने की बात कही जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिन सड़कों से सामान्य क्षमता वाले वाहनों के आवागमन की व्यवस्था है, वहां भारी और ओवरलोड ट्रकों के गुजरने से सड़कें जल्द खराब हो रही हैं।
कई स्थानों पर सड़क की सतह क्षतिग्रस्त होने, गड्ढे बनने और किनारों के टूटने जैसी समस्याएं सामने आने की बात स्थानीय लोगों ने कही है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण और मरम्मत पर सरकारी धन खर्च किया जाता है, लेकिन यदि ओवरलोड परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होगा तो सड़कें बार-बार खराब होती रहेंगी।
ग्रामीणों के अनुसार ओवरलोड वाहनों से सड़क पर चलने वाले अन्य वाहन चालकों को भी परेशानी होती है। भारी वाहन जब तेज गति से गुजरते हैं तो छोटे वाहन चालकों को साइड लेने में कठिनाई होती है। इससे दुर्घटना की स्थिति पैदा हो सकती है।
धूल और प्रदूषण से ग्रामीण परेशान
ओवरलोड मोरम परिवहन से केवल सड़क और यातायात ही प्रभावित होने का आरोप नहीं है, बल्कि इससे धूल और प्रदूषण की समस्या भी बढ़ने की बात कही जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार मोरम लदे वाहनों के गुजरने के दौरान सड़क पर धूल उड़ती है। यदि वाहनों को ढककर परिवहन नहीं किया जाता है तो मोरम और मिट्टी के कण आसपास के क्षेत्रों में फैलते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि आबादी वाले क्षेत्रों से भारी वाहनों की आवाजाही के कारण घरों, दुकानों और सड़कों पर धूल जमा होती है। इससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि लंबे समय तक धूल और प्रदूषण के संपर्क में रहने से लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि परिवहन के दौरान पर्यावरणीय मानकों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। वाहनों को निर्धारित तरीके से ढककर चलाने और आबादी वाले क्षेत्रों में अनावश्यक तेज गति पर रोक लगाने की जरूरत है।
हादसे का बढ़ रहा खतरा
क्षेत्रीय लोगों के बीच सबसे बड़ी चिंता सड़क सुरक्षा को लेकर है। ग्रामीणों का कहना है कि ओवरलोड ट्रकों और डंपरों की तेज रफ्तार आवाजाही से हादसे का खतरा लगातार बना हुआ है। गांवों के आसपास पैदल चलने वाले लोगों, साइकिल और बाइक सवारों तथा अन्य छोटे वाहन चालकों को भारी वाहनों से खतरा रहता है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि ओवरलोड वाहनों की जांच नियमित रूप से की जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई हो तो सड़क दुर्घटनाओं के जोखिम को कम किया जा सकता है। इसके लिए परिवहन विभाग के साथ पुलिस और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को भी संयुक्त रूप से अभियान चलाने की जरूरत है।
जिम्मेदार विभागों की कार्यशैली पर सवाल
स्थानीय लोगों ने परिवहन विभाग और पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में भारी वाहनों की आवाजाही किसी से छिपी नहीं है, इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं देती। लोगों का कहना है कि यदि नियमित चेकिंग की जाए तो ओवरलोड वाहनों को आसानी से पकड़ा जा सकता है।
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि विभागीय चेकिंग महज औपचारिकता बनकर रह गई है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित विभागों की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
ग्रामीणों की मांग है कि असोथर क्षेत्र के मोरम डंपों और वहां से निकलने वाले वाहनों की अचानक जांच की जाए। वाहनों का वजन कराया जाए और यदि निर्धारित सीमा से अधिक मोरम पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

मिलीभगत के आरोपों की भी जांच की मांग
स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों द्वारा यह आरोप भी लगाया जा रहा है कि कथित ओवरलोड परिवहन खनन से जुड़े लोगों और स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। हालांकि यह आरोप फिलहाल स्थानीय लोगों और सूत्रों के दावों तक सीमित हैं और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि आरोपों में सच्चाई है तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जांच में यह देखा जाना चाहिए कि मोरम डंपों से कितने वाहनों का संचालन हो रहा है, उनके पास वैध दस्तावेज हैं या नहीं, वाहनों में कितना माल लादा जा रहा है और निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं।
प्रशासन से कार्रवाई की उम्मीद
असोथर क्षेत्र के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मोरम डंपों से होने वाले परिवहन की नियमित निगरानी की जाए। ओवरलोड वाहनों के खिलाफ अभियान चलाने के साथ-साथ सड़कों की सुरक्षा और ग्रामीणों की परेशानी को भी प्राथमिकता दी जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन यदि अचानक जांच अभियान चलाए और मोरम डंपों से निकलने वाले वाहनों का वजन कराया जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। साथ ही आबादी वाले क्षेत्रों में वाहनों की गति और परिवहन के दौरान धूल रोकने के उपायों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
फिलहाल असोथर क्षेत्र में मोरम डंपों से कथित ओवरलोड परिवहन को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। अब देखना होगा कि स्थानीय लोगों की शिकायतों और आरोपों के बाद संबंधित विभाग इस मामले में कब तक प्रभावी कदम उठाते हैं।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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