Demand for action : ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद भी नहीं खुला प्राथमिक विद्यालय, ग्रामीणों ने प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग ?

Demand for action : ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद भी नहीं खुला प्राथमिक विद्यालय, ग्रामीणों ने प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग

Demand for action : ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद भी नहीं खुला प्राथमिक विद्यालय, ग्रामीणों ने प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग
Demand for action : ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद भी नहीं खुला प्राथमिक विद्यालय, ग्रामीणों ने प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग

पथरिया। दमोह जिले के पथरिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम पिपरिया लोहार में संचालित कक्षा पहली से पांचवीं तक के प्राथमिक विद्यालय के ग्रीष्मकालीन अवकाश समाप्त होने के बाद भी नियमित रूप से शुरू नहीं होने का मामला सामने आया है। विद्यालय बंद रहने से छात्र-छात्राओं, अभिभावकों और ग्रामीणों में चिंता का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूल के समय पर संचालित नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जबकि नए शैक्षणिक सत्र में प्रवेश प्रक्रिया भी बाधित हो रही है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचने के बावजूद अब तक विद्यालय का नियमित संचालन सुनिश्चित करने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो इसका सीधा असर बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य पर पड़ेगा।

जानकारी के अनुसार, प्रदेशभर में ग्रीष्मकालीन अवकाश समाप्त होने के बाद अधिकांश सरकारी विद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हो चुकी है। स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया, पाठ्यपुस्तकों का वितरण और नियमित शिक्षण कार्य प्रारंभ हो गया है। लेकिन ग्राम पिपरिया लोहार में स्थित प्राथमिक विद्यालय के नियमित रूप से संचालित नहीं होने की शिकायत सामने आने से अभिभावकों में असंतोष बढ़ गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि कई छात्र प्रतिदिन स्कूल पहुंच रहे हैं, लेकिन विद्यालय बंद मिलने के कारण उन्हें बिना पढ़ाई किए वापस घर लौटना पड़ रहा है। इससे बच्चों का उत्साह भी कम हो रहा है और अभिभावकों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

अभिभावकों के अनुसार, नया शैक्षणिक सत्र बच्चों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसी दौरान नई कक्षाओं का प्रारंभ, पाठ्यक्रम की शुरुआत और प्रवेश संबंधी औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं। यदि शुरुआती दिनों में ही विद्यालय नियमित रूप से संचालित नहीं होगा तो बच्चों की पढ़ाई का नुकसान होगा, जिसकी भरपाई बाद में करना कठिन हो सकता है।

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि जन शिक्षक और बीआरसी (ब्लॉक रिसोर्स सेंटर) स्तर पर भी मामले को अपेक्षित गंभीरता से नहीं लिया गया है। उनका कहना है कि विद्यालय की स्थिति की जानकारी संबंधित अधिकारियों को होने के बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने नहीं आया है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि विद्यालय समय पर क्यों शुरू नहीं हो पाया। यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

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क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि शिक्षा प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार है और सरकारी विद्यालयों का समय पर संचालन सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उनका मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले अधिकांश बच्चे सरकारी विद्यालयों पर ही निर्भर हैं, इसलिए किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या शैक्षणिक लापरवाही का सबसे अधिक असर इन्हीं विद्यार्थियों पर पड़ता है।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि प्राथमिक स्तर की शिक्षा बच्चों के बौद्धिक और मानसिक विकास की मजबूत नींव होती है। यदि शुरुआती दिनों में पढ़ाई बाधित होती है तो बच्चों की सीखने की गति प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि प्रत्येक विद्यालय का समय पर खुलना और नियमित शिक्षण कार्य होना अत्यंत आवश्यक माना जाता है।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि कई अभिभावक अपने बच्चों का प्रवेश कराने विद्यालय पहुंचे, लेकिन विद्यालय नियमित रूप से संचालित नहीं होने के कारण उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। इससे नए प्रवेश भी प्रभावित हो रहे हैं और कई परिवार असमंजस की स्थिति में हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि विद्यालय जल्द शुरू नहीं हुआ तो बच्चों की पढ़ाई लगातार प्रभावित होती रहेगी। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी तथा जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है ताकि विद्यालय में नियमित शिक्षण कार्य प्रारंभ कराया जा सके।

सामाजिक संगठनों का भी मानना है कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों का समयबद्ध समाधान होना चाहिए। यदि किसी विद्यालय में शिक्षक की कमी, प्रशासनिक समस्या या अन्य कोई कारण है तो उसे तत्काल दूर किया जाना चाहिए, ताकि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो।

शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार विद्यालयों में निर्धारित समय पर शिक्षण कार्य शुरू होना चाहिए और विद्यार्थियों को नियमित रूप से शिक्षा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है कि वे विद्यालयों की नियमित निगरानी करें और किसी भी समस्या का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करें।

फिलहाल ग्राम पिपरिया लोहार के अभिभावक और ग्रामीण प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की उम्मीद लगाए हुए हैं। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि बच्चों की शिक्षा को सुचारु रूप से शुरू कराना है। उन्होंने मांग की है कि विद्यालय को नियमित रूप से संचालित कराया जाए, प्रवेश प्रक्रिया पूरी कराई जाए और यदि कहीं लापरवाही हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।

अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग पर हैं कि वह इस मामले में क्या कदम उठाता है। यदि प्रशासन समय रहते हस्तक्षेप करता है तो बच्चों की पढ़ाई जल्द पटरी पर लौट सकती है और अभिभावकों की चिंताएं भी दूर हो सकती हैं।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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