India’s second gold : तीरंदाजी में भारत का दूसरा गोल्ड, चिकिता-साहिल की शानदार जीत ?

India's second gold : तीरंदाजी में भारत का दूसरा गोल्ड, चिकिता-साहिल की शानदार जीत ?
India’s second gold : तीरंदाजी में भारत का दूसरा गोल्ड, चिकिता-साहिल की शानदार जीत ?

नागोया।

एशियाई खेलों में भारत ने तीरंदाजी के कंपाउंड वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए एक ही दिन दूसरा स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। महिला कंपाउंड टीम की स्वर्णिम सफलता के बाद चिकिता तनिपार्थी और साहिल राजेश जाधव की भारतीय जोड़ी ने कंपाउंड मिश्रित टीम स्पर्धा में दक्षिण कोरिया को रोमांचक शूट-ऑफ में हराकर सोना जीत लिया। निर्धारित मुकाबला 157-157 की बराबरी पर समाप्त हुआ, जिसके बाद शूट-ऑफ में भारत ने 20-19 से बाजी मार ली। इस जीत के साथ भारत ने लॉस एंजिलिस 2028 ओलंपिक के कंपाउंड मिश्रित टीम वर्ग में कोटा भी हासिल कर लिया।

मुकाबले की शुरुआत से ही भारतीय जोड़ी ने शानदार आत्मविश्वास दिखाया। चिकिता और साहिल ने अपने शुरुआती निशानों में लगातार सटीक तीर लगाए और दक्षिण कोरियाई जोड़ी पर दबाव बनाया। भारतीय खिलाड़ियों की सटीकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मुकाबले के शुरुआती चरण में दोनों ने कई बार 10 अंक वाले निशाने साधे। एक समय भारत ने बढ़त भी बना ली थी, लेकिन दक्षिण कोरिया ने मुकाबले में जबरदस्त वापसी करते हुए स्कोर बराबर कर दिया। अंततः दोनों टीमों का स्कोर 157-157 रहा और स्वर्ण पदक का फैसला शूट-ऑफ से हुआ।

शूट-ऑफ में मुकाबले का रोमांच चरम पर पहुंच गया। भारतीय खिलाड़ियों को हर तीर के साथ बेहद दबाव में निशाना साधना था। चिकिता और साहिल दोनों ने 10-10 अंक हासिल किए और भारत का स्कोर 20 तक पहुंचा। दक्षिण कोरिया की ओर से भी पहला तीर 10 अंक पर लगा, लेकिन दूसरे तीर में नौ अंक आए। इस तरह दक्षिण कोरिया 19 अंक तक ही पहुंच सका और भारत ने 20-19 से मुकाबला जीतकर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। विश्व तीरंदाजी के अनुसार यह जीत भारत के लिए ऐतिहासिक भी रही, क्योंकि इसके साथ भारत ने 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए कंपाउंड मिश्रित टीम में कोटा हासिल करने वाला पहला देश बनने की उपलब्धि दर्ज की।

इस स्वर्ण पदक की खास बात यह भी रही कि चिकिता तनिपार्थी के लिए यह एक ही दिन का दूसरा गोल्ड मेडल था। इससे पहले वह भारतीय महिला कंपाउंड टीम का हिस्सा थीं, जिसने चीन को हराकर स्वर्ण पदक जीता था। महिला टीम में चिकिता के साथ ज्योति सुरेखा वेन्नम और पृथिका प्रदीप शामिल थीं। इस जीत के बाद चिकिता के पास एक ही दिन में दो एशियाई खेल स्वर्ण पदक हो गए।

भारतीय तीरंदाजी के लिए यह दिन इसलिए भी खास रहा क्योंकि कंपाउंड टीम स्पर्धाओं में भारत ने लगातार बेहतरीन प्रदर्शन किया। महिला टीम की जीत के बाद मिश्रित टीम ने भी स्वर्ण हासिल किया और दिन के आगे बढ़ने के साथ पुरुष कंपाउंड टीम ने भी स्वर्ण पदक जीतकर भारत को इस वर्ग में शानदार सफलता दिलाई। विश्व तीरंदाजी ने बताया कि भारत ने 30 सितंबर को तीनों कंपाउंड टीम खिताब अपने नाम किए।

चिकिता तनिपार्थी की सफलता के पीछे उनकी मेहनत और परिवार का समर्थन भी महत्वपूर्ण रहा है। उनके सफर के बारे में रिपोर्टों में बताया गया है कि परिवार ने उनके प्रशिक्षण और उपकरणों के लिए आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद सहयोग किया। भारतीय तीरंदाजी में कंपाउंड वर्ग को मजबूत करने की दिशा में ऐसे खिलाड़ियों की सफलता देश के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

दूसरी ओर साहिल राजेश जाधव के लिए भी यह उपलब्धि बेहद महत्वपूर्ण है। दक्षिण कोरिया के खिलाफ फाइनल में उन्होंने चिकिता के साथ तालमेल बनाए रखते हुए लगातार सटीक निशाने लगाए। मिश्रित टीम स्पर्धा में केवल व्यक्तिगत प्रदर्शन ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि दोनों खिलाड़ियों के बीच तालमेल और दबाव में सही निर्णय लेना भी महत्वपूर्ण होता है। फाइनल के दौरान भारतीय जोड़ी ने इसी तालमेल का प्रदर्शन किया।

