
हापुड़ में विद्युत शॉर्ट सर्किट और हादसों से बचाव के लिए आयोजकों से अपील, सुरक्षित वायरिंग, अर्थिंग और अग्निशमन उपकरणों की व्यवस्था करने के निर्देश
हापुड़, 14 अक्टूबर 2026।
दुर्गा पूजा, रामलीला, शोभायात्रा, कलश यात्रा और मूर्ति विसर्जन जैसे धार्मिक आयोजनों के दौरान विद्युत शॉर्ट सर्किट और अन्य बिजली संबंधी दुर्घटनाओं से बचाव के लिए विद्युत सुरक्षा विभाग ने आयोजकों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक कार्यक्रमों में अस्थायी विद्युत व्यवस्था करते समय सुरक्षा मानकों का पालन करना बेहद जरूरी है। थोड़ी सी लापरवाही भी आग लगने, करंट लगने या गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। ऐसे में सभी आयोजकों को विद्युत उपकरणों, तारों, जनरेटर और अस्थायी विद्युत कनेक्शन की व्यवस्था सुरक्षित तरीके से करनी चाहिए।
विद्युत सुरक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश शासन, हापुड़ जोन के सहायक निदेशक इंजीनियर भगीरथ ने दुर्गा पूजा पंडालों और रामलीला आयोजकों से अपील की है कि वे विद्युत सुरक्षा से जुड़े निर्धारित बिंदुओं और सुझावों का गंभीरता से अनुपालन करें। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति रहती है। ऐसे में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पहले से सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम करना आवश्यक है।
अस्थायी विद्युत व्यवस्था में लापरवाही बन सकती है हादसे की वजह
विद्युत सुरक्षा विभाग की ओर से जारी अपील में बताया गया है कि दुर्गा पूजा पंडालों और रामलीला स्थलों पर आयोजकों द्वारा अस्थायी रूप से बिजली की व्यवस्था की जाती है। इन स्थानों पर रोशनी, पंखे, ध्वनि व्यवस्था, सजावट और अन्य उपकरणों के लिए विद्युत आपूर्ति की जरूरत होती है। कई बार अस्थायी वायरिंग करते समय तारों की क्षमता, विद्युत भार और सुरक्षा उपकरणों का ध्यान नहीं रखा जाता, जिससे शॉर्ट सर्किट या आग लगने जैसी घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है।
विभाग के अनुसार, धार्मिक आयोजनों के दौरान शोभायात्राओं, कलश यात्राओं और मूर्ति विसर्जन के समय भी विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। कई बार झंडे, डीजे या अन्य सामान की ऊंचाई अधिक होने के कारण वे बिजली की ओवरहेड लाइनों के संपर्क में आ सकते हैं। इससे गंभीर दुर्घटना हो सकती है। इसलिए आयोजकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पंडाल, मंच और अन्य अस्थायी प्रतिष्ठान बिजली की ओवरहेड लाइनों के नीचे स्थापित न किए जाएं।
मीटर के बाद उचित क्षमता के सुरक्षा उपकरण लगाना जरूरी
विद्युत सुरक्षा विभाग ने सलाह दी है कि किसी कार्यक्रम के लिए विद्युत संयोजन लेने के बाद मीटर से आगे विद्युत भार के अनुसार उचित क्षमता के फ्यूज, मेन स्विच और सर्किट ब्रेकर लगाए जाएं। विद्युत आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए उपयुक्त क्षमता के कटआउट और एमसीसीबी लगाने के बाद ही चेंजओवर स्विच में सप्लाई दी जानी चाहिए।
इस व्यवस्था का उद्देश्य किसी भी प्रकार की विद्युत गड़बड़ी की स्थिति में आपूर्ति को सुरक्षित रूप से नियंत्रित करना है। आयोजकों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि मेन स्विच, चेंजओवर स्विच, एमसीसीबी और अन्य विद्युत उपकरणों पर लगे तारों का इन्सुलेशन सही स्थिति में हो। यदि किसी तार का इन्सुलेशन क्षतिग्रस्त है, तो उसे तत्काल ठीक कराया जाए या बदला जाए।
