Siege of the assembly : 17 फरवरी को लखनऊ में विधानसभा का घेराव करने लखनऊ रवाना हुए कांग्रेसी ?

Siege of the assembly : 17 फरवरी को लखनऊ में विधानसभा का घेराव करने लखनऊ रवाना हुए कांग्रेसी

Siege of the assembly : 17 फरवरी को लखनऊ में विधानसभा का घेराव करने लखनऊ रवाना हुए कांग्रेसी
Siege of the assembly : 17 फरवरी को लखनऊ में विधानसभा का घेराव करने लखनऊ रवाना हुए कांग्रेसी

लखनऊ में 17 फरवरी को प्रस्तावित विधानसभा घेराव कार्यक्रम को लेकर Indian National Congress के नेताओं और कार्यकर्ताओं में व्यापक हलचल देखी गई। हापुड़ जिले से कांग्रेस जिलाध्यक्ष राकेश त्यागी सोमवार को लखनऊ के लिए रवाना हुए। उन्होंने कहा कि 17 फरवरी को प्रदेशभर से कांग्रेसजन राजधानी पहुंचकर विधानसभा का घेराव करेंगे और केंद्र व राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करेंगे।

राकेश त्यागी ने अपने प्रस्थान से पूर्व कहा कि देश और प्रदेश में बढ़ती महंगाई ने आम जनता का जीवन कठिन बना दिया है। खाद्य पदार्थों, ईंधन और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्धि से मध्यम वर्ग और गरीब वर्ग दोनों प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की सरकार आम जनता की समस्याओं से दूर होती जा रही है और जनहित के मुद्दों पर गंभीरता नहीं दिखा रही है। कांग्रेस कार्यकर्ता इसी जनभावना को आवाज देने के लिए विधानसभा घेराव में शामिल होंगे।

उन्होंने मनरेगा को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। त्यागी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का प्रमुख साधन रहे मनरेगा के बजट और क्रियान्वयन में लगातार कटौती की शिकायतें मिल रही हैं। इससे मजदूर वर्ग को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि रोजगार के अवसर कम होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह आंदोलन किसानों, मजदूरों और आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए है।

साथ ही, साधु-संतों के कथित अपमान के मुद्दे को भी कांग्रेस नेताओं ने उठाया। त्यागी ने कहा कि धार्मिक और सामाजिक भावनाओं का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संवेदनशील मुद्दों को लेकर दोहरा रवैया अपनाती है और इससे समाज में असंतोष फैलता है। कांग्रेस कार्यकर्ता इन सभी मुद्दों को लेकर विधानसभा का घेराव करेंगे और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखेंगे।

इस बीच, हापुड़ में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस प्रशासन द्वारा डिटेंड किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। राकेश त्यागी ने कहा कि कई स्थानीय कांग्रेस नेताओं को नजरबंद किया जा रहा है, जिससे वे लखनऊ जाकर प्रदर्शन में शामिल न हो सकें। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए कड़ी निंदा की। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतंत्र का मूल अधिकार है और प्रशासन को इसे बाधित नहीं करना चाहिए।

एससी-एसटी कांग्रेस जिलाध्यक्ष नरेश भाटी ने भी प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार कांग्रेस के विधानसभा घेराव कार्यक्रम से भयभीत है। उनके अनुसार, सरकार को आशंका है कि बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन में शामिल होकर जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाएंगे। इसी कारण प्रशासनिक दबाव बनाकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को रोका जा रहा है।

Siege of the assembly : 17 फरवरी को लखनऊ में विधानसभा का घेराव करने लखनऊ रवाना हुए कांग्रेसी
Siege of the assembly : 17 फरवरी को लखनऊ में विधानसभा का घेराव करने लखनऊ रवाना हुए कांग्रेसी

नरेश भाटी ने आरोप लगाया कि हापुड़ जिले के कई कांग्रेस नेताओं को नजरबंद किया गया है और पुलिस लगातार उनके घरों और कार्यालयों पर नजर रख रही है। उन्होंने कहा कि सरकार पुलिस बल का सहारा लेकर विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है, लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ता इस दबाव से डरने वाले नहीं हैं। उनका दावा है कि लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा और पार्टी कार्यकर्ता शांतिपूर्ण ढंग से अपना विरोध दर्ज कराएंगे।

जिला कांग्रेस महासचिव गौरव गर्ग भी इस अवसर पर मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह आंदोलन केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनहित का आंदोलन है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे अनुशासन बनाए रखें और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। उनका कहना है कि कांग्रेस संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास करती है और उसी दायरे में रहकर संघर्ष करेगी।

प्रदेश की राजनीति में विधानसभा घेराव जैसे कार्यक्रमों का विशेष महत्व माना जाता है। यह विपक्षी दलों के लिए अपनी ताकत दिखाने और सरकार पर दबाव बनाने का एक माध्यम होता है। 17 फरवरी को प्रस्तावित इस कार्यक्रम को लेकर प्रशासन भी सतर्क नजर आ रहा है। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी किए जाने और संभावित भीड़ को नियंत्रित करने के लिए तैयारियां की जा रही हैं।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन जनता की आवाज है और इसे दबाया नहीं जा सकता। वहीं, सरकार की ओर से अब तक इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे आंदोलनों से प्रदेश की राजनीतिक सरगर्मी और तेज हो जाती है तथा आगामी चुनावी समीकरणों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।

कुल मिलाकर, 17 फरवरी को लखनऊ में प्रस्तावित विधानसभा घेराव को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह और सरकार के प्रति असंतोष दोनों झलक रहे हैं। हापुड़ से लेकर राजधानी तक इस कार्यक्रम की चर्चा है। अब यह देखना होगा कि प्रदर्शन किस रूप में सामने आता है और इसका प्रदेश की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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