The impact of pressure : सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, निवेशकों में हलचल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव का असर ?

The impact of pressure : सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, निवेशकों में हलचल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव का असर

The impact of pressure : सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, निवेशकों में हलचल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव का असर
The impact of pressure : सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, निवेशकों में हलचल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव का असर

नई दिल्ली। देश और दुनिया के सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट का दौर जारी है। बीते कुछ दिनों से कीमती धातुओं के भाव में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, जिससे निवेशकों और ज्वैलरी कारोबारियों में चिंता और चर्चा दोनों बढ़ गई है। 29 जून 2026 को भी वैश्विक और घरेलू बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स (COMEX) गोल्ड की कीमत में 27.75 डॉलर की गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद यह 4,059.26 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता देखा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक संकेतकों में सुधार, डॉलर की मजबूती और निवेशकों के रुख में बदलाव के कारण सोने की मांग पर दबाव बना हुआ है।

भारत के घरेलू सर्राफा बाजार में भी इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। लगातार बढ़ते रिकॉर्ड स्तर के बाद अब सोने की कीमतों में गिरावट का रुझान बना हुआ है। जानकारी के अनुसार, 29 जनवरी 2026 को सोना अपने अब तक के उच्चतम स्तर 1.79 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था, लेकिन अब इसमें बड़ी गिरावट दर्ज की गई है और यह लगभग 1.36 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया है।

इसी तरह चांदी की कीमतों में भी भारी गिरावट देखने को मिल रही है। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के अनुसार, 29 जनवरी को चांदी का भाव लगभग 3.86 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया था, जो अब घटकर करीब 2.15 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया है। यानी चांदी अपने उच्चतम स्तर से लगभग 1.69 लाख रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हो चुकी है।

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि सोने और चांदी की कीमतों में यह गिरावट कई वैश्विक कारणों का परिणाम है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्याज दरों से जुड़े संकेत, कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता और निवेशकों द्वारा सुरक्षित निवेश (safe haven) के रूप में सोने की मांग में कमी इसका प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। इसके अलावा डॉलर इंडेक्स में मजबूती भी कीमती धातुओं की कीमतों पर दबाव डाल रही है।

घरेलू स्तर पर भी मांग और आपूर्ति के संतुलन में बदलाव देखने को मिल रहा है। शादी-ब्याह और त्योहारी सीजन को छोड़कर सामान्य दिनों में आभूषणों की मांग अपेक्षाकृत कम रहती है, जिससे भी कीमतों पर असर पड़ता है। हालांकि ज्वैलरी कारोबारियों का मानना है कि कीमतों में गिरावट से आने वाले समय में मांग बढ़ सकती है।

The impact of pressure : सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, निवेशकों में हलचल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव का असर
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29 जून 2026 के ताजा रेट के अनुसार विभिन्न कैरेट के सोने की कीमतें इस प्रकार रहीं:

24 कैरेट शुद्धता वाला सोना लगभग 1,39,461 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है। यह सोने का सबसे शुद्ध रूप माना जाता है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से निवेश के लिए किया जाता है।

22 कैरेट सोना, जिसका उपयोग आभूषण निर्माण में अधिक होता है, लगभग 1,28,260 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर दर्ज किया गया है। भारतीय बाजार में अधिकांश ज्वैलरी इसी कैरेट में बनाई जाती है।

18 कैरेट सोना, जो अपेक्षाकृत कम शुद्धता वाला होता है और फैशन ज्वैलरी में उपयोग किया जाता है, लगभग 1,05,017 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास रहा।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि सोने की कीमतों में यह गिरावट अस्थायी भी हो सकती है, क्योंकि वैश्विक अनिश्चितताओं के दौरान सोना हमेशा एक सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता है। जैसे ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक या राजनीतिक तनाव बढ़ता है, सोने की मांग फिर से बढ़ सकती है।

वहीं, निवेशकों के लिए यह समय सावधानी और रणनीति का माना जा रहा है। कुछ विशेषज्ञों का सुझाव है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट खरीदारी का अवसर हो सकती है, जबकि अल्पकालिक निवेशकों को बाजार के रुझान पर नजर रखनी चाहिए।

चांदी के बाजार में भी इसी प्रकार का दबाव देखा जा रहा है। औद्योगिक मांग, इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर सेक्टर में उपयोग के बावजूद कीमतों में गिरावट ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि चांदी की कीमतें भविष्य में औद्योगिक मांग बढ़ने पर फिर से ऊपर जा सकती हैं।

सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि कीमतों में इस तरह की तेज गिरावट से बाजार में अनिश्चितता का माहौल बनता है, लेकिन यह उपभोक्ताओं के लिए अवसर भी लेकर आता है। जो लोग लंबे समय से सोना खरीदने की योजना बना रहे थे, उनके लिए यह समय अपेक्षाकृत अनुकूल माना जा रहा है।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सोने और चांदी की कीमतें केवल घरेलू कारणों पर निर्भर नहीं करतीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक स्थिति, अंतरराष्ट्रीय ब्याज दरों और निवेश प्रवृत्तियों पर अधिक आधारित होती हैं। इसलिए आने वाले महीनों में भी इसमें उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।

कुल मिलाकर, 29 जून 2026 का दिन सर्राफा बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहा, जहां लगातार बढ़ते भावों के बाद अब कीमतों में तेज गिरावट ने नया रुख दिखाया है। यह गिरावट कितनी स्थायी होगी, यह आने वाले वैश्विक आर्थिक संकेतों पर निर्भर करेगा।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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