Rajvardhan Foundation : टिकरा-सुरार सड़क के निर्माण आदेश से ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग पूरी, राजवर्धन फाउंडेशन के आंदोलन को मिली सफलता ?

Rajvardhan Foundation : टिकरा-सुरार सड़क के निर्माण आदेश से ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग पूरी, राजवर्धन फाउंडेशन के आंदोलन को मिली सफलता
Rajvardhan Foundation : टिकरा-सुरार सड़क के निर्माण आदेश से ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग पूरी, राजवर्धन फाउंडेशन के आंदोलन को मिली सफलता

कानपुर नगर।

वर्षों से जर्जर और हादसों का कारण बनी टिकरा-सुरार सड़क को लेकर ग्रामीणों की लंबे समय से चली आ रही मांग आखिरकार निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। सड़क के निर्माण और मरम्मत की मांग को लेकर राजवर्धन फाउंडेशन के संस्थापक साकेत सेंगर की अगुवाई में चलाए गए शांतिपूर्ण जन आंदोलन के बाद लोक निर्माण विभाग ने सड़क को मोटरेबल बनाने और यातायात को सुगम करने के निर्देश जारी किए हैं। इस आदेश के सामने आने के बाद क्षेत्र के ग्रामीणों में खुशी की लहर है।

जानकारी के अनुसार, कार्यालय अधिशासी अभियंता, निर्माण खंड-1, लोक निर्माण विभाग, कानपुर नगर की ओर से 16 सितंबर 2026 को जारी पत्र में संबंधित ठेकेदार को सड़क की स्थिति सुधारने के निर्देश दिए गए हैं। पत्र में कहा गया है कि सड़क को तत्काल मोटरेबल बनाया जाए, जिससे यातायात सुचारु हो सके और किसी अप्रिय घटना की आशंका को टाला जा सके। साथ ही निर्देशों का पालन नहीं किए जाने की स्थिति में अनुबंध की शर्तों के अनुसार कार्रवाई किए जाने की बात भी कही गई है।

टिकरा-सुरार मार्ग लंबे समय से ग्रामीणों के लिए परेशानी का बड़ा कारण बना हुआ था। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे, खराब सतह और आवागमन में होने वाली कठिनाइयों के कारण स्थानीय लोगों को रोजमर्रा की यात्रा में परेशानी का सामना करना पड़ता था। ग्रामीणों का कहना था कि सड़क की खराब स्थिति के कारण दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है। इसी वजह से स्थानीय लोगों ने सड़क को लेकर कई बार अपनी आवाज जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाने का प्रयास किया।

राजवर्धन फाउंडेशन ने ग्रामीणों की इस समस्या को प्रमुखता से उठाते हुए आंदोलन का रास्ता अपनाया। संस्था के संस्थापक साकेत सेंगर की अगुवाई में ग्रामीणों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग प्रशासन के सामने रखी। आंदोलन के दौरान सड़क जाम और चूल्हा-चौका सत्याग्रह जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीणों ने सड़क की बदहाल स्थिति और उससे जुड़ी समस्याओं की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया।

आंदोलन की खास बात यह रही कि प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके को अपनाने पर जोर दिया। साकेत सेंगर और उनके साथियों ने किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाने के बजाय सड़क की समस्या के समाधान की मांग को केंद्र में रखा। सत्याग्रह के दौरान गांधीवादी परंपरा के अनुरूप भजन और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के माध्यम से अपनी बात रखी गई। आंदोलनकारियों का उद्देश्य प्रशासन तक ग्रामीणों की समस्या को प्रभावी तरीके से पहुंचाना था।

अब लोक निर्माण विभाग की ओर से जारी निर्देश के बाद आंदोलन से जुड़े लोगों और ग्रामीणों ने इसे अपनी मांग की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। साकेत सेंगर ने कहा कि यह जीत किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे टिकरा-सुरार क्षेत्र के ग्रामीणों की है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने लंबे समय तक सड़क की समस्या झेली और जब समस्या के समाधान के लिए आंदोलन शुरू किया गया तो शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाई गई।

Rajvardhan Foundation : टिकरा-सुरार सड़क के निर्माण आदेश से ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग पूरी, राजवर्धन फाउंडेशन के आंदोलन को मिली सफलता
Rajvardhan Foundation : टिकरा-सुरार सड़क के निर्माण आदेश से ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग पूरी, राजवर्धन फाउंडेशन के आंदोलन को मिली सफलता