मुकाबले की शुरुआत में भारत ने बढ़त बनाई थी। पहले चरण के बाद भारतीय जोड़ी 40-39 से आगे थी। दूसरे चरण में भी भारत ने अपनी बढ़त बनाए रखी और मध्य चरण तक स्कोर 80-78 हो गया था। तीसरे चरण में दक्षिण कोरिया ने वापसी की कोशिश की, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने महत्वपूर्ण मौकों पर सटीक निशाने लगाए। अंतिम चरण में मुकाबला पूरी तरह बराबरी पर पहुंच गया और 157-157 का स्कोर होने के बाद शूट-ऑफ ने विजेता का फैसला किया।

India's second gold : तीरंदाजी में भारत का दूसरा गोल्ड, चिकिता-साहिल की शानदार जीत ?
India’s second gold : तीरंदाजी में भारत का दूसरा गोल्ड, चिकिता-साहिल की शानदार जीत ?

भारत के लिए इस जीत का महत्व एशियाई खेलों के पदक से कहीं अधिक है। लॉस एंजिलिस 2028 में कंपाउंड तीरंदाजी को ओलंपिक कार्यक्रम में शामिल किया जाना है, इसलिए एशियाई खेलों में मिश्रित टीम की यह सफलता भारत को अगले ओलंपिक चक्र के लिए महत्वपूर्ण शुरुआती स्थान दिलाती है। विश्व तीरंदाजी ने इस जीत को भारत के लिए पहला मिश्रित टीम ओलंपिक कोटा बताया है।

भारत लंबे समय से कंपाउंड तीरंदाजी में मजबूत प्रदर्शन करता रहा है। पिछले एशियाई खेलों में भी भारतीय तीरंदाजों ने इस वर्ग में प्रभावशाली प्रदर्शन किया था। अब एशियाई खेलों में तीनों कंपाउंड टीम खिताब जीतना इस बात का संकेत है कि भारत के पास पुरुष और महिला दोनों वर्गों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की मजबूत श्रृंखला मौजूद है।

चिकिता और साहिल की जीत के बाद भारतीय खेमे में खुशी का माहौल बन गया। खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और भारतीय खेल प्रशंसकों के लिए यह जीत इसलिए भी यादगार रही क्योंकि मुकाबला सामान्य तरीके से समाप्त नहीं हुआ, बल्कि आखिरी तीर तक रोमांच बना रहा। 157-157 की बराबरी के बाद शूट-ऑफ में 20-19 की जीत ने स्वर्ण पदक को और खास बना दिया।

भारत के पदक अभियान में तीरंदाजी लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। महिला कंपाउंड टीम और मिश्रित टीम की लगातार सफलताओं ने भारतीय पदक तालिका को गति दी। हालांकि, अलग-अलग समय पर जारी पदक तालिका में संख्या बदलती रही है। 30 सितंबर की शुरुआती रिपोर्टों में मिश्रित टीम स्वर्ण के बाद भारत के खाते में 8 स्वर्ण, 21 रजत और 25 कांस्य समेत 54 पदक बताए गए थे; बाद की प्रतियोगिताओं में यह संख्या बढ़ी।

इसलिए यदि पदक तालिका को किसी विशेष समय के अनुसार प्रकाशित किया जा रहा है तो उसी समय की आधिकारिक या ताजा तालिका को आधार बनाना जरूरी है। उपयोगकर्ता द्वारा दी गई 55 पदक, 8 स्वर्ण, 21 रजत और 26 कांस्य वाली संख्या बाद की प्रतियोगिताओं के क्रम के अनुसार बदल सकती है।

फिलहाल भारतीय तीरंदाजी के लिए सबसे बड़ी खबर चिकिता तनिपार्थी और साहिल राजेश जाधव की स्वर्णिम जीत है। दक्षिण कोरिया के खिलाफ 157-157 की बराबरी और फिर 20-19 के शूट-ऑफ ने इस मुकाबले को एशियाई खेलों के यादगार मुकाबलों में शामिल कर दिया। चिकिता के लिए एक दिन में दूसरा स्वर्ण, साहिल के साथ मिश्रित टीम की जीत और साथ ही लॉस एंजिलिस 2028 का ओलंपिक कोटा—इन तीन उपलब्धियों ने भारत के तीरंदाजी अभियान को नई ऊंचाई दी है।

भारत की यह सफलता केवल एक पदक की कहानी नहीं है, बल्कि उस तैयारी का परिणाम है जो भारतीय कंपाउंड तीरंदाजी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बना रही है। अब निगाहें लॉस एंजिलिस 2028 पर होंगी, जहां कंपाउंड तीरंदाजी के ओलंपिक पदार्पण के साथ भारतीय खिलाड़ियों को अपने प्रदर्शन को और आगे ले जाने का अवसर मिलेगा। फिलहाल नागोया में चिकिता और साहिल की जोड़ी ने दबाव के बीच आखिरी तीर तक धैर्य बनाए रखते हुए भारत को एक और स्वर्ण दिलाकर देशवासियों को जश्न का मौका दिया है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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