Campaign for strict action underway : मुजफ्फरनगर में अवैध क्लीनिक सील, स्वास्थ्य विभाग की सख्त कार्रवाई जारी अभियान

मुजफ्फरनगर, 18 जून 2026। जनपद में अवैध एवं अपंजीकृत रूप से संचालित चिकित्सा प्रतिष्ठानों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे सघन अभियान के तहत एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील तेवतिया के निर्देशों पर की गई इस कार्रवाई में ग्राम जट मुझेड़ा में संचालित एक अवैध क्लीनिक को सील कर दिया गया है। यह कार्रवाई प्राप्त शिकायत के आधार पर की गई, जिसमें क्लीनिक के बिना किसी वैध पंजीकरण और चिकित्सकीय योग्यता के संचालन की पुष्टि हुई।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जब संबंधित स्थान पर निरीक्षण किया, तो पाया कि नितिन नामक व्यक्ति द्वारा बिना किसी मान्यता प्राप्त चिकित्सा डिग्री या पंजीकरण के मरीजों का इलाज किया जा रहा था। निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि क्लीनिक में न तो आवश्यक चिकित्सीय रिकॉर्ड उपलब्ध थे और न ही किसी प्रकार की वैध अनुमति या लाइसेंस प्रस्तुत किया गया। टीम द्वारा जब चिकित्सकीय प्रैक्टिस से संबंधित प्रमाण पत्र और दस्तावेज मांगे गए, तो संचालक कोई भी वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।
निरीक्षण टीम ने मौके पर स्थिति को गंभीर मानते हुए तत्काल प्रभाव से क्लीनिक को सील कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार की अवैध चिकित्सकीय गतिविधियां न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि आम जनता के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा उत्पन्न करती हैं। बिना योग्यता के इलाज करने से मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड़ होने की संभावना बनी रहती है, जो किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई को जनपद में चल रहे अपंजीकृत क्लीनिकों और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ अभियान का हिस्सा बताया जा रहा है। विभाग द्वारा लगातार ऐसे प्रतिष्ठानों की जांच की जा रही है, जहां बिना किसी मान्यता या पंजीकरण के चिकित्सा सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में इस प्रकार की अवैध चिकित्सा गतिविधियां अधिक पाई जाती हैं, जहां लोगों को सही जानकारी के अभाव में गलत इलाज का शिकार होना पड़ता है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील तेवतिया ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जनपद में किसी भी प्रकार की अवैध चिकित्सा गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए नियमित निरीक्षण अभियान चलाए जा रहे हैं और प्राप्त शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है।
इस कार्रवाई में उपमुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं नोडल अधिकारी (अपंजीकृत क्लीनिक एवं अस्पताल) डॉ. महक सिंह की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा जनपद में अपंजीकृत चिकित्सा संस्थानों की पहचान के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत टीमों को विभिन्न क्षेत्रों में भेजा जा रहा है, जहां संदिग्ध क्लीनिकों और अस्पतालों का निरीक्षण किया जा रहा है।
डॉ. महक सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर लोगों के जीवन से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में न केवल क्लीनिक को सील किया जाता है, बल्कि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू की जाती है। इसके साथ ही भविष्य में यदि कोई व्यक्ति बिना अनुमति के चिकित्सा सेवाएं प्रदान करता पाया गया तो उसके खिलाफ और सख्त कदम उठाए जाएंगे।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अवैध क्लीनिकों के संचालन से कई गंभीर समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इनमें गलत दवाओं का उपयोग, गलत निदान, संक्रमण फैलने का खतरा और गंभीर मामलों में मरीजों की जान जाने तक की स्थिति शामिल हो सकती है। इसलिए इस प्रकार की गतिविधियों पर नियंत्रण बेहद आवश्यक है।
ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर यह देखा जाता है कि जानकारी के अभाव में लोग झोलाछाप डॉक्टरों के पास इलाज कराने चले जाते हैं, जिससे कई बार स्थिति और बिगड़ जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जनजागरूकता अभियान भी शुरू किया है, ताकि लोग केवल पंजीकृत और योग्य चिकित्सकों से ही इलाज कराएं।
विभागीय अधिकारियों ने यह भी बताया कि आने वाले समय में इस तरह की कार्रवाइयों को और तेज किया जाएगा। इसके लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है, जो नियमित रूप से क्षेत्रों का निरीक्षण करेंगी और संदिग्ध गतिविधियों की जांच करेंगी। साथ ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग का भी सहयोग लिया जा रहा है, ताकि अवैध चिकित्सा केंद्रों पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके।
इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस प्रकार की कार्रवाई से अवैध रूप से संचालित क्लीनिकों पर अंकुश लगेगा और लोगों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं प्राप्त हो सकेंगी।
वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत किए जाने की आवश्यकता है, ताकि लोगों को मजबूरी में अवैध क्लीनिकों का सहारा न लेना पड़े। उनका कहना है कि यदि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हों, तो इस प्रकार की समस्याओं में काफी कमी आ सकती है।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग द्वारा क्लीनिक को सील कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी संकेत दिए गए हैं कि जनपद में इस प्रकार के अन्य अवैध क्लीनिकों की पहचान कर उन पर भी जल्द कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग का यह अभियान जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों ने दोहराया है कि यह अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा, ताकि आम जनता को सुरक्षित, मानक और वैध चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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