Quintals of Kachri Seized : हापुड़ में खाद्य सुरक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई, प्रतिबंधित रंग से बनी 13 कुंतल कचरी जब्त

हापुड़। जनपद में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बच्चों के लिए बनाई जाने वाली नमकीन “कचरी” के निर्माण में गंभीर अनियमितता का खुलासा किया है। जांच के दौरान शाजिया गोल्ड ट्रेडिंग कंपनी से लगभग 13 कुंतल कचरी जब्त की गई, जिसमें प्रतिबंधित और विषाक्त रंग कार्मोसिन (E122) के उपयोग की पुष्टि हुई है। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के चलते की गई, जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम को गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी कि एक यूनिट में बच्चों के लिए बनाई जा रही नमकीन में मानकों के विपरीत रंगों का प्रयोग किया जा रहा है। सूचना के आधार पर विभागीय टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया और वहां बड़ी मात्रा में तैयार एवं पैक की गई कचरी बरामद की। प्रारंभिक जांच में ही खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता संदिग्ध पाई गई, जिसके बाद पूरे स्टॉक को सील कर दिया गया।
जांच रिपोर्ट में यह सामने आया कि कचरी को आकर्षक और रंगीन बनाने के लिए प्रतिबंधित सिंथेटिक रंग कार्मोसिन (E122) का उपयोग किया जा रहा था। यह रंग खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार सीमित मात्रा में और स्पष्ट लेबलिंग के साथ ही उपयोग किया जा सकता है, लेकिन यहां इसके प्रयोग में नियमों का उल्लंघन किया गया। इसके साथ ही पैकेजिंग पर आवश्यक चेतावनी और सामग्री की स्पष्ट जानकारी भी अनुपस्थित पाई गई।
विशेषज्ञों के अनुसार कार्मोसिन जैसे कृत्रिम रंगों का अधिक या अनियंत्रित उपयोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। यह विशेष रूप से बच्चों के लिए जोखिमपूर्ण माना जाता है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे रसायनों के सेवन से एलर्जी, त्वचा संबंधी समस्याएं, पेट की गड़बड़ी और कुछ मामलों में व्यवहार संबंधी परिवर्तन जैसे हाइपरएक्टिविटी की समस्या भी देखी जा सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि बच्चों द्वारा नियमित रूप से ऐसे खाद्य पदार्थों के सेवन से दीर्घकालिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए खाद्य पदार्थों में उपयोग होने वाले सभी रंगों और रसायनों का मानक के अनुसार होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को पैकेट बंद खाद्य पदार्थ खरीदते समय उनकी गुणवत्ता और लेबलिंग की जानकारी अवश्य जांचें।

खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जब्त की गई कचरी के नमूनों को प्रयोगशाला जांच के लिए भेज दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद संबंधित कंपनी के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी कहा कि जनस्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
जांच के दौरान यह भी पाया गया कि निर्माण इकाई में स्वच्छता मानकों का भी पालन नहीं किया जा रहा था। उत्पादन स्थल पर साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं थी और खाद्य सामग्री के भंडारण में भी लापरवाही बरती जा रही थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि कंपनी द्वारा खाद्य सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जा रही थी।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने मौके पर मौजूद सभी तैयार माल को सील कर दिया और उत्पादन प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि बिना अनुमति और मानकों के विपरीत खाद्य पदार्थों का निर्माण गंभीर अपराध है, जिसके लिए कठोर दंड का प्रावधान है।
इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में खाद्य कारोबारियों के बीच हड़कंप मच गया है। कई अन्य इकाइयों में भी विभाग द्वारा निरीक्षण बढ़ा दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि आगे भी इसी तरह की जांच अभियान जारी रहेगा ताकि मिलावटी और असुरक्षित खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाई जा सके।
स्थानीय लोगों ने भी इस कार्रवाई का स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि बच्चों के लिए बनाए जाने वाले खाद्य पदार्थों में किसी भी प्रकार की मिलावट गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने मांग की है कि ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई भी निर्माता नियमों की अनदेखी न कर सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि पैकेट बंद खाद्य पदार्थों के बढ़ते उपयोग के साथ गुणवत्ता नियंत्रण और भी महत्वपूर्ण हो गया है। बाजार में आकर्षक दिखने वाले उत्पाद अक्सर रासायनिक रंगों और कृत्रिम स्वादों के कारण अधिक लोकप्रिय होते हैं, लेकिन इनके स्वास्थ्य प्रभावों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध खाद्य पदार्थ की सूचना तुरंत विभाग को दें। साथ ही यह भी कहा गया है कि उपभोक्ताओं को जागरूक होकर ही उत्पाद खरीदने चाहिए और लेबल पर दी गई जानकारी को ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिए।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मिलावटखोरी और मानकों के उल्लंघन पर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
शाजिया गोल्ड ट्रेडिंग कंपनी के मामले में जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने संकेत दिए हैं कि यदि गंभीर उल्लंघन की पुष्टि होती है तो लाइसेंस निरस्त करने तक की कार्रवाई संभव है।
यह मामला न केवल खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि बाजार में उपलब्ध कुछ उत्पादों की गुणवत्ता पर लगातार निगरानी की आवश्यकता है। प्रशासन ने कहा है कि इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराए जा सकें।
पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बाजार में बिक रहे बच्चों के खाद्य उत्पाद पूरी तरह सुरक्षित हैं या नहीं। खाद्य सुरक्षा विभाग की इस कार्रवाई को जनहित में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे भविष्य में मिलावटखोरी पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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