Saints today : शिक्षा ऋषि स्वामी कल्याणदेव की पुण्यतिथि पर शुकतीर्थ में श्रद्धांजलि समारोह, उमड़े श्रद्धालु और संतगण आज

मोरना। शुकतीर्थ के जीर्णोद्धारक, शिक्षा ऋषि और महान संत पूज्यपाद वीतराग स्वामी कल्याणदेव जी महाराज की 22वीं पुण्यतिथि के अवसर पर श्री शुकदेव आश्रम, शुकतीर्थ में श्रद्धांजलि समारोह का शुभारंभ सोमवार से श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में हुआ। देशभर से पहुंचे संत-महात्माओं, भागवत भक्तों, अनुयायियों, शिक्षाविदों तथा समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने संत विभूति को भावपूर्ण श्रद्धासुमन अर्पित किए। आश्रम परिसर में पूरे दिन धार्मिक अनुष्ठान, वैदिक मंत्रोच्चार और संत स्मरण के कार्यक्रम आयोजित किए गए। मंगलवार को मुख्य पुण्यतिथि समारोह के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने समारोह में भाग लेते हुए कहा कि पूज्य स्वामी कल्याणदेव महाराज केवल एक संत नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के महान प्रेरणास्रोत थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समाज सेवा, शिक्षा के प्रसार, ग्रामीण विकास और मानव कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। उनका जीवन त्याग, तपस्या, सेवा और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि शुकतीर्थ का पुनरुत्थान और उसका वर्तमान स्वरूप स्वामी कल्याणदेव जी की दूरदृष्टि, कठोर परिश्रम और अटूट संकल्प का परिणाम है।
राज्यमंत्री ने कहा कि स्वामी कल्याणदेव महाराज ने पौराणिक महत्व वाले शुकतीर्थ को नई पहचान दिलाने का कार्य किया। उनके अथक प्रयासों से यह पवित्र स्थल न केवल धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बना, बल्कि शिक्षा, संस्कृति और भारतीय परंपरा के संरक्षण का भी महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार भी शुकतीर्थ के समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है, जिससे आने वाले समय में यह क्षेत्र धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत का और अधिक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।
कार्यक्रम में श्री शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानन्द महाराज ने संतों, श्रद्धालुओं और अतिथियों के साथ समाधि मंदिर में पुष्प अर्पित कर शिक्षा ऋषि को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि स्वामी कल्याणदेव जी का संपूर्ण जीवन सेवा, साधना और समर्पण की जीवंत मिसाल है। उन्होंने समाज को शिक्षा, संस्कार और मानव सेवा का जो संदेश दिया, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से संत के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. वीरपाल निर्वाल ने अपने संबोधन में कहा कि स्वामी कल्याणदेव महाराज ने सादगीपूर्ण जीवन जीते हुए समाज के वंचित, किसानों, मजदूरों और ग्रामीण क्षेत्रों के उत्थान के लिए अभूतपूर्व कार्य किए। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम माना और अनेक शिक्षण संस्थानों की स्थापना कर हजारों विद्यार्थियों के जीवन को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा ऋषि का योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
उन्होंने कहा कि स्वामी जी ने बिना किसी भेदभाव के मानव सेवा को ही ईश्वर की सच्ची आराधना माना। जाति, धर्म, वर्ग और क्षेत्र से ऊपर उठकर उन्होंने समाज के प्रत्येक व्यक्ति को समान दृष्टि से देखा। यही कारण है कि आज भी उनके अनुयायी उन्हें केवल एक संत नहीं, बल्कि समाज सुधारक, शिक्षाविद और राष्ट्रसेवक के रूप में याद करते हैं।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान आश्रम परिसर आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर रहा। सिद्ध अक्षय वट और श्री शुकदेव मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना संपन्न हुई। वैदिक परंपरा के अनुसार पूजन पुरोहित सुमन कृष्ण शास्त्री और ठाकुर प्रसाद द्वारा विधि-विधान से अनुष्ठान कराए गए। श्री शुकदेव संस्कृत विद्यालय के विद्यार्थियों ने वैदिक मंत्रों का सस्वर पाठ कर पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालुओं ने मंदिरों में दर्शन कर देश और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की।

समारोह में आए अतिथियों का पीठाधीश्वर स्वामी ओमानन्द महाराज ने अंगवस्त्र, धार्मिक साहित्य और प्रसाद भेंट कर सम्मान किया। उन्होंने कहा कि संत परंपरा भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है और समाज को सदैव ऐसे महापुरुषों के आदर्शों से प्रेरणा लेते रहना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे स्वामी कल्याणदेव महाराज के सेवा, शिक्षा और सद्भाव के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लें।
कार्यक्रम में ट्रस्टी ओमदत्त देव, रमेश मलिक, योगेंद्र सिंह, कथा व्यास अचल कृष्ण शास्त्री, ब्रह्मप्रकाश शर्मा, जितेंद्र कुच्छल, हरीश शर्मा, पूर्व प्रधानाचार्य जितेंद्र वर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक, संत, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने शिक्षा ऋषि के जीवन और उनके योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
ट्रस्टी ओमदत्त देव ने जानकारी देते हुए बताया कि 14 जुलाई को स्वामी कल्याणदेव जी महाराज की 22वीं पुण्यतिथि का मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। प्रातः 7 बजे से चरणाभिषेक, विशेष पूजा-अर्चना और यज्ञ की पूर्णाहुति होगी। इसके पश्चात श्री डोंगरे भागवत भवन में दोपहर 12:30 बजे तक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देशभर से संत-महात्मा, धार्मिक विद्वान, जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद और हजारों श्रद्धालु भाग लेंगे।
उन्होंने बताया कि श्रद्धांजलि सभा में स्वामी कल्याणदेव महाराज के जीवन, उनके आध्यात्मिक चिंतन, शिक्षा के क्षेत्र में योगदान, ग्रामीण विकास और समाज सेवा पर विस्तृत विचार रखे जाएंगे। साथ ही उनके दिखाए मार्ग पर चलने का सामूहिक संकल्प भी लिया जाएगा। आश्रम प्रशासन ने कार्यक्रम की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं।
शुकतीर्थ में आयोजित यह श्रद्धांजलि समारोह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सेवा, शिक्षा, संस्कार और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों को स्मरण करने का अवसर भी है। स्वामी कल्याणदेव महाराज का व्यक्तित्व और कृतित्व आज भी समाज को प्रेरित करता है। उनके द्वारा स्थापित आदर्श आने वाली पीढ़ियों को मानवता, शिक्षा, सेवा और राष्ट्रभक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते रहेंगे। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि शिक्षा ऋषि की तपोभूमि शुकतीर्थ से प्रसारित होने वाला सेवा और सद्भाव का संदेश समाज को सदैव नई दिशा प्रदान करता रहेगा।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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