
हापुड़।
जनपद में बाढ़ की संभावित स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी हापुड़ श्रीमती कविता मीना ने 21 अगस्त 2026 को बाढ़ संभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान जिलाधिकारी ने मौके पर पहुंचकर बाढ़ से प्रभावित होने वाले गांवों और वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां समय से पूरी कर ली जाएं और राहत कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही न हो।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने बाढ़ संभावित गांवों में राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियों की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से क्षेत्र में उपलब्ध राहत सामग्री, भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और अस्थायी आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने पर प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बाढ़ संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं पहले से सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था तैयार रखी जाए। इसके साथ ही अस्थायी आश्रय स्थलों पर मूलभूत सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने राहत सामग्री की उपलब्धता का भी जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ प्रभावित अथवा संभावित रूप से प्रभावित परिवारों के लिए पर्याप्त मात्रा में राहत सामग्री उपलब्ध रहे। जरूरतमंद लोगों को समय पर भोजन, आवश्यक सामग्री और अन्य सहायता उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि राहत सामग्री के वितरण में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
जिलाधिकारी ने पेयजल व्यवस्था को लेकर भी अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाढ़ संभावित क्षेत्रों में लोगों को स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाए। यदि किसी क्षेत्र में पेयजल की समस्या उत्पन्न होती है तो तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पेयजल आपूर्ति की लगातार निगरानी की जाए।
स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ संभावित क्षेत्रों में मेडिकल टीमों को सक्रिय रखा जाए। आवश्यकता पड़ने पर तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए मेडिकल कैंप आयोजित किए जाएं। उन्होंने कहा कि बाढ़ के दौरान संक्रामक बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह तैयार रहे।
जिलाधिकारी ने विशेष रूप से एंटी लार्वा का छिड़काव कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जलभराव वाले क्षेत्रों में मच्छरों के प्रजनन की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए समय से एंटी लार्वा का छिड़काव कराया जाए। इसके साथ ही प्रभावित एवं संभावित क्षेत्रों में साफ-सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाए।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा कि बाढ़ संभावित क्षेत्रों में जलभराव और गंदगी की स्थिति उत्पन्न न होने दी जाए। नालियों और आसपास के क्षेत्रों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए। सफाई व्यवस्था की निगरानी के लिए संबंधित अधिकारी मौके पर निरीक्षण करते रहें और जहां भी आवश्यकता हो, वहां तत्काल कार्रवाई करें।

जिलाधिकारी ने कहा कि बाढ़ जैसी आपदा के समय प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय अत्यंत आवश्यक है। सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया सुनिश्चित करें। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सभी आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता और कर्मचारियों की तैनाती की स्थिति की लगातार समीक्षा की जाए।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि बाढ़ संभावित गांवों में प्रशासनिक स्तर पर लगातार निगरानी रखी जाए। क्षेत्र में जलस्तर अथवा अन्य परिस्थितियों में बदलाव होने पर तत्काल उच्च अधिकारियों को जानकारी दी जाए। किसी भी स्थिति को हल्के में न लिया जाए और संभावित खतरे को देखते हुए पहले से आवश्यक कदम उठाए जाएं।
जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना ने कहा कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य बाढ़ की स्थिति में जनसामान्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों को राहत एवं सहायता उपलब्ध कराने में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। प्रशासन की ओर से हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि राहत कार्यों के लिए आवश्यक सामग्री और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित रखें। जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को तत्काल भोजन, पेयजल और दवाएं उपलब्ध कराई जाएं। अस्थायी आश्रय स्थलों पर भी आवश्यक व्यवस्थाएं पहले से पूरी कर ली जाएं, ताकि लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के बाद किसी प्रकार की परेशानी न हो।
जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि बाढ़ संभावित क्षेत्रों में मेडिकल टीमों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि चिकित्सा दल आवश्यक दवाओं और अन्य जरूरी संसाधनों के साथ तैयार रहें। किसी व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर उसे तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जाए।
साफ-सफाई के संबंध में जिलाधिकारी ने कहा कि बाढ़ संभावित क्षेत्रों में स्वच्छता को लेकर विशेष सतर्कता बरती जाए। जलभराव के कारण उत्पन्न होने वाली समस्याओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम समय रहते उठाए जाएं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सफाई कर्मचारियों की टीमों को सक्रिय रखा जाए और नियमित रूप से सफाई कार्य कराया जाए।
जिलाधिकारी ने राहत कार्यों में पारदर्शिता और संवेदनशीलता बनाए रखने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक टीमों को प्रभावित परिवारों की आवश्यकताओं के अनुसार सहायता उपलब्ध करानी चाहिए। किसी भी पात्र व्यक्ति को राहत और सहायता से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि बाढ़ जैसी परिस्थितियों में प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। इसलिए सभी अधिकारी अपने-अपने दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन करें। किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राहत कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
स्थलीय निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने स्थानीय परिस्थितियों को भी देखा और अधिकारियों से क्षेत्र की स्थिति के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि केवल कागजी तैयारियों से काम नहीं चलेगा, बल्कि जरूरत के समय मौके पर प्रभावी राहत एवं बचाव कार्य दिखाई देना चाहिए। इसलिए सभी विभाग अपनी तैयारियों को धरातल पर सुनिश्चित करें।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बाढ़ संभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी और सूचना तंत्र को मजबूत रखा जाए। किसी भी प्रकार की आपात स्थिति की सूचना मिलने पर तत्काल संबंधित टीम को मौके पर भेजा जाए। प्रशासनिक अमला हर परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार रहे।
उन्होंने कहा कि जनपद प्रशासन बाढ़ की संभावित स्थिति को लेकर पूरी तरह सतर्क है। राहत एवं बचाव कार्यों से जुड़े सभी विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा, आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता और समय पर राहत पहुंचाना है।
जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना ने दोहराया कि बाढ़ से प्रभावित अथवा संभावित रूप से प्रभावित किसी भी व्यक्ति को सहायता से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। प्रशासन द्वारा जरूरत के अनुसार हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे संवेदनशीलता के साथ कार्य करते हुए प्रभावित लोगों की समस्याओं का तत्काल समाधान करें।
21 अगस्त 2026 को जिलाधिकारी द्वारा किए गए इस स्थलीय निरीक्षण से प्रशासन की बाढ़ को लेकर तैयारियों की समीक्षा हुई। निरीक्षण के दौरान राहत सामग्री, भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं, मेडिकल कैंप, एंटी लार्वा छिड़काव, साफ-सफाई और अस्थायी आश्रय स्थलों जैसी व्यवस्थाओं पर विशेष जोर दिया गया।
जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखें और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू करें। उन्होंने कहा कि प्रशासन किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहे और जनता को समय पर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना सुनिश्चित करे।
जिलाधिकारी के निर्देशों के बाद संबंधित विभागों को बाढ़ संभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव की तैयारियों को और तेज करने के निर्देश दिए गए। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जनसुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी परिस्थिति में प्रभावित लोगों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने में कमी नहीं रखी जाएगी।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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