Rhetoric : सहारनपुर में सपा की अंदरूनी कलह खुलकर आई सामने, सोशल मीडिया पर तेज हुई बयानबाजी

सहारनपुर। समाजवादी पार्टी में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। सहारनपुर में पार्टी के भीतर गुटबाजी का विवाद सोशल मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक हो गया है। सपा की राष्ट्रीय महासचिव रूही अंजुम और विधायक समर्थक नेता नौशाद मलिक के बीच तीखी बयानबाजी ने पार्टी के अंदर चल रहे मतभेदों को उजागर कर दिया है। यह विवाद आगामी 2027 विधानसभा चुनाव, टिकट वितरण और पार्टी नेतृत्व तक पहुंच को लेकर गहराता दिखाई दे रहा है।
राजनीतिक हलकों में इस विवाद को सहारनपुर देहात विधानसभा क्षेत्र की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि यह पूरा घटनाक्रम सपा विधायक आशु मलिक के बढ़ते प्रभाव और टिकट को लेकर चल रही अंदरूनी प्रतिस्पर्धा का परिणाम है। सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों की बयानबाजी के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भी चर्चा तेज हो गई है।
विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब सपा की राष्ट्रीय महासचिव रूही अंजुम ने सोशल मीडिया पर एक टिप्पणी साझा की। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए लिखा कि जो विधायक या पदाधिकारी पार्टी कार्यालय लखनऊ के चक्कर ज्यादा लगाते हैं, उनकी टिकट काटकर उन्हें पार्टी कार्यालय में लिखापढ़ी, साफ-सफाई और बागवानी जैसे कार्यों में लगा देना चाहिए। उनके इस बयान को सीधे तौर पर विधायक आशु मलिक और उनके समर्थकों पर निशाना माना गया।
रूही अंजुम का यह बयान सामने आते ही राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। सोशल मीडिया पर उनके समर्थकों ने इस टिप्पणी को संगठन के भीतर सक्रिय “दरबारी राजनीति” के खिलाफ आवाज बताया, जबकि विरोधी गुट ने इसे व्यक्तिगत हमला करार दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान केवल व्यंग्य नहीं बल्कि टिकट वितरण को लेकर पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी का संकेत भी है।
रूही अंजुम के बयान के बाद आशु मलिक समर्थक नौशाद मलिक ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि कुछ “नचनिया” और “टुच्ची सोच” वाले लोग विधायक आशु मलिक के खिलाफ लिखकर प्रसिद्धि हासिल करना चाहते हैं। इस टिप्पणी के बाद विवाद और अधिक व्यक्तिगत हो गया। दोनों पक्षों के समर्थकों ने सोशल मीडिया पर एक-दूसरे के खिलाफ पोस्ट, वीडियो और टिप्पणियां साझा करना शुरू कर दिया।
नौशाद मलिक की प्रतिक्रिया के बाद सपा कार्यकर्ताओं के बीच बहस और तेज हो गई। कई लोगों ने इसे अनुशासनहीनता बताया, जबकि कुछ समर्थकों ने इसे राजनीतिक प्रतिक्रिया करार दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार वायरल हो रही पोस्टों ने इस विवाद को और अधिक चर्चा में ला दिया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सहारनपुर में समाजवादी पार्टी लंबे समय से गुटबाजी की समस्या से जूझ रही है। स्थानीय स्तर पर कई नेता अपने-अपने प्रभाव क्षेत्र को मजबूत करने में लगे हैं। आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए टिकट की दावेदारी और संगठन में पकड़ मजबूत करने की होड़ तेज हो गई है। इसी कारण नेताओं के बीच बयानबाजी अब सार्वजनिक रूप लेती दिखाई दे रही है।
सहारनपुर देहात विधानसभा क्षेत्र में विधायक आशु मलिक की मजबूत पकड़ मानी जाती है। पार्टी संगठन में उनकी सक्रियता और शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच को लेकर विरोधी गुटों में असंतोष की चर्चा पहले भी होती रही है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि रूही अंजुम का बयान उसी असंतोष का सार्वजनिक रूप हो सकता है।
दूसरी ओर आशु मलिक समर्थक इसे विधायक की लोकप्रियता से जुड़ी राजनीतिक प्रतिक्रिया मान रहे हैं। उनका कहना है कि विधायक लगातार क्षेत्र में सक्रिय हैं और जनता के बीच मजबूत पकड़ रखते हैं। ऐसे में विरोधी गुट सोशल मीडिया के माध्यम से उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहा है।
इस पूरे विवाद ने समाजवादी पार्टी की आंतरिक एकजुटता को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते पार्टी नेतृत्व ने हस्तक्षेप नहीं किया तो इसका असर आगामी चुनावों में देखने को मिल सकता है। सहारनपुर पश्चिमी उत्तर प्रदेश का महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षेत्र माना जाता है, जहां हर दल अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटा है।
विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा जैसी प्रतिद्वंद्वी पार्टियां विपक्षी दलों की आंतरिक कलह का राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास कर सकती हैं। ऐसे में समाजवादी पार्टी के लिए संगठनात्मक एकता बनाए रखना चुनौती बनता जा रहा है।
सोशल मीडिया पर बढ़ती बयानबाजी ने इस विवाद को और अधिक हवा दे दी है। दोनों पक्षों के समर्थक लगातार वीडियो, पोस्ट और टिप्पणियों के माध्यम से एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। कई राजनीतिक कार्यकर्ता इसे “ऑनलाइन सियासी जंग” बता रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रही टिप्पणियों ने पार्टी के स्थानीय नेताओं के बीच तनाव बढ़ा दिया है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया केवल प्रचार का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का मंच भी बन चुका है। नेताओं के समर्थक अब डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश करते हैं। सहारनपुर का यह विवाद भी उसी प्रवृत्ति का उदाहरण माना जा रहा है।
हालांकि अब तक समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि वरिष्ठ नेता पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में संगठन स्तर पर दोनों पक्षों को संयम बरतने की सलाह दी जा सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी वर्ष नजदीक आते ही विभिन्न दलों में गुटबाजी और टिकट की प्रतिस्पर्धा बढ़ना सामान्य बात है, लेकिन यदि यह विवाद सार्वजनिक रूप से बढ़ता है तो पार्टी की छवि प्रभावित हो सकती है। खासकर तब, जब विपक्षी दल पहले से संगठनात्मक मजबूती पर काम कर रहे हों।
सहारनपुर में चल रही यह बयानबाजी अब केवल व्यक्तिगत विवाद तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे समाजवादी पार्टी की स्थानीय राजनीति और भविष्य की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। आने वाले समय में पार्टी नेतृत्व इस मामले को किस तरह संभालता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है। फिलहाल सोशल मीडिया पर जारी यह सियासी जंग पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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