Chandranath Rath massacre : शुभेंदु अधिकारी के सहयोगी चंद्रनाथ रथ हत्याकांड से पश्चिम बंगाल की राजनीति में बढ़ा तनाव

चंद्रनाथ रथ की हत्या ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को एक बार फिर हिंसा, आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक प्रतिशोध की बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्य की राजनीति में तेजी से उभरते चेहरे शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक रहे चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या किए जाने से पूरे राज्य में सनसनी फैल गई है। भाजपा ने इस घटना को “टारगेट किलिंग” बताते हुए सीधे तौर पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा है, जबकि दूसरी ओर टीएमसी ने इन आरोपों को राजनीतिक नौटंकी करार दिया है।
करीब 41 वर्षीय चंद्रनाथ रथ मूल रूप से पूर्व मेदिनीपुर जिले के चांदीपुर क्षेत्र के रहने वाले थे। वे भारतीय वायुसेना में लगभग दो दशक तक सेवाएं दे चुके थे। अनुशासनप्रिय और शांत स्वभाव के रथ को जानने वाले लोग बताते हैं कि वे बेहद सरल जीवन जीते थे और रामकृष्ण मिशन के विचारों से प्रभावित थे। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और शुभेंदु अधिकारी के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में शामिल हो गए। भाजपा के अंदरूनी हलकों में उन्हें एक ऐसे व्यक्ति के रूप में देखा जाता था जो संगठनात्मक कामों से लेकर राजनीतिक रणनीति तक में अधिकारी की मदद करते थे।
बताया जा रहा है कि बुधवार रात उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम स्थित दोहरिया इलाके में चंद्रनाथ रथ अपनी कार से जा रहे थे। इसी दौरान बाइक और कार से आए हमलावरों ने उनकी गाड़ी को रोका और बेहद करीब से उन पर गोलियां बरसा दीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हमलावर पूरी तैयारी के साथ आए थे और घटना को अंजाम देने के बाद तेजी से फरार हो गए। स्थानीय लोगों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कई गोलियां लगने की बात सामने आई है।
इस घटना के बाद भाजपा नेताओं ने राज्य सरकार और टीएमसी पर तीखा हमला बोला। शुभेंदु अधिकारी ने इसे “पूर्व नियोजित हत्या” करार देते हुए कहा कि उनके करीबी सहयोगी को राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया गया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि यदि उन्होंने भवानीपुर में मुख्यमंत्री को नहीं हराया होता, तो शायद चंद्रनाथ रथ को अपनी जान नहीं गंवानी पड़ती। अधिकारी का यह बयान राज्य की राजनीति में बड़ा संदेश माना जा रहा है, क्योंकि इसमें उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से राजनीतिक प्रतिशोध की ओर संकेत किया।
शुभेंदु अधिकारी के भाई दिव्येंदु अधिकारी ने इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई से कराने की मांग की है। उनका कहना है कि राज्य पुलिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता और निष्पक्ष जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी की जरूरत है। वहीं भाजपा सांसद अर्जुन सिंह ने इस हत्या के लिए सीधे टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि टीएमसी ने इन आरोपों को बेबुनियाद और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है।
घटना के बाद राज्य की राजनीति में तनाव और बढ़ गया है। चुनाव परिणामों के बाद पहले से ही बंगाल में राजनीतिक हिंसा की खबरें सामने आ रही थीं। भाजपा लगातार आरोप लगाती रही है कि चुनावों में बड़ी जीत मिलने के बाद उसके कार्यकर्ताओं और नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद पानीहाटी में बमबाजी की घटना में भाजपा कार्यकर्ताओं के घायल होने की खबर ने इस तनाव को और गहरा कर दिया।

इस हत्याकांड की सबसे भावुक तस्वीर तब सामने आई जब चंद्रनाथ रथ की मां ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वे अपने बेटे के हत्यारों को फांसी नहीं, बल्कि उम्रकैद की सजा चाहती हैं ताकि वे जीवनभर अपने अपराध पर पछताते रहें। उनका बयान लोगों को भावुक कर गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बेटे की हत्या के पीछे राजनीतिक साजिश हो सकती है। पुलिस ने इस मामले में कुछ संदिग्धों को गिरफ्तार किया है और जांच जारी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि बंगाल की उस राजनीतिक संस्कृति का प्रतीक बनती जा रही है जिसमें चुनावी संघर्ष कई बार हिंसा में बदल जाता है। पश्चिम बंगाल लंबे समय से राजनीतिक हिंसा के आरोपों से घिरा रहा है। चाहे वह वामपंथी दौर रहा हो, टीएमसी का उदय रहा हो या भाजपा का विस्तार—हर दौर में हिंसक टकराव की घटनाएं सामने आती रही हैं। चंद्रनाथ रथ की हत्या ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था और राजनीतिक सहिष्णुता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भाजपा इस घटना को राज्य में लोकतंत्र पर हमला बता रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जब किसी बड़े नेता के करीबी सहयोगी को खुलेआम गोली मारी जा सकती है, तो आम कार्यकर्ताओं की सुरक्षा की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। दूसरी ओर टीएमसी का कहना है कि भाजपा इस घटना का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही है और जांच पूरी होने से पहले आरोप लगाना उचित नहीं है।
राज्य पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी है और बाद में इसे सीआईडी को सौंप दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि हत्या के पीछे की साजिश, हमलावरों की पहचान और संभावित राजनीतिक कनेक्शन की हर एंगल से जांच की जा रही है।
चंद्रनाथ रथ भले ही कोई बड़े जननेता नहीं थे, लेकिन भाजपा संगठन में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती थी। वे पर्दे के पीछे रहकर काम करने वाले ऐसे व्यक्ति थे जो अपने नेता के प्रति पूरी निष्ठा रखते थे। बंगाल में भाजपा के उभार के दौरान उन्होंने संगठनात्मक स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। यही कारण है कि उनकी हत्या को भाजपा केवल व्यक्तिगत नुकसान नहीं, बल्कि राजनीतिक हमला मान रही है।
फिलहाल पूरा मामला जांच के अधीन है, लेकिन इस घटना ने बंगाल की राजनीति को झकझोर दिया है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा, गिरफ्तारियों और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर पूरे देश की नजर बनी रहेगी।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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