Caused a stir / Sparked panic : मुजफ्फरनगर में बाल श्रम उन्मूलन अभियान तेज, संयुक्त टीम की कार्रवाई से कई प्रतिष्ठानों में मचा हड़कंप

मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार जनपद मुजफ्फरनगर में बाल श्रम उन्मूलन को लेकर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। एक माह तक संचालित होने वाले इस अभियान के तहत प्रशासन और विभिन्न विभागों की संयुक्त टीम लगातार सार्वजनिक स्थानों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और संभावित संवेदनशील क्षेत्रों में निरीक्षण कर रही है। अभियान का उद्देश्य बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराई पर प्रभावी रोक लगाना, बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना तथा उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है।
जिलाधिकारी उमेश मिश्रा एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय वर्मा के निर्देश पर चलाए जा रहे इस विशेष अभियान का नेतृत्व सहायक श्रम आयुक्त देवेश सिंह कर रहे हैं। अभियान में श्रम विभाग के साथ मानव तस्करी विरोधी थाना, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तथा जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन संस्था की संयुक्त टीम सक्रिय भूमिका निभा रही है। टीम द्वारा रोडवेज बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, आर्य समाज रोड, मीनाक्षी चौक, जानसठ रोड तथा अन्य प्रमुख बाजारों और व्यावसायिक क्षेत्रों में सघन निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान विभिन्न दुकानों, ढाबों, होटलों, कार्यशालाओं और अन्य प्रतिष्ठानों की जांच की गई। टीम ने यह सुनिश्चित किया कि कहीं भी कम उम्र के बच्चों से मजदूरी या अन्य प्रकार का कार्य तो नहीं कराया जा रहा है। जिन स्थानों पर बाल श्रमिकों की पहचान हुई, वहां संबंधित सेवायोजकों को तत्काल नोटिस जारी किए गए और उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कानून का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा।
सहायक श्रम आयुक्त देवेश सिंह ने कहा कि बाल श्रम केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ गंभीर अन्याय भी है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे का पहला अधिकार शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानपूर्ण जीवन है। आर्थिक लाभ के लिए बच्चों से काम कराना उनके शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास को प्रभावित करता है। इसलिए समाज के प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह बाल श्रम जैसी कुप्रथा को समाप्त करने में प्रशासन का सहयोग करे।
उन्होंने बताया कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों और किशोरों से कानून के विरुद्ध कार्य कराना दंडनीय अपराध है। यदि किसी प्रतिष्ठान में बाल श्रम पाया जाता है तो संबंधित संचालक के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी व्यापारियों, उद्योग संचालकों और प्रतिष्ठान मालिकों से अपील की कि वे किसी भी परिस्थिति में बच्चों को रोजगार न दें और यदि कोई बच्चा मजदूरी करता दिखाई दे तो उसकी सूचना तुरंत संबंधित विभाग को उपलब्ध कराएं।
अभियान के दौरान टीम ने लोगों को बाल श्रम निषेध से जुड़े कानूनों की जानकारी भी दी। व्यापारियों और आम नागरिकों को बताया गया कि बच्चों को विद्यालय भेजना और उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। अधिकारियों ने कहा कि शिक्षा ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की सबसे मजबूत नींव है और प्रत्येक बच्चे को इसका अवसर मिलना चाहिए।

मानव तस्करी विरोधी थाना की टीम ने भी अभियान के दौरान लोगों को जागरूक किया कि कई बार बच्चों को रोजगार का झांसा देकर अवैध रूप से काम पर लगाया जाता है। ऐसे मामलों में मानव तस्करी और बाल शोषण जैसे गंभीर अपराध भी सामने आते हैं। इसलिए संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस या प्रशासन को देना आवश्यक है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रतिनिधियों ने बाल अधिकारों और कानूनी सहायता के संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि किसी भी बच्चे का शोषण कानूनन अपराध है। यदि कोई बच्चा बाल श्रम का शिकार है तो उसे कानूनी संरक्षण और पुनर्वास की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। ऐसे बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने का प्रयास भी किया जाता है।
जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन संस्था के प्रतिनिधियों ने कहा कि बाल श्रम समाप्त करने के लिए केवल प्रशासनिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। परिवार, विद्यालय, सामाजिक संस्थाएं और आम नागरिक यदि मिलकर प्रयास करें तो बाल श्रम जैसी समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे बच्चों को मजदूरी कराने के बजाय उनकी शिक्षा और विकास में सहयोग करें।
अभियान के दौरान कई प्रतिष्ठान संचालकों ने भी प्रशासन की पहल का समर्थन किया और भविष्य में बाल श्रम नहीं कराने का आश्वासन दिया। अधिकारियों ने उन्हें श्रम कानूनों का पालन करने और कर्मचारियों के सभी आवश्यक अभिलेख सुरक्षित रखने के निर्देश दिए।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि इसे पूरे एक माह तक लगातार चलाया जाएगा। समय-समय पर अलग-अलग क्षेत्रों में अचानक निरीक्षण किए जाएंगे ताकि कानून का पालन सुनिश्चित किया जा सके। यदि किसी प्रतिष्ठान में दोबारा बाल श्रम पाया जाता है तो उसके विरुद्ध और कठोर कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने कहा कि बच्चों का बचपन सुरक्षित रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए हैं ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। वहीं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय वर्मा ने कहा कि पुलिस प्रशासन बाल श्रम और मानव तस्करी से जुड़े मामलों में पूरी गंभीरता के साथ कार्रवाई कर रहा है और भविष्य में भी ऐसे अभियान लगातार जारी रहेंगे।
प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि यदि कहीं भी किसी बच्चे से मजदूरी कराई जाती दिखाई दे तो उसकी सूचना तुरंत संबंधित विभाग या पुलिस को दें। जनसहयोग से ही बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराई को समाप्त किया जा सकता है और प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, शिक्षित तथा सम्मानजनक जीवन प्रदान किया जा सकता है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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