विभाग ने कहा कि प्रत्येक विद्युत सर्किट को उसकी क्षमता के अनुरूप एमसीबी से नियंत्रित किया जाना चाहिए। सुरक्षा उपकरणों को बाईपास करके बिजली का उपयोग करना खतरनाक हो सकता है। इसलिए अस्थायी विद्युत व्यवस्था करते समय किसी भी सुरक्षा उपकरण को हटाने या निष्क्रिय करने से बचना चाहिए।
तारों पर क्षमता से अधिक विद्युत भार न डालें
धार्मिक आयोजनों में रोशनी, पंखे, सजावटी लाइट और अन्य विद्युत उपकरणों के एक साथ इस्तेमाल से बिजली का भार बढ़ सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए विभाग ने आयोजकों को तारों और केबलों पर उनकी निर्धारित क्षमता से अधिक विद्युत भार नहीं डालने की सलाह दी है।
जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, लाइट और पंखों के प्रत्येक सर्किट पर 800 वाट से अधिक का विद्युत भार नहीं डाला जाना चाहिए। इसी तरह पावर सर्किट में 2000 वाट से अधिक भार न डालने की सलाह दी गई है। आयोजकों को बिजली के उपकरणों की संख्या और उनकी क्षमता के अनुसार विद्युत व्यवस्था तैयार करानी चाहिए, ताकि तारों और उपकरणों पर अनावश्यक दबाव न पड़े।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अस्थायी वायरिंग में नंगे, कटे हुए, जर्जर या क्षतिग्रस्त तारों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। यदि तारों या केबलों में जोड़ लगाने की आवश्यकता हो, तो उचित कनेक्टर का उपयोग किया जाए। तारों को असुरक्षित तरीके से जोड़ने से शॉर्ट सर्किट और आग लगने का खतरा बढ़ सकता है।
पंखों और कूलर की अर्थिंग तथा सुरक्षित कनेक्शन पर जोर
विद्युत सुरक्षा विभाग ने पेडस्टल पंखों, कूलरों और धातु के खंभों की उचित अर्थिंग कराने की सलाह दी है। इसके लिए उपयुक्त क्षमता के अर्थ वायर या अर्थ स्ट्रिप का उपयोग किया जाना चाहिए। अर्थिंग की उचित व्यवस्था बिजली के उपकरणों में खराबी आने पर करंट से होने वाले जोखिम को कम करने में मदद करती है।
विभाग के अनुसार, कई बार पेडस्टल पंखे और कूलर जैसे पोर्टेबल विद्युत उपकरणों को बिना प्लग-सॉकेट के सीधे बिजली की सप्लाई से जोड़ दिया जाता है। यह तरीका सुरक्षित नहीं है। इसलिए प्रत्येक उपकरण को अलग-अलग उपयुक्त प्लग और सॉकेट के माध्यम से ही बिजली की आपूर्ति से जोड़ा जाना चाहिए।
इसके अलावा जनरेटर की बॉडी और न्यूट्रल की अलग-अलग उचित क्षमता के अर्थ कंडक्टर से दोहरी अर्थिंग कराने के निर्देश दिए गए हैं। यदि तीन फेज का जनरेटर इस्तेमाल किया जाता है, तो चार पोल वाला चेंजओवर स्विच लगवाया जाना चाहिए। इन उपायों का उद्देश्य अस्थायी विद्युत व्यवस्था को सुरक्षित बनाना और संभावित दुर्घटनाओं की आशंका कम करना है।
जनरेटर और मेन स्विच बोर्ड के पास रखें अग्निशमन उपकरण
विद्युत सुरक्षा विभाग ने आयोजकों को निर्देश दिया है कि जनरेटर और मेन स्विच बोर्ड के आसपास सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए जाएं। वहां सूखी रेत से भरी बाल्टियां और उपयुक्त अग्निशमन उपकरण उपलब्ध रखे जाएं, ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।
जनरेटर और मेन स्विच बोर्ड के चारों ओर फेंसिंग कराने की भी सलाह दी गई है। इससे अनधिकृत व्यक्तियों को इन उपकरणों के पास जाने से रोका जा सकेगा। धार्मिक आयोजनों में बच्चों और श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या रहती है, इसलिए बिजली से जुड़े संवेदनशील स्थानों को सुरक्षित रखना जरूरी है।
विभाग ने आयोजकों से कहा है कि विद्युत उपकरणों और जनरेटर के आसपास अनावश्यक भीड़ न लगने दें। विद्युत व्यवस्था की देखरेख की जिम्मेदारी ऐसे व्यक्ति को दी जानी चाहिए, जिसे उपकरणों के सुरक्षित संचालन की जानकारी हो।