साकेत सेंगर ने प्रशासन,

लोक निर्माण विभाग और पुलिस का भी आभार जताया। उनके अनुसार, संबंधित अधिकारियों ने ग्रामीणों की परेशानी को समझते हुए सड़क की स्थिति सुधारने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य किसी से टकराव करना नहीं था, बल्कि वर्षों से चली आ रही समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करना था।

लोक निर्माण विभाग के आदेश में सड़क को तत्काल मोटरेबल बनाने पर जोर दिया गया है। इसका सीधा उद्देश्य फिलहाल सड़क पर आवागमन को सुगम बनाना और दुर्घटनाओं की संभावनाओं को कम करना है। आदेश में अनुबंध की शर्तों का उल्लेख करते हुए यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित कार्य नहीं कराया जाता है तो संबंधित पक्ष के खिलाफ अनुबंध के अनुरूप कार्रवाई की जा सकती है।

ग्रामीणों के बीच इस आदेश को लेकर उत्साह का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की बदहाली के कारण उन्हें वर्षों से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। बच्चों की पढ़ाई, मरीजों को अस्पताल ले जाने, किसानों के आवागमन और रोजमर्रा के कामों के लिए इस मार्ग का इस्तेमाल करने वाले लोगों को विशेष परेशानी होती थी। सड़क सुधरने से इन समस्याओं में राहत मिलने की उम्मीद ग्रामीणों ने जताई है।

ग्रामीणों ने साकेत सेंगर के प्रयासों की भी सराहना की। उनका कहना है कि सड़क की समस्या को लगातार उठाने और आंदोलन के माध्यम से प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का परिणाम अब सामने आया है। ग्रामीणों के अनुसार, आंदोलन के दौरान जिस तरह शांतिपूर्ण तरीके से मांग रखी गई, उससे सड़क की समस्या व्यापक स्तर पर सामने आई और संबंधित विभाग ने कार्रवाई की।

हालांकि, ग्रामीणों की अपेक्षा अब केवल अस्थायी मरम्मत तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि सड़क को टिकाऊ और सुरक्षित बनाने के लिए गुणवत्तापूर्ण निर्माण जरूरी है। स्थानीय लोगों की मांग है कि विभाग सड़क की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कर आवश्यक तकनीकी मानकों के अनुसार काम कराए, ताकि कुछ समय बाद सड़क फिर से उसी स्थिति में न पहुंच जाए।

टिकरा-सुरार मार्ग से जुड़े इस घटनाक्रम ने यह भी दिखाया है कि स्थानीय समस्याओं को शांतिपूर्ण और संगठित तरीके से उठाने पर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। राजवर्धन फाउंडेशन के आंदोलन के बाद जारी लोक निर्माण विभाग का पत्र अब ग्रामीणों के लिए उम्मीद का आधार बना हुआ है।

साकेत सेंगर ने भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल आदेश जारी करवाना नहीं, बल्कि सड़क को सुरक्षित और उपयोग योग्य बनते देखना है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की वास्तविक खुशी तब होगी, जब सड़क का काम जमीन पर दिखाई देगा और लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी।

फिलहाल लोक निर्माण विभाग के निर्देश के बाद टिकरा-सुरार क्षेत्र के ग्रामीणों में उत्साह है। वर्षों से बदहाल सड़क को लेकर चल रही मांग अब प्रशासनिक आदेश तक पहुंच चुकी है। ग्रामीण उम्मीद कर रहे हैं कि निर्देश के अनुरूप जल्द काम शुरू होगा और सड़क की स्थिति में वास्तविक सुधार दिखाई देगा।

टिकरा-सुरार सड़क को लेकर चला यह आंदोलन स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों की सामूहिक आवाज का उदाहरण बनकर सामने आया है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन, सत्याग्रह और लगातार मांग उठाने के बाद विभागीय स्तर पर जारी निर्देश ने ग्रामीणों को राहत की उम्मीद दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि लोक निर्माण विभाग और संबंधित ठेकेदार आदेश के अनुसार सड़क को कितनी जल्दी मोटरेबल बनाते हैं और आगे स्थायी सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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