
मीरजापुर।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मीरजापुर के तत्वावधान में “साक्षर बचपन, सुरक्षित बचपन” अभियान के अंतर्गत श्री शिव इंटर कॉलेज मीरजापुर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्र-छात्राओं को बाल सुरक्षा, उनके कानूनी अधिकारों तथा किसी भी प्रकार के शोषण से बचाव के प्रति जागरूक करना रहा। कार्यक्रम में जिला जज महोदय ने विद्यार्थियों को पॉक्सो एक्ट, सुरक्षित स्पर्श और असुरक्षित स्पर्श के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी।
कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य, सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं, अभियान से जुड़े वॉलेंटियर तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम में बच्चों को सरल भाषा में कानून की जानकारी देते हुए उन्हें अपने अधिकारों और सुरक्षा के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला जज महोदय ने बच्चों को पॉक्सो एक्ट 2012 के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से पॉक्सो कानून बनाया गया है। यह कानून बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था है। विद्यार्थियों को बताया गया कि किसी भी बच्चे के साथ अनुचित व्यवहार अथवा अपराध होने की स्थिति में उसे चुप रहने के बजाय अपने माता-पिता, शिक्षक या किसी विश्वसनीय व्यक्ति को इसकी जानकारी देनी चाहिए।
उन्होंने बच्चों को समझाया कि उन्हें अपने शरीर और व्यक्तिगत सुरक्षा के संबंध में जागरूक रहना चाहिए। किसी भी व्यक्ति द्वारा ऐसा व्यवहार किया जाता है जिससे बच्चा असहज या असुरक्षित महसूस करे तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बच्चों को यह समझना आवश्यक है कि उनकी सुरक्षा और गरिमा महत्वपूर्ण है तथा किसी गलत व्यवहार के लिए उन्हें स्वयं को दोषी नहीं समझना चाहिए।
जिला जज महोदय ने सुरक्षित स्पर्श और असुरक्षित स्पर्श के बारे में भी बच्चों को विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बच्चों को समझाया कि सुरक्षित स्पर्श वह होता है जिसमें अपनापन, देखभाल और सुरक्षा की भावना हो, जबकि ऐसा स्पर्श जिससे बच्चा असहज, भयभीत या परेशान महसूस करे, उसके प्रति सतर्क रहना चाहिए। बच्चों को अपनी व्यक्तिगत सीमाओं के बारे में जागरूक करते हुए किसी भी असहज स्थिति में तुरंत सहायता मांगने के लिए प्रेरित किया गया।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि यदि कोई व्यक्ति उन्हें किसी ऐसे व्यवहार के लिए मजबूर करता है जिसे वे पसंद नहीं करते या जिससे उन्हें असुरक्षा महसूस होती है, तो वे स्पष्ट रूप से विरोध कर सकते हैं और वहां से हटकर किसी भरोसेमंद व्यक्ति को इसकी जानकारी दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को डरने अथवा घटना को छिपाने के बजाय उचित व्यक्ति तक बात पहुंचानी चाहिए।
कार्यक्रम में यह भी समझाया गया कि बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल उनके परिवार की नहीं, बल्कि विद्यालय, समाज और संबंधित संस्थाओं की भी है। विद्यालय में शिक्षकों की भूमिका बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें आवश्यक मार्गदर्शन देने में महत्वपूर्ण होती है। किसी बच्चे को परेशानी हो तो उसकी बात गंभीरता से सुनना और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना जरूरी है।
“साक्षर बचपन, सुरक्षित बचपन” अभियान के माध्यम से बच्चों को कानूनी साक्षरता से जोड़ने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में बताया गया कि कानून की जानकारी व्यक्ति को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाती है। विशेष रूप से बच्चों के लिए उनके संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी उन्हें कठिन परिस्थितियों में उचित कदम उठाने में मदद कर सकती है।
