Specialized Training : हापुड़ में आरबीएसके चिकित्सा अधिकारियों को दिया गया टीबी उन्मूलन और जागरूकता का विशेष प्रशिक्षण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के टीबी मुक्त भारत के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से देशभर में लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। इसी क्रम में जनपद हापुड़ में भी जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीणा के निर्देशानुसार तथा मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. वेद प्रकाश अग्रवाल के नेतृत्व में टीबी उन्मूलन को लेकर स्वास्थ्य विभाग सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। इसी अभियान के तहत 27 मई 2026 को जिला क्षय रोग अधिकारी कार्यालय सभागार में आरबीएसके चिकित्सा अधिकारियों के लिए एक सीएमई यानी सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य चिकित्सा अधिकारियों को क्षय रोग यानी टीबी के प्रति अधिक जागरूक करना, उसके लक्षणों की पहचान, समय पर जांच और उपचार के बारे में विस्तृत जानकारी देना था। कार्यक्रम के दौरान टीबी मुक्त भारत अभियान की शपथ भी दिलाई गई और सभी प्रतिभागियों को टीबी उन्मूलन के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेश सिंह तथा उप जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. कृष्ण कुमार शर्मा ने आरबीएसके चिकित्सा अधिकारियों को टीबी रोग से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां विस्तारपूर्वक दीं। उन्होंने बताया कि टीबी एक गंभीर लेकिन पूरी तरह से ठीक होने वाली बीमारी है, यदि इसकी समय पर पहचान कर उचित उपचार शुरू किया जाए।
डॉ. राजेश सिंह ने प्रशिक्षण के दौरान बताया कि टीबी के लक्षणों की पहचान करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी आ रही हो, खांसी के साथ बलगम या खून आ रहा हो, भूख कम लग रही हो, वजन लगातार घट रहा हो, रात में अत्यधिक पसीना आता हो या बार-बार बुखार आता हो, तो ऐसे व्यक्ति को तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में जांच के लिए भेजना चाहिए।
उन्होंने चिकित्सा अधिकारियों से कहा कि यदि उनकी ओपीडी में इस प्रकार के लक्षणों वाला कोई मरीज आता है तो उसे गंभीरता से लेते हुए तुरंत टीबी जांच के लिए रेफर करें। समय पर जांच और उपचार शुरू होने से मरीज को गंभीर स्थिति में पहुंचने से बचाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि टीबी के मरीजों को सही सलाह देना और उनका मनोबल बढ़ाना भी चिकित्सा अधिकारियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
डॉ. राजेश सिंह ने बताया कि टीबी का इलाज पूरी तरह निशुल्क है और सरकार द्वारा मरीजों को बेहतर पोषण के लिए आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। उन्होंने जानकारी दी कि टीबी मरीजों के बैंक खाते में प्रतिमाह एक हजार रुपये की धनराशि पोषण सहायता के रूप में भेजी जाती है ताकि मरीज पौष्टिक आहार ले सके और जल्दी स्वस्थ हो सके।

कार्यक्रम के दौरान जिला पीपीएम कोऑर्डिनेटर सुशील चौधरी ने भी टीबी मुक्त भारत आंदोलन की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार का उद्देश्य केवल मरीजों का इलाज करना ही नहीं बल्कि समाज में जागरूकता फैलाकर टीबी को जड़ से खत्म करना है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार जागरूकता अभियान, जांच शिविर और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।
उन्होंने कहा कि टीबी के खिलाफ लड़ाई में सामुदायिक भागीदारी बेहद जरूरी है। जब तक समाज का हर व्यक्ति इस बीमारी के प्रति जागरूक नहीं होगा, तब तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने प्रतिभागियों से अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों को टीबी के लक्षणों और उपचार के बारे में जागरूक करें।
प्रशिक्षण शिविर में लगभग 30 प्रतिभागियों ने भाग लिया। सभी चिकित्सा अधिकारियों को टीबी की पहचान, जांच प्रक्रिया, दवा प्रबंधन और मरीजों की काउंसलिंग से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि टीबी मरीजों के साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए और उन्हें समाज में सम्मान के साथ जीने का अधिकार है।
डॉ. कृष्ण कुमार शर्मा ने प्रशिक्षण के दौरान कहा कि टीबी जैसी बीमारी को लेकर लोगों में कई प्रकार की गलतफहमियां और डर बने रहते हैं। कई मरीज समय पर जांच और इलाज नहीं कराते, जिसके कारण बीमारी गंभीर हो जाती है। इसलिए स्वास्थ्य कर्मियों की जिम्मेदारी है कि वे लोगों को सही जानकारी दें और उन्हें उपचार के लिए प्रेरित करें।
उन्होंने कहा कि आज भी ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में कई लोग टीबी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसे में चिकित्सा अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए और संदिग्ध मरीजों की समय पर जांच सुनिश्चित करनी चाहिए।
कार्यक्रम में मौजूद चिकित्सा अधिकारियों ने भी टीबी उन्मूलन अभियान को सफल बनाने का संकल्प लिया। सभी ने यह शपथ ली कि वे अपने क्षेत्र में टीबी मरीजों की पहचान, जांच और उपचार में पूरी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ कार्य करेंगे।
जिला क्षय रोग अधिकारी कार्यालय के कर्मचारियों का भी इस कार्यक्रम को सफल बनाने में विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम के आयोजन से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में उत्साह देखने को मिला।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से चिकित्सा अधिकारियों की कार्यक्षमता बढ़ती है और वे मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर पाते हैं। साथ ही इससे टीबी उन्मूलन अभियान को भी मजबूती मिलती है।
प्रधानमंत्री के टीबी मुक्त भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें लगातार प्रयास कर रही हैं। देशभर में टीबी के खिलाफ जनजागरूकता अभियान, मुफ्त जांच और मुफ्त इलाज जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। हापुड़ में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि टीबी की समय पर पहचान हो जाए और मरीज नियमित रूप से दवा लेता रहे तो यह बीमारी पूरी तरह ठीक हो सकती है। इसलिए लोगों को बीमारी छिपाने के बजाय तुरंत जांच करानी चाहिए।
हापुड़ में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि जागरूकता, समय पर जांच और सही उपचार के माध्यम से टीबी जैसी गंभीर बीमारी को हराया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग की यह पहल निश्चित रूप से टीबी मुक्त भारत अभियान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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