Successful surgery : बवासीर ?की सिकाई के दौरान मलद्वार में फंसा डेढ़ किलो का पत्थर, उर्सला अस्पताल में सफल सर्जरी

Successful surgery : बवासीर की सिकाई के दौरान मलद्वार में फंसा डेढ़ किलो का पत्थर, उर्सला अस्पताल में सफल सर्जरी
Successful surgery : बवासीर की सिकाई के दौरान मलद्वार में फंसा डेढ़ किलो का पत्थर, उर्सला अस्पताल में सफल सर्जरी

कानपुर। बवासीर से जल्द राहत पाने की कोशिश में 45 वर्षीय एक व्यक्ति के साथ ऐसा हादसा हुआ, जिसने डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया। घरेलू तरीके से बवासीर की सिकाई करना मरीज के लिए बेहद गंभीर साबित हो गया। सिकाई के दौरान करीब डेढ़ किलो वजनी पत्थर मलद्वार में चला गया और लगभग 48 घंटे तक अंदर फंसा रहा। हालत बिगड़ने पर मरीज को कानपुर के उर्सला अस्पताल लाया गया, जहां जांच के बाद डॉक्टरों ने मलद्वार में पत्थर फंसे होने की पुष्टि की। इसके बाद सर्जन डॉ. प्रशांत मिश्रा और उनकी टीम ने चुनौतीपूर्ण सर्जरी कर सर्जिकल उपकरणों की मदद से पत्थर को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। सफल ऑपरेशन के बाद मरीज अब खतरे से बाहर बताया जा रहा है।

यह मामला न केवल चिकित्सा जगत के लिए असामान्य है, बल्कि आम लोगों के लिए भी एक महत्वपूर्ण चेतावनी है कि किसी बीमारी से जल्द राहत पाने के लिए बिना चिकित्सकीय सलाह के अपनाए गए घरेलू और गैर-वैज्ञानिक तरीके कभी-कभी गंभीर परिणाम पैदा कर सकते हैं।

बवासीर से परेशान था 45 वर्षीय व्यक्ति

जानकारी के अनुसार सरसैया घाट निवासी 45 वर्षीय व्यक्ति बवासीर की समस्या से परेशान था। समस्या से जल्द राहत पाने के लिए उसने घरेलू उपचार का सहारा लिया। बताया गया कि बवासीर की सिकाई के दौरान करीब डेढ़ किलो वजन का पत्थर मलद्वार में चला गया।

शुरुआत में मरीज को उम्मीद थी कि पत्थर बाहर निकल जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पत्थर अंदर ही फंस गया और स्थिति धीरे-धीरे गंभीर होती गई। करीब 48 घंटे तक पत्थर मलद्वार में फंसा रहा। इस दौरान मरीज को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

जब दर्द और परेशानी बढ़ने लगी तथा स्थिति सामान्य नहीं हुई तो परिजन मरीज को उपचार के लिए उर्सला अस्पताल लेकर पहुंचे।

एक्सरे में सामने आई चौंकाने वाली स्थिति

उर्सला अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने मरीज की स्थिति को गंभीरता से लिया और आवश्यक जांच कराई। एक्सरे कराया गया तो डॉक्टरों के सामने भी चौंकाने वाली स्थिति सामने आई। जांच में मलद्वार के अंदर बड़ा पत्थर फंसा हुआ दिखाई दिया।

पत्थर का वजन करीब डेढ़ किलो बताया गया। इतनी बड़ी और भारी वस्तु का मलद्वार में फंसना अपने आप में बेहद असामान्य स्थिति थी। डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि पत्थर को किस तरह सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला जाए, ताकि आसपास के ऊतकों और आंतों को नुकसान न पहुंचे।

मरीज को तत्काल उपचार की जरूरत थी। डॉक्टरों ने स्थिति का आकलन करने के बाद सर्जरी का निर्णय लिया।

आंतों की ओर ऊपर खिसकने का था खतरा

सर्जरी के दौरान डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती पत्थर को सुरक्षित बाहर निकालना था। डॉक्टरों के अनुसार यदि पत्थर को निकालने के दौरान वह और ऊपर की ओर खिसक जाता तो स्थिति और जटिल हो सकती थी।

पत्थर के आंतों की ओर ऊपर जाने का खतरा बना हुआ था। ऐसे में डॉक्टरों को बेहद सावधानी के साथ सर्जिकल उपकरणों की मदद से उसे बाहर निकालना पड़ा। सर्जन डॉ. प्रशांत मिश्रा और उनकी टीम ने पूरी प्रक्रिया को सावधानीपूर्वक अंजाम दिया।

चुनौतीपूर्ण स्थिति के बावजूद डॉक्टरों को सफलता मिली और पत्थर को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत में सुधार बताया गया है।

सफल सर्जरी के बाद खतरे से बाहर मरीज

सर्जरी सफल होने के बाद मरीज को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया। डॉक्टरों के मुताबिक फिलहाल मरीज खतरे से बाहर है। समय पर अस्पताल पहुंचने और उपचार मिलने से स्थिति को नियंत्रित किया जा सका।