जिला जज महोदय ने विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया कि वे किसी भी प्रकार की परेशानी या संदेह की स्थिति में अपने माता-पिता और शिक्षकों से बात करें। उन्होंने कहा कि बच्चों को अपनी बात रखने में संकोच नहीं करना चाहिए। यदि कोई बच्चा किसी घटना के कारण परेशान है तो उसके साथ सहानुभूतिपूर्वक व्यवहार करते हुए उसकी सहायता करना आवश्यक है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि वे अपने मित्रों और सहपाठियों को भी बाल सुरक्षा के प्रति जागरूक कर सकते हैं। यदि किसी बच्चे को किसी प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ रहा हो तो उसके साथ खड़े होकर उसे उचित व्यक्ति तक अपनी बात पहुंचाने में मदद की जा सकती है।

जागरूकता कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों ने भी बच्चों की सुरक्षा और कानूनी जागरूकता को आवश्यक बताया। विद्यालय के प्रधानाचार्य ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ उनके अधिकारों और सुरक्षा से संबंधित जानकारी देना भी विद्यालय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम बच्चों को अपने आसपास की परिस्थितियों को समझने और आवश्यकता पड़ने पर सही कदम उठाने के लिए तैयार करते हैं। विद्यालय स्तर पर बाल सुरक्षा और कानूनी जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सहायक हो सकता है।
कार्यक्रम में अभियान से जुड़े वॉलेंटियरों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने विद्यार्थियों के बीच जागरूकता बढ़ाने में सहयोग किया और बच्चों को सुरक्षित वातावरण तथा अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने भी गंभीरता के साथ जिला जज महोदय की बातों को सुना।
बच्चों को बताया गया कि किसी भी प्रकार के अपराध की स्थिति में चुप रहना उचित नहीं है। अपने विश्वासपात्र व्यक्ति को घटना की जानकारी देना सहायता प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। बच्चों को यह भी समझाया गया कि उनकी सुरक्षा, सम्मान और गरिमा से समझौता नहीं होना चाहिए।
कार्यक्रम में पॉक्सो एक्ट के साथ-साथ बच्चों की व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर भी कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई। विद्यार्थियों को अपने आसपास के वातावरण के प्रति सजग रहने और किसी संदिग्ध अथवा अनुचित व्यवहार की स्थिति में तुरंत जानकारी देने के लिए प्रेरित किया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की इस पहल का उद्देश्य बच्चों को कानूनी जानकारी उपलब्ध कराने के साथ उन्हें जागरूक और आत्मविश्वासी बनाना रहा। कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को यह संदेश दिया गया कि कानून उनकी सुरक्षा के लिए है और आवश्यकता पड़ने पर उचित माध्यम से सहायता प्राप्त की जा सकती है।
विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भी कार्यक्रम को उपयोगी बताते हुए कहा कि बच्चों में कम उम्र से ही सुरक्षा और कानूनी अधिकारों को लेकर जागरूकता विकसित करना जरूरी है। इससे बच्चे स्वयं की सुरक्षा के साथ-साथ अपने आसपास के अन्य बच्चों की सुरक्षा के प्रति भी सजग हो सकते हैं।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय परिवार की ओर से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं जिला जज महोदय का आभार व्यक्त किया गया। विद्यालय प्रशासन ने कहा कि भविष्य में भी विद्यार्थियों के लिए बाल अधिकार, साइबर सुरक्षा, महिला एवं बाल सुरक्षा तथा कानूनी जागरूकता से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहने चाहिए।
इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य, सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं, अभियान के वॉलेंटियर तथा छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। “साक्षर बचपन, सुरक्षित बचपन” अभियान के तहत आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को पॉक्सो एक्ट, सुरक्षित एवं असुरक्षित स्पर्श तथा अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा। कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को अपनी सुरक्षा के प्रति सजग रहने, असहज परिस्थितियों में आवाज उठाने और आवश्यकता पड़ने पर विश्वसनीय लोगों से सहायता लेने का संदेश दिया गया।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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