Questions Raised : एसआईटी जांच रिपोर्ट में गणना कक्ष से कथित गड़बड़ी का खुलासा, कई कर्मचारियों की भूमिका पर उठे सवाल

नई दिल्ली। श्रीराम मंदिर से जुड़े दान और गणना व्यवस्था के संदर्भ में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। नौ पेज की इस रिपोर्ट में गणना कक्ष में हुई कथित चोरी और गबन की घटनाओं को प्रथम दृष्टया सही पाए जाने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज की जांच में कुछ कर्मचारियों की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं और कई घटनाओं को दर्ज किया गया है।
बताया जा रहा है कि ट्रस्ट की बैठक के बाद एसआईटी की जांच रिपोर्ट मीडिया तक पहुंची। रिपोर्ट में कहा गया है कि गणना कक्ष में रखी गई धनराशि से संबंधित अनियमितताओं की जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिनसे प्रथम दृष्टया गड़बड़ी की पुष्टि होती है।
एसआईटी ने अपनी जांच के दौरान 27 अप्रैल से 5 जून तक के सीसीटीवी फुटेज की विस्तृत समीक्षा की। जांच में करीब 70 संदिग्ध घटनाओं का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, कथित गड़बड़ी किसी एक दिन की घटना नहीं थी, बल्कि यह लगातार कई दिनों तक चलती रही। हालांकि एसआईटी ने यह भी कहा है कि इससे पहले की घटनाओं का पूर्ण आकलन सीसीटीवी उपलब्ध नहीं होने के कारण संभव नहीं हो सका।
रिपोर्ट में बताया गया है कि मंदिर प्रशासन और संबंधित व्यवस्था के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और समझौता ज्ञापन (MoU) मौजूद थे, लेकिन उनका प्रभावी तरीके से पालन नहीं किया गया। एसआईटी ने सुरक्षा व्यवस्था में हुई लापरवाही को गंभीर माना है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, गणना कक्ष में सुरक्षा से जुड़े कई आवश्यक नियमों का पालन नहीं किया गया। इसमें तलाशी प्रक्रिया, सीसीटीवी निगरानी, सुरक्षा व्यवस्था और निर्धारित प्रोटोकॉल के पालन में कमी का उल्लेख किया गया है। एसआईटी ने इसे व्यवस्था स्तर पर गंभीर चूक बताया है।
रिपोर्ट में छह लोगों की भूमिका प्रथम दृष्टया संदिग्ध बताई गई है। इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, करुणेश पाण्डेय और रमाशंकर मिश्रा के नाम शामिल होने की बात कही गई है। एसआईटी ने इन लोगों की भूमिका की जांच आगे बढ़ाने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की है।
जांच रिपोर्ट में कई आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि अंतिम कार्रवाई जांच एजेंसियों और संबंधित अधिकारियों द्वारा उपलब्ध तथ्यों के आधार पर की जाएगी।

एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में पर्यवेक्षण स्तर पर भी सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा निगरानी और सुरक्षा व्यवस्थाओं को प्रभावी तरीके से लागू नहीं कराया गया। इसके अलावा कुछ अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
रिपोर्ट में अनिल मिश्रा से संबंधित निगरानी व्यवस्था को लेकर भी टिप्पणियां किए जाने की जानकारी है। इसमें सुरक्षा व्यवस्था लागू कराने और प्रक्रिया की निगरानी में कमी का उल्लेख किया गया है। वहीं गणना प्रभारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।
एसआईटी की रिपोर्ट में हंडियों की चाबियों के नियंत्रण को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, चाबियों के प्रबंधन में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और अनौपचारिक नियंत्रण जैसी स्थिति सामने आई। जांच दल ने इसे सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिकोण से गंभीर विषय माना है।
इसके अलावा रिपोर्ट में कर्मचारियों की नियुक्ति और कार्य आवंटन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। एसआईटी ने इस बात की जांच की है कि संबंधित कर्मचारियों को किस आधार पर जिम्मेदारियां दी गईं और क्या निर्धारित नियमों का पालन किया गया था।
सीसीटीवी फुटेज की जांच के दौरान कुछ कर्मचारियों के नोट छिपाने और हटाने जैसी गतिविधियों का उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है। जांच दल ने इन गतिविधियों को संदिग्ध मानते हुए आगे की कार्रवाई के लिए आवश्यक बिंदु दर्ज किए हैं।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जांच अभी पूरी तरह अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंची है। एसआईटी द्वारा अंतिम रिपोर्ट अलग से भेजी जाएगी, जिसमें जांच के सभी पहलुओं और उपलब्ध साक्ष्यों का विस्तृत विवरण शामिल होगा।
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एसआईटी रिपोर्ट में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम शामिल नहीं है। रिपोर्ट में उनके संबंध में कोई टिप्पणी भी नहीं की गई है। एसआईटी ने जिन बिंदुओं पर जांच की है, वे मुख्य रूप से गणना कक्ष, सुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों की भूमिका और प्रक्रिया में हुई कथित लापरवाहियों से जुड़े हैं।
मामले के सामने आने के बाद मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं और सुरक्षा प्रक्रियाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े धार्मिक और सार्वजनिक संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता, मजबूत निगरानी व्यवस्था और स्पष्ट जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है।
रिपोर्ट सामने आने के बाद अब आगे की कार्रवाई जांच एजेंसियों और संबंधित प्रशासनिक स्तर पर निर्भर करेगी। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट ने गणना कक्ष की व्यवस्थाओं, सुरक्षा प्रोटोकॉल और कुछ कर्मचारियों की भूमिका को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। प्रशासन और जांच एजेंसियां अब आगे की प्रक्रिया के माध्यम से मामले की वास्तविक स्थिति सामने लाने का प्रयास करेंगी।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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