Review meeting : जिलाधिकारी ने खाद्य सुरक्षा समीक्षा बैठक में मिलावटखोरों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए

हापुड़ में खाद्य सुरक्षा और लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि जिले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। बैठक में दुकानों, होटलों, डेयरी और फूड प्रोसेसिंग यूनिटों की नियमित जांच करने तथा मिलावट पाए जाने पर कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में जिलाधिकारी कविता मीणा ने अधिकारियों से कहा कि जिले में संचालित सभी खाद्य प्रतिष्ठानों के एफएसएसएआई लाइसेंस की जांच सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि जिन दुकानों या प्रतिष्ठानों के पास वैध लाइसेंस नहीं है, उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए। जिलाधिकारी ने कहा कि आम जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाजार में बिक रहे दूध, मिठाई, खोवा, पनीर, तेल और मसालों के नियमित नमूने लिए जाएं और उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाए। गर्मियों के मौसम में खाद्य पदार्थ जल्दी खराब होने की संभावना अधिक रहती है, इसलिए इस समय विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि होटल, रेस्टोरेंट और मिठाई की दुकानों के किचन, काउंटर और स्टोरेज क्षेत्रों की साफ-सफाई और हाइजीन की नियमित जांच की जाए। जिलाधिकारी ने कहा कि यदि कहीं भी गंदगी, खराब खाद्य सामग्री या मिलावट पाई जाती है तो संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। इसमें लाइसेंस निलंबित करना, दुकान सील करना और एफआईआर दर्ज करना भी शामिल है।
उन्होंने कहा कि मिलावटी खाद्य पदार्थ लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। बाजार में नकली दूध, सिंथेटिक पनीर, मिलावटी मसाले और खराब तेल जैसे उत्पादों की बिक्री लोगों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए प्रशासन को लगातार निगरानी रखनी होगी।
बैठक में मौजूद अधिकारियों को निर्देशित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि जांच अभियान केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहना चाहिए। हर जांच पूरी गंभीरता और पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए ताकि आम जनता को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सके। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जांच रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत की जाए और जहां भी अनियमितता मिले, वहां तुरंत कार्रवाई हो।
खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने बैठक में जिले में चल रहे जांच अभियानों की जानकारी भी दी। अधिकारियों ने बताया कि समय-समय पर बाजारों में छापेमारी कर खाद्य पदार्थों के नमूने लिए जा रहे हैं। कई प्रतिष्ठानों को साफ-सफाई और गुणवत्ता सुधारने के निर्देश भी दिए गए हैं।
जिलाधिकारी ने कहा कि त्योहारों और शादी के मौसम में मिठाइयों और डेयरी उत्पादों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में मिलावट की घटनाएं भी बढ़ने लगती हैं। इसलिए प्रशासन को पहले से सतर्क रहना होगा। उन्होंने निर्देश दिए कि संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाया जाए।

बैठक में खाद्य पदार्थों के भंडारण की व्यवस्था पर भी चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि कई दुकानों और गोदामों में खाद्य सामग्री को सही तरीके से संग्रहित नहीं किया जाता, जिससे उसकी गुणवत्ता खराब हो जाती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्टोरेज क्षेत्रों का भी निरीक्षण किया जाए और जहां नियमों का उल्लंघन मिले वहां कार्रवाई की जाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि मिलावटी खाद्य पदार्थों का सेवन करने से पेट संबंधी बीमारियां, फूड पॉइजनिंग, एलर्जी और कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। नकली दूध और सिंथेटिक खाद्य पदार्थ बच्चों और बुजुर्गों के लिए अधिक खतरनाक साबित हो सकते हैं। इसलिए खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन बेहद जरूरी है।
बैठक में अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए कि खाद्य कारोबारियों को नियमों के प्रति जागरूक किया जाए। कई छोटे दुकानदार जानकारी के अभाव में नियमों का सही पालन नहीं कर पाते। ऐसे में उन्हें एफएसएसएआई के नियमों, साफ-सफाई और खाद्य सुरक्षा मानकों के बारे में जानकारी दी जाए ताकि वे अपने प्रतिष्ठानों को सुरक्षित और स्वच्छ बना सकें।
जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं बल्कि लोगों को जागरूक करना भी है। यदि व्यापारी और दुकानदार स्वयं जिम्मेदारी निभाएं तो खाद्य सुरक्षा की स्थिति काफी बेहतर हो सकती है। उन्होंने कहा कि आम जनता को भी जागरूक रहना चाहिए और खराब या संदिग्ध खाद्य पदार्थों की सूचना तुरंत प्रशासन को देनी चाहिए।
बैठक में यह भी तय किया गया कि आने वाले दिनों में जिलेभर में विशेष अभियान चलाकर खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच की जाएगी। स्कूलों, अस्पतालों और सार्वजनिक स्थानों के आसपास संचालित खाद्य दुकानों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी ताकि बच्चों और मरीजों को सुरक्षित खाद्य सामग्री मिल सके।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि स्वच्छता और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री किसी भी समाज के स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि बाजार में मिलावटी और खराब खाद्य पदार्थ बिकते हैं तो इसका सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ता है। यही कारण है कि सरकार और प्रशासन समय-समय पर खाद्य सुरक्षा अभियान चलाते रहते हैं।
बैठक के दौरान अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए कि जांच के दौरान पारदर्शिता बनाए रखी जाए और किसी भी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई हो। जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन की इस पहल का स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि बाजार में मिलावटी खाद्य पदार्थों की शिकायतें लगातार सामने आती रहती हैं। यदि प्रशासन नियमित जांच और सख्त कार्रवाई करता है तो लोगों को सुरक्षित खाद्य सामग्री मिल सकेगी।
फिलहाल जिला प्रशासन द्वारा खाद्य सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाने से खाद्य कारोबारियों में सतर्कता बढ़ गई है। आने वाले दिनों में जिले में बड़े स्तर पर जांच अभियान चलने की संभावना है। प्रशासन का उद्देश्य साफ है कि लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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