Demonstration : कैशलेस चिकित्सा सुविधा और वेतन भुगतान की मांग को लेकर शिक्षणेत्तर कर्मचारी करेंगे 14 जुलाई धरना प्रदर्शन

मेरठ। सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर माध्यमिक शिक्षणेत्तर कर्मचारी एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश ने आंदोलन का ऐलान किया है। संगठन ने घोषणा की है कि 14 जुलाई 2026 को मेरठ स्थित जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इसके बाद जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तथा माध्यमिक शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। आंदोलन का मुख्य उद्देश्य सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना तथा आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को 1 अप्रैल 2026 से घोषित वेतन का लाभ दिलाना है।
संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा की गई घोषणाओं के बावजूद सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को अब तक कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ नहीं मिल सका है। इसके साथ ही आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को भी मुख्यमंत्री द्वारा घोषित संशोधित वेतन का लाभ समय से नहीं दिया गया है, जिससे कर्मचारियों में व्यापक असंतोष व्याप्त है।
प्रदेश अध्यक्ष श्री नीरज पवार के नेतृत्व में धरना-प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है। संगठन के पदाधिकारी लगातार विभिन्न सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में पहुंचकर कर्मचारियों से संपर्क कर रहे हैं तथा उन्हें आंदोलन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आह्वान कर रहे हैं।
जनसंपर्क अभियान के तहत प्रदेश अध्यक्ष नीरज पवार एवं संगठन के अन्य पदाधिकारियों ने एलबीएस इंटर कॉलेज ईचौली, जनता इंटर कॉलेज मसूरी, जवाहर इंटर कॉलेज छोटा मवाना, ए.एस. इंटर कॉलेज मवाना, कृषक इंटर कॉलेज मवाना तथा आर्य कन्या इंटर कॉलेज मवाना सहित कई विद्यालयों का दौरा किया। इस दौरान कर्मचारियों को उनकी मांगों, आंदोलन की रूपरेखा और धरने के उद्देश्य की विस्तार से जानकारी दी गई।
संगठन का कहना है कि शिक्षणेत्तर कर्मचारी विद्यालयों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यालयी कार्यों, अभिलेखों के रखरखाव, प्रशासनिक सहयोग और अन्य व्यवस्थाओं में उनकी जिम्मेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इसके बावजूद उन्हें कई मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा जाना न्यायसंगत नहीं है।
प्रदेश अध्यक्ष नीरज पवार ने कहा कि कर्मचारियों की मांगें किसी प्रकार की अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि उनका वैधानिक और मानवीय अधिकार हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार अन्य वर्गों के कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा सकती है, तो सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को इससे वंचित रखना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों में कैशलेस चिकित्सा सुविधा कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए अत्यंत आवश्यक है। महंगे उपचार के कारण कई कर्मचारियों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यदि कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा लागू हो जाती है तो कर्मचारियों को समय पर बेहतर उपचार उपलब्ध हो सकेगा।
संगठन ने आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन संबंधी मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया है। पदाधिकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री द्वारा 1 अप्रैल 2026 से वेतन भुगतान संबंधी जो घोषणा की गई थी, उसका लाभ अभी तक संबंधित कर्मचारियों को पूर्ण रूप से नहीं मिल पाया है। इससे कर्मचारियों में निराशा और असंतोष बढ़ रहा है।
संगठन के अनुसार, कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति पहले से ही चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में समय पर वेतन और घोषित वेतनमान का लाभ न मिलना उनके परिवारों के लिए अतिरिक्त कठिनाइयाँ उत्पन्न कर रहा है। उन्होंने सरकार से इस विषय में शीघ्र निर्णय लेने की मांग की है।

धरना-प्रदर्शन के दौरान जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय पर कर्मचारियों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया जाएगा। इसके बाद जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार तथा माध्यमिक शिक्षा मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) को ज्ञापन भेजा जाएगा। ज्ञापन में कर्मचारियों की सभी लंबित मांगों के शीघ्र समाधान की मांग की जाएगी।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि संगठन हमेशा लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने में विश्वास रखता है। यदि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है तो संगठन भविष्य में आंदोलन को और व्यापक रूप देने पर विचार करेगा।
जनसंपर्क अभियान में संगठन के अनेक पदाधिकारी और सदस्य सक्रिय रूप से शामिल रहे। इस दौरान भोला प्रसाद यादव (महानगर उपाध्यक्ष), मानसिंह, जयवीर सिंह, सुनील गिरी, विशेष कुमार, सचिन कुमार, धर्मेंद्र शर्मा, आजाद यादव, जितेंद्र वर्मा, महावीर शर्मा, अनिल कुमार सहित अन्य साथियों ने विभिन्न विद्यालयों में कर्मचारियों से संवाद स्थापित किया और उन्हें आंदोलन में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
कर्मचारियों ने भी संगठन की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि कैशलेस चिकित्सा सुविधा और समय पर वेतन भुगतान जैसी मूलभूत आवश्यकताओं की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। उनका कहना था कि लंबे समय से लंबित समस्याओं का समाधान अब प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि विद्यालयों की प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित करने में शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इसलिए उनके स्वास्थ्य, आर्थिक सुरक्षा और सेवा संबंधी अधिकारों की रक्षा भी समान रूप से आवश्यक है।
संगठन ने सभी सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों से 14 जुलाई को होने वाले धरना-प्रदर्शन में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने का आह्वान किया है। पदाधिकारियों का कहना है कि कर्मचारियों की एकजुटता ही उनकी मांगों को प्रभावी ढंग से सरकार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
आगामी धरने को लेकर मेरठ जनपद के सहायता प्राप्त विद्यालयों में तैयारियां तेज हो गई हैं। संगठन को उम्मीद है कि सरकार कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने और घोषित वेतन का लाभ शीघ्र उपलब्ध कराने के संबंध में सकारात्मक निर्णय लेगी। कर्मचारियों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी टकराव के लिए नहीं, बल्कि अपने वैध अधिकारों और सम्मानजनक कार्य परिस्थितियों की मांग के लिए है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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