Dr. Mohan Bhagwat : सामाजिक विषमता, जातिगत भेदभाव, ऊंच-नीच और आरक्षण पर संघ प्रमुख डॉ मोहन भागवत की दो टूक

समाज में जब तक भेदभाव है, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिएजब तक सामाजिक विषमता है, तब तक भेदभाव ऊंच नीच है – शहरों में अलग तरीके से अस्पृश्यता के मामले देखे जाते हैं।गांवों में अलग तरीके से भेदभाव की बात सामने आती है – स्वतंत्रता, समानता का सभी को अधिकार है – इस भेदभाव को सामाजिक समरसता से ही समाप्त किया जा सकता है।स्वतंत्रता, समानता और न्याय का सभी को अधिकार है – इस भेदभाव को सामाजिक समरसता से ही समाप्त किया जा सकता है।
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत का सामाजिक विषमता, जातिगत भेदभाव, ऊंच- नीच और आरक्षण को लेकर राष्ट्रहित में एक बार फिर स्पष्ट बयान दिया है। उनके बयान ने हलचल तेज की है, इस बार डॉ. भागवत ने आरक्षण के पक्ष में महत्वपूर्ण बयान दिया। उनके इस बयान को वर्तमान राजनीतिक परिपेक्ष्य में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सामाजिक विषमता की कही बात
आरएसएस प्रमुख के सामाजिक विषमता, जातिगत भेदभाव, ऊंच-नीच और आरक्षण को लेकर संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की कड़ी में सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने साफ़ साफ़ कहा कि जब तक समाज में भेदभाव है, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए। संविधान में आरक्षण के तय प्रावधानों का पालन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक चेतना का असर दिख रहा है। जो लोग आरक्षण का लाभ लेकर संपन्न हो चुके हैं, वे अब खुद इसका लाभ छोड़ने लगे हैं। जब तक सामाजिक विषमता है, तब तक भेदभाव है। शहरों में अलग तरीके से अस्पृश्यता के मामले देखे जाते हैं। गांवों में अलग अलग तरीके से भेदभाव और ऊंच नीच की बात सामने आती है। स्वतंत्रता, समानता और न्याय का सभी को अधिकार है। इस भेदभाव को सामाजिक समरसता से ही समाप्त किया जा सकता है।

संघ की कार्यप्रणाली का जिक्र
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने संघ की कार्यप्रणाली का जिक्र किया। उन्होंने संघ में जातीय भेदभाव न होने की बात कही। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता के की दिशा में संघ लगातार सक्रिय है। संघ में किसी की जाति नहीं पूछी जाती। उन्होंने कहा, हिंदू शास्त्रों में भी सामाजिक कुरितियों और भेदभाव की कोई जगह नहीं है।
देश में सबका डीएनए एक
संघ प्रमुख ने कहा कि भारत के सभी लोगों का डीएनए एक ही है। ये बात वैज्ञानिक प्रमाणित है। उन्होंने कहा कि खानपान, पूजा, रीति-रिवाज भले ही अलग-अलग हो, लेकिन इन सबसे ऊपर सभी को आपस में एक सूत्र में जोड़ना ही हिंदुत्व है। उन्होंने कहा कि अखंड भारत के क्षेत्र से जुड़े सभी लोग, भले ही वे किसी भी धर्म के हों, वे आज भी वंशावली देखते हैं।
आखिर में आरएसएस सरसंघचालक ने कहा कि हमें
सामाजिक विषमता, जातिगत भेदभाव, और ऊंच-नीच से ऊपर उठकर देशहित में एक होकर अपने राष्ट्र को इतना मजबूत बनाना होगा कि कोई भी हमें डर न दिखा पाए। जब राष्ट्र सुरक्षित और प्रतिष्ठित होता है, तो विश्व में भी हम सुरक्षित होते हैं। उन्होंने कहा कि अपने स्वदेशी सिस्टम को हमें और मजबूत बनाना होगा। तभी हम विकसित राष्ट्र, विश्व गुरु बनेंगे। मोहन भागवत ने कहा कि आने वाले समय में विश्व का हर रास्ता भारत से ही होकर निकलेगा।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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