Both farmers are distressed : साड़ी खंड बालू खदान में अवैध खनन से केन नदी और किसान दोनों परेशान लगातार ?

Both farmers are distressed : साड़ी खंड बालू खदान में अवैध खनन से केन नदी और किसान दोनों परेशान लगातार

Both farmers are distressed : साड़ी खंड बालू खदान में अवैध खनन से केन नदी और किसान दोनों परेशान लगातार
Both farmers are distressed : साड़ी खंड बालू खदान में अवैध खनन से केन नदी और किसान दोनों परेशान लगातार

बांदा जनपद के पैलानी क्षेत्र अंतर्गत स्थित साड़ी खंड संख्या-1 बालू खदान एक बार फिर गंभीर विवादों और आरोपों के चलते चर्चा में आ गई है। क्षेत्रीय लोगों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार यहां अवैध खनन और ओवरलोड परिवहन का बड़ा खेल लगातार जारी है। आरोप है कि खनन माफिया खुलेआम नियमों की अनदेखी करते हुए केन नदी की जलधारा तक पहुंचकर बड़े पैमाने पर बालू और मोरंग का खनन कर रहे हैं। इस पूरे मामले ने पर्यावरण, किसानों की जमीन और प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अवैध खनन का यह कारोबार लंबे समय से चल रहा है और इसमें प्रभावशाली लोगों की भूमिका होने की भी चर्चाएं हैं। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर अभी तक किसी भी आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन क्षेत्र में बढ़ती शिकायतों और विरोध ने मामले को गंभीर बना दिया है।

केन नदी की जलधारा तक पहुंचा खनन

स्थानीय लोगों के अनुसार साड़ी खंड संख्या-1 खदान में खनन कार्य केन नदी की सक्रिय जलधारा तक पहुंच चुका है। आरोप है कि भारी मशीनों और अस्थायी रास्तों के माध्यम से नदी के भीतर तक पहुंचकर खनन किया जा रहा है, जिससे नदी का प्राकृतिक स्वरूप तेजी से प्रभावित हो रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नदी की धारा के भीतर इस प्रकार खनन जारी रहता है, तो इससे भविष्य में जल संकट, कटाव और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

किसानों की जमीन से अवैध रास्ते बनाने के आरोप

कुछ समय पहले यह मामला भी सामने आया था कि खनन माफियाओं द्वारा किसानों की निजी जमीनों से जबरन रास्ते बनाए गए। पीड़ित किसानों ने आरोप लगाया कि उनकी अनुमति के बिना अवैध परिवहन के लिए रास्ता तैयार किया गया और विरोध करने पर दबाव भी बनाया गया।

बताया जा रहा है कि इस मामले में पीड़ित किसान ने मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की थी। किसानों का कहना है कि उनकी कृषि भूमि को नुकसान पहुंचाया गया और प्रशासन ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

प्रशासन और खनिज विभाग पर सवाल

स्थानीय स्तर पर सबसे गंभीर आरोप खनिज विभाग और तहसील पैलानी के अधिकारियों पर लगाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन सख्ती से कार्रवाई करे तो अवैध खनन को तुरंत रोका जा सकता है, लेकिन कार्रवाई के बजाय लगातार चुप्पी देखने को मिल रही है।

क्षेत्रीय नागरिकों का आरोप है कि जिम्मेदार विभागों की कथित मिलीभगत के कारण ही अवैध खनन और ओवरलोड परिवहन बिना रोक-टोक जारी है। हालांकि इन आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

Both farmers are distressed : साड़ी खंड बालू खदान में अवैध खनन से केन नदी और किसान दोनों परेशान लगातार
Both farmers are distressed : साड़ी खंड बालू खदान में अवैध खनन से केन नदी और किसान दोनों परेशान लगातार

पत्रकारों पर मुकदमे और दबाव के आरोप

साड़ी खंड संख्या-1 खदान पहले भी विवादों में रह चुकी है। स्थानीय स्तर पर यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि अवैध खनन और परिवहन से जुड़े मामलों को उजागर करने वाले कुछ पत्रकारों और अन्य लोगों पर रंगदारी जैसे मुकदमे दर्ज कराए गए।

लोगों का कहना है कि इसका उद्देश्य डर का माहौल बनाना और विरोध की आवाजों को दबाना था। हालांकि इन मामलों की सत्यता और कानूनी स्थिति पर संबंधित विभागों द्वारा कोई विस्तृत सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आई है।

मीडिया मैनेजमेंट की चर्चाएं

क्षेत्र में यह चर्चा भी जोरों पर है कि खनन कारोबार से जुड़े कुछ लोग मीडिया मैनेजमेंट के जरिए मामलों को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक कुछ कथित मौसमी पत्रकार केवल खदानों के संचालन के दौरान सक्रिय दिखाई देते हैं।

हालांकि इस प्रकार के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन क्षेत्र में इसको लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं।

ओवरलोड वाहनों का बढ़ता खतरा

क्षेत्रीय लोगों के अनुसार सड़कों पर क्षमता से अधिक बालू और मोरंग लदे ट्रक खुलेआम दौड़ रहे हैं। इससे सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ रहा है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद ओवरलोड वाहनों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती। टास्क फोर्स की मौजूदगी केवल कागजों तक सीमित दिखाई देती है और जमीनी स्तर पर उसका असर नजर नहीं आता।

पर्यावरणीय खतरे और एनजीटी दिशा-निर्देश

विशेषज्ञों का मानना है कि नदी की धारा के भीतर और आसपास इस प्रकार का अंधाधुंध खनन राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी National Green Tribunal के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन हो सकता है।

पर्यावरणविदों के अनुसार नदी की धारा से छेड़छाड़ करने पर जल स्तर प्रभावित हो सकता है, कटाव बढ़ सकता है और जलीय जीवों के अस्तित्व पर भी संकट उत्पन्न हो सकता है।

केन नदी क्षेत्र पहले से ही पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है और यहां किसी भी प्रकार की अनियंत्रित गतिविधि दूरगामी नुकसान पहुंचा सकती है।

दो जिलों का मामला, कार्रवाई क्यों नहीं

यह पूरा मामला बांदा और हमीरपुर दोनों जिलों से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। ऐसे में स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब मामला दो जिलों की सीमा से संबंधित है, तो संयुक्त और समन्वित कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही।

लोगों का कहना है कि प्रशासनिक सीमाओं के कारण यदि जिम्मेदारी तय नहीं हो पा रही है, तो इसका फायदा अवैध खनन करने वाले उठा रहे हैं।

स्थानीय लोगों में बढ़ता आक्रोश

क्षेत्र में लगातार बढ़ते अवैध खनन और प्रशासनिक निष्क्रियता को लेकर लोगों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो केन नदी और आसपास का पूरा पर्यावरण गंभीर संकट में पड़ सकता है।

लोगों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाई जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

निष्कर्ष

साड़ी खंड संख्या-1 बालू खदान से जुड़ा यह मामला केवल अवैध खनन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, प्रशासनिक जवाबदेही और किसानों के अधिकारों से भी जुड़ गया है।

Ken River के प्राकृतिक स्वरूप और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है कि प्रशासन निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई करे।

यदि समय रहते इस पूरे नेटवर्क पर नियंत्रण नहीं लगाया गया, तो भविष्य में पर्यावरणीय और सामाजिक दोनों स्तरों पर गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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