डॉक्टरों ने इस मामले को बेहद असामान्य बताते हुए कहा कि इस तरह की स्थिति में देरी गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती थी। यदि पत्थर लंबे समय तक अंदर फंसा रहता या आंतों की दिशा में खिसक जाता, तो मरीज की परेशानी और बढ़ सकती थी।

इस घटना ने यह भी दिखाया कि किसी सामान्य स्वास्थ्य समस्या को लेकर की गई छोटी सी लापरवाही कितनी बड़ी चिकित्सा आपात स्थिति में बदल सकती है।

Successful surgery : बवासीर की सिकाई के दौरान मलद्वार में फंसा डेढ़ किलो का पत्थर, उर्सला अस्पताल में सफल सर्जरी
Successful surgery : बवासीर की सिकाई के दौरान मलद्वार में फंसा डेढ़ किलो का पत्थर, उर्सला अस्पताल में सफल सर्जरी

जल्द राहत के चक्कर में खतरनाक प्रयोग

बवासीर एक ऐसी समस्या है, जिसके कारण मरीज को दर्द, जलन और असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। कई लोग इससे राहत पाने के लिए इंटरनेट, आसपास के लोगों या पारंपरिक घरेलू नुस्खों का सहारा लेते हैं। कई बार लोग बिना यह समझे कि समस्या की वास्तविक स्थिति क्या है, स्वयं ही उपचार शुरू कर देते हैं।

इस मामले में भी जल्द राहत पाने की कोशिश गंभीर स्थिति का कारण बन गई। सिकाई के दौरान पत्थर का मलद्वार में फंस जाना सामान्य घटना नहीं है, लेकिन यह घटना इस बात को जरूर रेखांकित करती है कि शरीर के संवेदनशील अंगों के साथ किसी भी तरह का प्रयोग खतरनाक हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार बवासीर या मलद्वार से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए उचित चिकित्सकीय जांच जरूरी है। हर मरीज की समस्या और उसकी गंभीरता अलग हो सकती है। इसलिए एक व्यक्ति को फायदा पहुंचाने वाला कोई घरेलू उपाय दूसरे व्यक्ति के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है।

बिना चिकित्सकीय सलाह के उपचार से बचने की अपील

डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या को लेकर स्वयं उपचार करने के बजाय योग्य चिकित्सक की सलाह लें। खासकर शरीर के संवेदनशील हिस्सों से जुड़ी समस्या में किसी भी तरह का जोखिम भरा प्रयोग नहीं करना चाहिए।

चिकित्सकीय सलाह के बिना किसी वस्तु का इस्तेमाल करना, अत्यधिक गर्म पानी या गर्म पदार्थ से सिकाई करना अथवा किसी अन्य तरीके से समस्या का उपचार करने की कोशिश नुकसान पहुंचा सकती है।

बवासीर की समस्या होने पर डॉक्टर मरीज की स्थिति, लक्षण और बीमारी की गंभीरता के अनुसार उपचार की सलाह देते हैं। इसलिए लक्षणों को छिपाने या अस्थायी राहत पाने के लिए जोखिम भरे उपाय अपनाने के बजाय समय पर चिकित्सक से संपर्क करना बेहतर है।

लोगों के लिए बड़ा स्वास्थ्य संदेश

उर्सला अस्पताल में सामने आया यह मामला समाज के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। अक्सर लोग छोटी स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर डॉक्टर के पास जाने में संकोच करते हैं और पहले घरेलू उपचार आजमाने लगते हैं। कुछ मामलों में घरेलू उपाय नुकसान नहीं करते, लेकिन बिना जानकारी के किए गए प्रयोग गंभीर चोट या संक्रमण का कारण बन सकते हैं।

मरीज को भी शुरुआत में शायद यह उम्मीद रही होगी कि समस्या अपने आप ठीक हो जाएगी। लेकिन करीब 48 घंटे तक पत्थर फंसे रहने के बाद जब हालत बिगड़ी तो अस्पताल पहुंचना पड़ा। यदि समय रहते चिकित्सा सहायता नहीं मिलती, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

डॉक्टरों की सलाह को गंभीरता से लेने की जरूरत

चिकित्सकों का कहना है कि स्वास्थ्य संबंधी समस्या में इंटरनेट या सुनी-सुनाई बातों के आधार पर उपचार शुरू करना उचित नहीं है। खासकर यदि दर्द लगातार बढ़ रहा हो, रक्तस्राव हो रहा हो, मल त्याग में परेशानी हो या कोई वस्तु शरीर के अंदर फंस गई हो तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।

इस घटना में भी समय पर अस्पताल पहुंचने से डॉक्टरों ने जांच के बाद वास्तविक स्थिति का पता लगाया और सर्जरी के माध्यम से पत्थर को बाहर निकाल दिया।

उर्सला अस्पताल में सफल सर्जरी के बाद 45 वर्षीय मरीज अब खतरे से बाहर है, लेकिन यह घटना एक गंभीर चेतावनी जरूर छोड़ गई है। बवासीर जैसी समस्या में जल्द राहत पाने के लिए बिना चिकित्सकीय सलाह के किए गए प्रयोग कभी-कभी जानलेवा स्थिति तक पहुंचा सकते हैं। इसलिए स्वास्थ्य समस्या चाहे छोटी लगे या बड़ी, योग्य चिकित्सक की सलाह लेना और जोखिम भरे स्वयं-उपचार से बचना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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