Message delivered : जौनपुर में स्कूल चलो अभियान रैली निकली, हर बच्चे के नामांकन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का संदेश दिया

जौनपुर, 9 जुलाई। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा शैक्षिक सत्र 2026-27 में प्रत्येक बच्चे को विद्यालय से जोड़ने और शिक्षा के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से गुरुवार को जनपद स्तरीय ‘स्कूल चलो अभियान’ रैली का भव्य आयोजन किया गया। टाउन हॉल मैदान से निकाली गई इस जागरूकता रैली को उत्तर प्रदेश सरकार के खेल एवं युवा कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गिरीश चंद्र यादव ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, शिक्षा विभाग के अधिकारियों तथा जनप्रतिनिधियों ने भाग लेकर समाज को यह संदेश दिया कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
रैली टाउन हॉल मैदान से प्रारंभ होकर कोतवाली चौराहा, चहारसू, शाही किला और अटाला मस्जिद सहित शहर के प्रमुख मार्गों से होकर पुनः टाउन हॉल मैदान पहुंची, जहां कार्यक्रम का समापन हुआ। पूरे मार्ग में छात्र-छात्राएं हाथों में तिरंगा और शिक्षा संबंधी प्रेरक स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर चल रहे थे। बच्चे “हर बच्चा स्कूल जाए”, “शिक्षा सबका अधिकार” और “बेटी पढ़ेगी, देश बढ़ेगा” जैसे नारों के माध्यम से लोगों को शिक्षा का महत्व समझाते दिखाई दिए।
रैली के दौरान विद्यार्थियों ने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों का विद्यालय में नामांकन अवश्य कराएं और उन्हें नियमित रूप से विद्यालय भेजें। बच्चों के उत्साह और जागरूकता संदेशों ने राहगीरों का ध्यान आकर्षित किया। कई स्थानों पर स्थानीय नागरिकों ने रैली का स्वागत भी किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्य मंत्री गिरीश चंद्र यादव ने कहा कि शिक्षा किसी भी राष्ट्र की प्रगति की सबसे मजबूत नींव होती है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। इसके लिए सरकार लगातार विशेष अभियान चलाकर प्रत्येक बच्चे को विद्यालय से जोड़ने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने बताया कि स्कूल चलो अभियान के पहले और दूसरे चरण में जनपद जौनपुर में लगभग 60 हजार नए विद्यार्थियों का नामांकन किया जा चुका है। उन्होंने विश्वास जताया कि 15 जुलाई तक यह संख्या और अधिक बढ़ेगी। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे केवल नामांकन तक सीमित न रहें, बल्कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देकर उनके उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करें।
राज्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। उनके मार्गदर्शन में ही आने वाली पीढ़ी का चरित्र, व्यक्तित्व और भविष्य तैयार होता है। इसलिए शिक्षकों का दायित्व केवल पढ़ाना ही नहीं, बल्कि बच्चों में संस्कार, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है।
कार्यक्रम में उपस्थित जिलाधिकारी सैमुअल पॉल एन. ने शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा जीवन का वास्तविक प्रकाश है, जो व्यक्ति को ज्ञान, आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी समान अवसर उपलब्ध कराना है।

जिलाधिकारी ने बताया कि सरकार की प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) योजना के माध्यम से प्रत्येक पात्र छात्र-छात्रा को 1,200 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। इस राशि का उपयोग यूनिफॉर्म, जूते, मोजे, स्वेटर, स्कूल बैग और अन्य आवश्यक शैक्षिक सामग्री खरीदने के लिए किया जाता है, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम हो सके।
उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों की नियमित विद्यालय उपस्थिति सुनिश्चित करें और शिक्षकों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखें। उन्होंने कहा कि विद्यालय, शिक्षक और अभिभावक यदि मिलकर कार्य करें तो बच्चों का सर्वांगीण विकास संभव है।
कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष मनोरमा मौर्या सहित शिक्षा विभाग के अनेक अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी समीर, नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी, विभिन्न खंड शिक्षा अधिकारी, जिला समन्वयक, एसआरजी, एआरपी, शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाई।
रैली के दौरान विद्यार्थियों ने शिक्षा के महत्व पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और जागरूकता संदेश भी प्रस्तुत किए। बच्चों के उत्साह और अनुशासन ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावशाली बना दिया। शहरवासियों ने भी अभियान की सराहना करते हुए इसे शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की महत्वपूर्ण पहल बताया।
बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा चलाया जा रहा स्कूल चलो अभियान केवल नामांकन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को नियमित रूप से विद्यालय से जोड़ना, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना और ड्रॉपआउट दर को कम करना भी है। विभाग का प्रयास है कि कोई भी बच्चा सामाजिक, आर्थिक या अन्य कारणों से शिक्षा से वंचित न रह जाए।
कार्यक्रम का सफल संचालन रमेश चंद्र पटेल एवं नुपूर श्रीवास्तव ने किया। अंत में सभी अतिथियों ने शिक्षा के प्रसार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और प्रत्येक बच्चे को विद्यालय तक पहुंचाने के लिए सामूहिक प्रयास करने का संकल्प दोहराया। इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों ने यह संदेश दिया कि शिक्षित समाज ही विकसित राष्ट्र की सबसे मजबूत पहचान होता है।