Expressed deep concern over mining : केन आरती में उठी नदियों को बचाने की आवाज, खनन पर जताई गहरी चिंता

बांदा जनपद में मंगलवार को आयोजित केन जल आरती कार्यक्रम एक बार फिर आस्था, पर्यावरण और नदी संरक्षण का बड़ा संदेश देकर गया। भूरागढ़ क्षेत्र स्थित केन आरती स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे और विधि-विधान के साथ मां केन की आरती की गई। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नदियों के लगातार घटते अस्तित्व और अवैध खनन को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। लोगों ने कहा कि यदि समय रहते नदियों के संरक्षण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
यह आयोजन विश्व हिंदू महासंघ गौ रक्षा समिति और गंगा समग्र कानपुर प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। प्रत्येक मंगलवार को आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम अब केवल धार्मिक आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि नदी संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता का महत्वपूर्ण अभियान बनता जा रहा है।
कार्यक्रम में शामिल श्रद्धालुओं ने केन नदी की वर्तमान स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि केन केवल एक नदी नहीं बल्कि बुंदेलखंड की जीवनरेखा है। हजारों किसानों की खेती, लाखों लोगों की प्यास और पूरे क्षेत्र का पर्यावरण इस नदी पर निर्भर है। श्रद्धालुओं ने कहा कि हम नदी को मां का दर्जा देते हैं, लेकिन यदि मां समान नदियों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाए तो भविष्य की पीढ़ियों के सामने जल संकट की भयावह स्थिति खड़ी हो सकती है।
कार्यक्रम में मौजूद महेश कुमार प्रजापति ने कहा कि केवल केन नदी ही नहीं बल्कि पूरे बुंदेलखंड की नदियां अवैध खनन और पर्यावरणीय उपेक्षा का शिकार हो रही हैं। उन्होंने कहा कि आए दिन अवैध खनन की खबरें सामने आती हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग और अधिकारी मौन बने रहते हैं। यदि इसी प्रकार नदियों का दोहन जारी रहा तो आने वाले समय में नदियां केवल इतिहास और कहानियों में ही दिखाई देंगी।
महेश प्रजापति ने कहा कि गंगा समग्र कानपुर प्रांत लगातार लोगों को नदी संरक्षण, स्वच्छता और जल बचाव के लिए जागरूक कर रहा है। गांव-गांव और शहर-शहर लोगों को यह समझाया जा रहा है कि नदियां केवल जल स्रोत नहीं बल्कि हमारी संस्कृति, सभ्यता और जीवन का आधार हैं। उन्होंने कहा कि केवल सरकारी योजनाओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि जनता को भी आगे आकर नदी बचाने की मुहिम में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
उन्होंने कहा कि जब तक समाज खुद अपनी नदियों के प्रति संवेदनशील नहीं होगा, तब तक स्थायी समाधान संभव नहीं है। लोगों को अवैध खनन, नदी प्रदूषण और जल दोहन के खिलाफ आवाज उठानी होगी। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे नदी संरक्षण के इस अभियान से जुड़ें और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने में सहयोग करें।
कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने दीप जलाकर मां केन से क्षेत्र की खुशहाली और जल संरक्षण की प्रार्थना की। आरती स्थल पर मौजूद लोगों ने “नदी बचाओ, जीवन बचाओ” के संदेश के साथ पर्यावरण संरक्षण का संकल्प भी लिया। कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक और जागरूकता से भरा हुआ दिखाई दिया।

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित वरिष्ठ समाजसेवी दिलीप कुमार सिंह ने कहा कि नदियों का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि पूरे समाज का दायित्व है। उन्होंने कहा कि यदि नदियां सुरक्षित रहेंगी तभी खेती, पेयजल और पर्यावरण संतुलन बना रहेगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे नदी किनारों को स्वच्छ रखें और अवैध गतिविधियों का विरोध करें।
कार्यक्रम में जिला सह प्रभारी आलोक कुमार निगम, जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेश कुमार धुरिया, जिला महामंत्री राकेश कुमार त्रिपाठी, जिला उपाध्यक्ष नवीन प्रकाश नीतू, जिला उपाध्यक्ष राघवेंद्र द्विवेदी, जिला उपाध्यक्ष अनीता गुप्ता, जिला मंत्री ठाकुर राहुल सिंह सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और श्रद्धालु उपस्थित रहे।
इसके अलावा प्रवीण सिंह चौहान, प्रशांत सिंह, गौरव वर्मा, कृष्ण कुमार, सुधांशु, सौरभ सैनी, सहदेव वर्मा और नीरज सहित कई लोग कार्यक्रम में शामिल हुए। सभी ने नदी संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि बुंदेलखंड जैसे जल संकट प्रभावित क्षेत्रों में नदियों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। केन नदी क्षेत्र की प्रमुख नदियों में से एक है और इसका जलस्तर लगातार प्रभावित हो रहा है। अत्यधिक खनन, जल दोहन और प्रदूषण के कारण नदी की प्राकृतिक धारा कमजोर पड़ती जा रही है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
पर्यावरणविदों का कहना है कि नदियों के किनारों पर वृक्षारोपण, अवैध खनन पर सख्ती और जल संरक्षण अभियान को जनआंदोलन बनाना बेहद जरूरी है। समाज और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से ही नदियों को बचाया जा सकता है।
बांदा में आयोजित केन जल आरती अब केवल धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण की मजबूत आवाज बनती जा रही है। हर मंगलवार को यहां जुटने वाले लोग न केवल मां केन की पूजा करते हैं बल्कि समाज को यह संदेश भी देते हैं कि यदि नदियां बचेंगी तभी जीवन सुरक्षित रहेगा।
कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं ने संकल्प लिया कि वे नदियों की स्वच्छता, संरक्षण और अस्तित्व बचाने के लिए निरंतर कार्य करेंगे तथा समाज में जागरूकता फैलाएंगे। केन आरती के माध्यम से उठी यह आवाज अब बुंदेलखंड में नदी बचाओ अभियान को नई दिशा देती दिखाई दे रही है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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