
बिजनौर।
जनपद बिजनौर में नजीबाबाद रोड स्थित गोपाल हॉस्पिटल में उपचार के दौरान सात वर्षीय मासूम बच्ची तिरसा की मौत के बाद मामला गरमा गया। बच्ची की मौत से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों पर उपचार में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में धरना शुरू कर दिया। मृतका के पिता हल्दौर निवासी पत्रकार संजीव मिश्रा अपनी बेटी के शव को अस्पताल परिसर में रखकर न्याय की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए।
मामले की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक भी अस्पताल पहुंच गए। लोगों ने घटना पर नाराजगी जताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सात वर्षीय बच्ची की मौत बेहद गंभीर मामला है और इसकी पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए।
परिजनों का आरोप है कि बच्ची का उपचार गोपाल हॉस्पिटल में चल रहा था। उपचार के दौरान उसकी हालत बिगड़ गई और बाद में उसकी मौत हो गई। परिवार ने आरोप लगाया कि समय रहते उचित चिकित्सा सुविधा और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाता तो संभवत: बच्ची की जान बचाई जा सकती थी। हालांकि, चिकित्सकीय लापरवाही के इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
बच्ची की मौत की सूचना के बाद अस्पताल के बाहर लोगों की भीड़ जुटने लगी। मृतका के पिता संजीव मिश्रा ने अपनी बेटी की मौत के मामले में न्याय की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि परिवार को अपनी मासूम बेटी खोने का गहरा सदमा लगा है और अब उनकी मांग केवल निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की है।
धरने की जानकारी मिलने पर स्थानीय पत्रकार भी बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए। पत्रकारों और सामाजिक लोगों ने परिवार के प्रति समर्थन जताते हुए प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि घटना के बाद अस्पताल से जुड़े डॉक्टर पंकज चौधरी मौके पर मौजूद नहीं थे। इसको लेकर भी लोगों में नाराजगी दिखाई दी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इतनी गंभीर घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन और संबंधित चिकित्सकों को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए तथा परिजनों को उपचार से संबंधित पूरी जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए।
धरने पर बैठे लोगों ने प्रशासन के सामने कई मांगें रखीं। उनकी प्रमुख मांग थी कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। जांच में उपचार के दौरान किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित चिकित्सक अथवा अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की कि यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो संबंधित डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए।

लोगों ने अस्पताल के संचालन और उपचार व्यवस्था की भी जांच कराने की मांग की।
उनका कहना था कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े संस्थानों में मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। किसी भी मरीज के उपचार में लापरवाही की शिकायत सामने आती है तो संबंधित विभाग को मामले की जांच कर तथ्यों के आधार पर उचित निर्णय लेना चाहिए।
घटना के बाद अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। परिवार और उनके समर्थन में पहुंचे लोग प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग करते रहे। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक मामले में निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई का भरोसा नहीं मिलता, तब तक वे अपनी मांग को लेकर आवाज उठाते रहेंगे।
मामले को लेकर स्थानीय लोगों में भी चर्चा रही। लोगों का कहना था कि बच्ची की मौत की वास्तविक वजह सामने आना जरूरी है। यदि मौत सामान्य चिकित्सकीय जटिलताओं के कारण हुई है तो जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए और यदि उपचार में लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से यह भी मांग की कि जांच प्रक्रिया पारदर्शी हो और पीड़ित परिवार को हर स्तर पर जानकारी दी जाए। उनका कहना था कि किसी भी प्रभाव या दबाव के बिना पूरे मामले की जांच की जानी चाहिए, ताकि परिवार को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
परिजनों के अनुसार, बच्ची की मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। सात वर्षीय तिरसा की मौत से परिवार में मातम का माहौल है। पिता अपनी बेटी की मौत का कारण जानना चाहते हैं और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
वहीं, घटना को लेकर अस्पताल प्रबंधन या संबंधित चिकित्सक का पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण है। चिकित्सकीय लापरवाही जैसे गंभीर आरोपों की पुष्टि सक्षम जांच और उपलब्ध चिकित्सा रिकॉर्ड के आधार पर ही हो सकती है। ऐसे में प्रशासन द्वारा निष्पक्ष जांच कराकर सभी तथ्यों को सामने लाना आवश्यक माना जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी निर्दोष व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं, बल्कि मामले की सच्चाई सामने लाना है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि बच्ची के उपचार से जुड़े सभी दस्तावेजों, चिकित्सकीय रिकॉर्ड और अन्य संबंधित तथ्यों की जांच कराई जाए। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाए।
समाचार लिखे जाने तक अस्पताल के बाहर धरना जारी था। परिजन, पत्रकार और स्थानीय नागरिक प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए थे। लोगों का कहना था कि मासूम बच्ची की मौत के मामले में निष्पक्ष जांच कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच और उसके निष्कर्षों पर टिकी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बच्ची की मौत किन परिस्थितियों में हुई और उपचार के दौरान किसी स्तर पर चिकित्सकीय लापरवाही हुई थी या नहीं। फिलहाल परिजनों ने न्याय की मांग को लेकर अपना विरोध जारी रखा है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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