Notice Issued : दमोह में कलेक्टर सख्त, अनुपस्थित अधिकारियों पर कार्रवाई, 24 कर्मचारियों को नोटिस जारी

दमोह जिले में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितकारी बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर प्रताप नारायण यादव द्वारा सख्त रुख अपनाया गया है। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया है कि आमजन के कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी क्रम में जिले के विभिन्न शासकीय कार्यालयों का औचक निरीक्षण किया गया, जिसमें कई अधिकारी और कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए। अनुपस्थिति पर कड़ी नाराजगी जताते हुए संबंधितों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
कलेक्टर द्वारा एसडीएम कार्यालय दमोह, तहसील कार्यालय दमोह, तहसील कार्यालय दमयंती नगर तथा जनपद पंचायत कार्यालय दमोह का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि प्रशासनिक ढांचे के शीर्ष पदों पर बैठे कई अधिकारी भी अपने कार्यालय में उपस्थित नहीं थे। इसमें एसडीएम, तहसीलदार दमोह, तहसीलदार दमयंती नगर और नायब तहसीलदार जैसे अधिकारी अनुपस्थित मिले। यह स्थिति प्रशासनिक अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े करती है, जिस पर कलेक्टर ने तुरंत संज्ञान लिया।
निरीक्षण के दौरान कुल 24 कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए, जिनमें से 4 वरिष्ठ अधिकारी और 6 अन्य कर्मचारी विभिन्न तहसील कार्यालयों से अनुपस्थित थे। वहीं जनपद पंचायत कार्यालय में अकेले 14 कर्मचारी अनुपस्थित मिले। इस स्थिति को गंभीर मानते हुए सभी अनुपस्थित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं और उनसे तत्काल स्पष्टीकरण मांगा गया है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो संबंधितों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने कहा कि शासकीय कार्यालय जनता की सेवा के केंद्र हैं और इनका मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों के कार्यों का समयबद्ध निराकरण करना है। यदि अधिकारी और कर्मचारी समय पर कार्यालय नहीं पहुंचेंगे तो जनता को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा, जो किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता जनता को सुगम, पारदर्शी और त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराना है।
इसी उद्देश्य से जिले में डिजिटल मॉनिटरिंग प्रणाली को भी मजबूत किया जा रहा है। कलेक्टर ने बताया कि सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए “सार्थक ऐप” को अनिवार्य रूप से लागू किया गया है। इस ऐप के माध्यम से प्रत्येक कर्मचारी को प्रतिदिन अपनी उपस्थिति दर्ज करनी होगी, जिससे उनकी कार्यस्थल पर मौजूदगी की वास्तविक समय में निगरानी की जा सकेगी।

इस प्रणाली के लागू होने से प्रशासन को यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि कोई भी कर्मचारी बिना सूचना के अनुपस्थित न रहे और सभी अपने निर्धारित समय पर कार्यालय में उपस्थित हों। कलेक्टर ने कहा कि यह कदम केवल अनुशासन बनाए रखने के लिए नहीं बल्कि जनता की सेवा गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
निरीक्षण के दौरान यह भी देखा गया कि कई कार्यालयों में कार्य व्यवस्था अपेक्षित स्तर की नहीं थी। कुछ स्थानों पर फाइलों का निपटारा लंबित पाया गया, जिससे आमजन के कार्य प्रभावित हो सकते थे। कलेक्टर ने इस पर भी नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि शासन की मंशा है कि हर नागरिक को समय पर न्याय और सेवाएं मिलें, लेकिन यदि अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों के प्रति लापरवाह रहेंगे तो यह उद्देश्य पूरा नहीं हो सकेगा। इसलिए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी भूमिका गंभीरता से निभानी होगी।
कलेक्टर द्वारा की गई इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल देखने को मिली है। अनुपस्थित पाए गए अधिकारी और कर्मचारी अब अपने-अपने स्तर पर स्पष्टीकरण तैयार कर रहे हैं। वहीं, कई कार्यालयों में उपस्थिति व्यवस्था को लेकर सुधार के प्रयास भी शुरू हो गए हैं।
स्थानीय लोगों ने कलेक्टर की इस पहल की सराहना की है। नागरिकों का कहना है कि अक्सर सरकारी कार्यालयों में काम के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं, लेकिन यदि अधिकारी समय पर उपस्थित रहेंगे और कार्य समय पर निपटेंगे तो आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी। लोगों ने उम्मीद जताई कि इस तरह की सख्ती से प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार आएगा।
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित निरीक्षण और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसे कदम सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे न केवल अनुशासन बढ़ता है बल्कि जनता का भरोसा भी प्रशासन पर मजबूत होता है।
कलेक्टर ने सभी विभाग प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने कार्यालयों में उपस्थिति और कार्य निष्पादन की नियमित समीक्षा करें। साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि किसी भी नागरिक का कार्य अनावश्यक रूप से लंबित न रहे।
इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट संदेश गया है कि प्रशासन अब लापरवाही के प्रति किसी भी तरह की नरमी बरतने के मूड में नहीं है। कलेक्टर द्वारा की गई यह कार्रवाई आने वाले समय में जिले की प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक अनुशासित और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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