Satyagraha Movement : राष्ट्रीय राजमार्ग घोटाले, भ्रष्टाचार और पत्रकार उत्पीड़न के विरुद्ध 1780 दिनों से जारी सत्याग्रह आन्दोलन

जौनपुर, 24 जून 2026। जनपद जौनपुर के कलेक्ट्रेट परिसर में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण से जुड़े कथित घोटाले, भ्रष्टाचार, भूमि अधिग्रहण में अनियमितताओं तथा पत्रकार उत्पीड़न के खिलाफ चलाया जा रहा सत्याग्रह आन्दोलन मंगलवार को अपने 1780वें दिन में प्रवेश कर गया। यह आन्दोलन 9 अगस्त 2021 से लगातार जारी है और इसकी अगुवाई सामाजिक कार्यकर्ता एवं आन्दोलनकारी यशवन्त कुमार गुप्त कर रहे हैं। लगभग पांच वर्षों से अधिक समय से चल रहे इस अनवरत धरने ने जिले के प्रशासनिक एवं जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है।
आन्दोलनकारी यशवन्त कुमार गुप्त का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण परियोजना के दौरान भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं, जिसके कारण अनेक किसानों और प्रभावित परिवारों को आर्थिक तथा सामाजिक नुकसान उठाना पड़ा है। उनका आरोप है कि अधिग्रहण से संबंधित मामलों में पारदर्शिता का अभाव रहा तथा कई शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने यह भी कहा कि प्रभावित लोगों की समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया गया, जिससे लोगों में असंतोष बढ़ा है।
सत्याग्रह आन्दोलन के दौरान एक प्रमुख मुद्दा जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के कथित फर्जी निस्तारण का भी है। आन्दोलनकारियों का आरोप है कि अनेक शिकायतों को बिना वास्तविक जांच और समाधान के निस्तारित दिखा दिया गया। उनका कहना है कि इससे शासन की शिकायत निवारण व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग रहा है। यशवन्त कुमार गुप्त ने मांग की कि शिकायतों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषी अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
धरना स्थल पर उपस्थित समर्थकों को संबोधित करते हुए यशवन्त कुमार गुप्त ने कहा कि उनका आन्दोलन किसी व्यक्तिगत हित के लिए नहीं, बल्कि जनहित और न्याय की स्थापना के लिए है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक आन्दोलन के मुख्य बिंदुओं पर निष्पक्ष जांच नहीं होती और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक सत्याग्रह जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण आन्दोलन जनता की आवाज को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
आन्दोलन के दौरान पत्रकारों की स्वतंत्रता और सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। आन्दोलनकारियों का कहना है कि यदि पत्रकारों को निष्पक्ष रूप से कार्य करने में बाधाएं उत्पन्न होंगी तो लोकतंत्र की बुनियाद कमजोर होगी। उन्होंने पत्रकार उत्पीड़न से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन की जिम्मेदारी है।

सत्याग्रह के 1780वें दिन आयोजित कार्यक्रम में क्षेत्र की कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की गई। विशेष रूप से सिरकोनी बाजार (इजरी) में हुई भीषण डकैती की घटना को लेकर आन्दोलनकारियों ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि घटना में शामिल अपराधियों की शीघ्र गिरफ्तारी कर उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। आन्दोलनकारियों का कहना था कि ऐसी घटनाएं आम नागरिकों के मन में भय का वातावरण पैदा करती हैं और अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई आवश्यक है।
धरने में उपस्थित लोगों ने कहा कि जनहित से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि विकास परियोजनाओं का उद्देश्य जनता का कल्याण होना चाहिए और यदि किसी परियोजना में भ्रष्टाचार या अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि वह जनता के विश्वास को मजबूत करने के लिए पारदर्शी एवं संवेदनशील रवैया अपनाए।
आन्दोलन को समर्थन देने के लिए विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और जनसंगठनों से जुड़े लोगों की उपस्थिति भी देखने को मिली। इस अवसर पर उदय प्रताप सिंह, आनन्द राव, हेमन्त कुमार यादव, राम बहाल यादव, नन्दलाल रावत, विजय प्रकाश मिश्र, विजय प्रताप सिंह, अमरेश कुमार पाण्डेय, राजितराम यादव, राम आसरे विश्वकर्मा, आदित्य नारायण शर्मा, नरेन्द्र गिरी और प्रेम प्रकाश मिश्र सहित अनेक समर्थक मौजूद रहे। सभी ने आन्दोलन के उद्देश्यों का समर्थन करते हुए न्यायपूर्ण समाधान की मांग दोहराई।
धरना स्थल पर उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि लम्बे समय से जारी यह आन्दोलन जनसमस्याओं को लेकर लोगों की गंभीरता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण संघर्ष और सत्याग्रह सामाजिक परिवर्तन के प्रभावी माध्यम रहे हैं। आन्दोलनकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि उनकी आवाज अंततः शासन और प्रशासन तक पहुंचेगी तथा संबंधित मामलों की निष्पक्ष जांच कर न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।
गौरतलब है कि 9 अगस्त 2021 से प्रारम्भ हुआ यह सत्याग्रह आन्दोलन अब जिले में जनचर्चा का महत्वपूर्ण विषय बन चुका है। लगातार 1780 दिनों तक बिना रुके आन्दोलन का जारी रहना अपने आप में एक उल्लेखनीय उदाहरण माना जा रहा है। आन्दोलनकारी इसे जनहित, पारदर्शिता, जवाबदेही और न्याय की लड़ाई बताते हैं। वहीं समर्थकों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह संघर्ष इसी प्रकार जारी रहेगा।
इस प्रकार 1780वें दिन भी आन्दोलनकारियों ने अपने संकल्प को दोहराते हुए भ्रष्टाचार, घोटालों, भूमि अधिग्रहण अनियमितताओं, पत्रकार उत्पीड़न और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर न्याय की मांग उठाई तथा प्रशासन से प्रभावी और निष्पक्ष कार्रवाई की अपेक्षा व्यक्त की।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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