बिजली और साउंड सिस्टम के तार अलग-अलग रखें
धार्मिक कार्यक्रमों में बिजली की वायरिंग के साथ ध्वनि व्यवस्था के लिए भी तार बिछाए जाते हैं। विद्युत सुरक्षा विभाग ने सलाह दी है कि बिजली और साउंड सिस्टम के तारों को साथ-साथ न लगाया जाए। माइक्रोफोन या साउंड सिस्टम को बिजली के खंभों से नहीं बांधना चाहिए।
पंडाल और मंच पर अधिक गर्मी उत्पन्न करने वाली लाइट, जैसे हैलोजन आदि के इस्तेमाल से भी बचने की सलाह दी गई है। अत्यधिक गर्मी उत्पन्न करने वाले उपकरणों से कपड़े, सजावटी सामग्री और अन्य ज्वलनशील वस्तुओं के संपर्क में आने पर आग लगने का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए रोशनी के लिए सुरक्षित उपकरणों का चयन करना और उन्हें उचित दूरी पर लगाना जरूरी है।
आयोजकों को मंच, पंडाल और बिजली के उपकरणों की स्थिति का पहले से निरीक्षण कर लेना चाहिए, ताकि कार्यक्रम के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो।
ओवरहेड बिजली लाइनों के नीचे न लगाएं पंडाल और मंच
विद्युत सुरक्षा विभाग ने सबसे महत्वपूर्ण सावधानियों में बिजली की ओवरहेड लाइनों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने को शामिल किया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ओवरहेड बिजली लाइनों के नीचे कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाना चाहिए। न ही वहां पंडाल, मंच या अन्य अस्थायी प्रतिष्ठान लगाए जाने चाहिए।
शोभायात्रा, कलश यात्रा और मूर्ति विसर्जन के दौरान भी झंडे, लोहे के पाइप, सरिया, डीजे और अन्य धातु की वस्तुओं को बिजली की लाइनों से पर्याप्त दूरी पर रखना आवश्यक है। ऐसी वस्तुएं यदि बिजली की लाइन के अत्यधिक करीब पहुंच जाएं, तो विद्युत आर्किंग के कारण दुर्घटना हो सकती है। इसलिए यात्रा का मार्ग तय करते समय बिजली की लाइनों की स्थिति का ध्यान रखा जाना चाहिए।
विभाग ने आयोजकों से अपील की है कि वे शोभायात्राओं और विसर्जन कार्यक्रमों के दौरान ऊंचे झंडों, धातु के पाइपों और डीजे की ऊंचाई को लेकर विशेष सतर्कता बरतें। किसी भी परिस्थिति में इन वस्तुओं को ओवरहेड लाइनों के संपर्क में आने की स्थिति में नहीं आने देना चाहिए।
मान्यता प्राप्त विद्युत ठेकेदार से ही कराएं कार्य
विद्युत सुरक्षा विभाग ने यह भी निर्देश दिया है कि आयोजक अपने परिसर में बिजली से संबंधित सभी कार्य राजकीय मान्यता प्राप्त विद्युत ठेकेदार से ही कराएं। अस्थायी विद्युत कनेक्शन, वायरिंग, अर्थिंग और जनरेटर की व्यवस्था विशेषज्ञ की देखरेख में कराने से सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।
सहायक निदेशक विद्युत सुरक्षा इंजीनियर भगीरथ ने आयोजकों से अपील की है कि वे धार्मिक आयोजनों की तैयारियों में विद्युत सुरक्षा को प्राथमिकता दें। श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना आयोजकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। थोड़ी सी सावधानी और निर्धारित नियमों का पालन करके बिजली से होने वाली दुर्घटनाओं की आशंका को कम किया जा सकता है।
विभाग का संदेश स्पष्ट है कि दुर्गा पूजा, रामलीला, शोभायात्रा और मूर्ति विसर्जन जैसे आयोजनों में आस्था के साथ सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा जाए। सुरक्षित वायरिंग, उचित अर्थिंग, सही क्षमता के सर्किट ब्रेकर, अग्निशमन उपकरण और बिजली की ओवरहेड लाइनों से पर्याप्त दूरी बनाए रखना दुर्घटनाओं से बचाव के लिए आवश्यक है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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