
फतेहपुर।
राधानगर चौराहे के पास संचालित भारत अल्ट्रासाउंड सेंटर की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने के बाद अब पूरे मामले की नियमानुसार जांच कराने की मांग सामने आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को शिकायतों और तस्वीरों के आधार पर ही निष्कर्ष निकालने के बजाय सेंटर का स्थलीय निरीक्षण कराना चाहिए। उनका कहना है कि पंजीकरण संबंधी दस्तावेजों, अल्ट्रासाउंड मशीनों, चिकित्सक की योग्यता और मरीजों के रिकॉर्ड का सत्यापन एक साथ किया जाना चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
अल्ट्रासाउंड सेंटरों का संचालन स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। ऐसे संस्थानों पर लागू कानूनों और नियमों का पालन सुनिश्चित करना मरीजों के हित और चिकित्सा व्यवस्था की पारदर्शिता के लिए आवश्यक है। स्थानीय लोगों की मांग है कि भारत अल्ट्रासाउंड सेंटर के संबंध में उठ रहे सवालों की जांच निष्पक्ष तरीके से की जाए और निरीक्षण के दौरान सभी जरूरी पहलुओं को शामिल किया जाए। हालांकि, फिलहाल सेंटर के विरुद्ध लगाए जा रहे सवालों या संभावित अनियमितताओं की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
अल्ट्रासाउंड सेवाओं से जुड़े संस्थानों पर प्रसवपूर्व निदान तकनीक (PCPNDT) अधिनियम और उससे संबंधित नियमों के तहत विभिन्न दायित्व लागू होते हैं। इनमें सेंटर का पंजीकरण, मशीनों का विवरण, निर्धारित रिकॉर्ड का रखरखाव और आवश्यक सूचनाओं का प्रदर्शन शामिल है। ऐसे में जांच की मांग करने वालों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सेंटर इन सभी नियमों का पालन कर रहा है या नहीं।
पंजीकरण प्रमाणपत्र और मशीनों के विवरण का सत्यापन
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि सबसे पहले भारत अल्ट्रासाउंड सेंटर के पंजीकरण प्रमाणपत्र की जांच की जाए। यह देखा जाए कि सेंटर का पंजीकरण वैध है या नहीं और प्रमाणपत्र में दर्ज विवरण मौके पर मौजूद व्यवस्था से मेल खाते हैं या नहीं। पंजीकरण प्रमाणपत्र को निर्धारित स्थान पर प्रदर्शित किए जाने की व्यवस्था भी जांच का हिस्सा हो सकती है।
इसके साथ ही सेंटर में लगी अल्ट्रासाउंड मशीनों की संख्या और उनके पंजीकृत विवरण का मिलान कराने की मांग की गई है। निरीक्षण के दौरान यह देखा जा सकता है कि परिसर में मौजूद प्रत्येक मशीन का विवरण संबंधित अभिलेखों में दर्ज है या नहीं। मशीनों की स्थापना, उपयोग और पंजीकरण से संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन भी आवश्यक बताया जा रहा है।
जांच की मांग करने वालों का कहना है कि दस्तावेजों और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान किए बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। इसलिए स्वास्थ्य विभाग को निरीक्षण के दौरान प्रमाणपत्रों, मशीनों और संबंधित अभिलेखों की जांच व्यवस्थित तरीके से करनी चाहिए।
फॉर्म-एफ और मरीजों के रिकॉर्ड की जांच की मांग
मामले में फॉर्म-एफ और मरीजों से संबंधित रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग भी उठी है। PCPNDT नियमों के अंतर्गत निर्धारित परिस्थितियों में प्रसवपूर्व अल्ट्रासाउंड से संबंधित जानकारी को निर्धारित प्रारूप में दर्ज करना आवश्यक होता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सेंटर में उपलब्ध फॉर्म-एफ, अनिवार्य रजिस्टर, मरीजों के रिकॉर्ड और अन्य आवश्यक दस्तावेजों का निरीक्षण किया जाना चाहिए।
इसके अलावा रेफरल और सहमति से संबंधित दस्तावेजों की उपलब्धता तथा उनका नियमानुसार रखरखाव भी जांच के दायरे में शामिल किया जा सकता है। यह देखा जाना चाहिए कि मरीजों से जुड़ी जानकारी निर्धारित तरीके से दर्ज की गई है या नहीं और निरीक्षण के समय संबंधित रिकॉर्ड प्रस्तुत किए जा सकते हैं या नहीं।
रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की अवधि और उसकी उपलब्धता भी महत्वपूर्ण पहलू है। लागू नियमों के अनुसार निर्धारित अभिलेखों को कम से कम दो वर्ष तक सुरक्षित रखने का प्रावधान है। यदि किसी मामले में कानूनी कार्यवाही चल रही हो, तो संबंधित रिकॉर्ड को निर्धारित नियमों के अनुसार आगे भी सुरक्षित रखना पड़ सकता है। स्थानीय लोगों की मांग है कि विभाग इन सभी पहलुओं की जांच कर स्पष्ट करे कि सेंटर में रिकॉर्ड रखरखाव की व्यवस्था नियमों के अनुरूप है या नहीं।
चिकित्सक की योग्यता और अधिकृतता पर भी हो पड़ताल
अल्ट्रासाउंड जांच करने वाले चिकित्सक की योग्यता और अधिकृतता भी जांच का अहम हिस्सा बताई जा रही है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि स्वास्थ्य विभाग यह सत्यापित करे कि सेंटर में जांच करने वाले चिकित्सक की आवश्यक शैक्षणिक योग्यता और प्रशिक्षण से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध हैं या नहीं। साथ ही यह भी देखा जाए कि संबंधित चिकित्सक की सेंटर के साथ पंजीकरण संबंधी स्थिति लागू नियमों के अनुरूप है या नहीं।
इस पहलू की जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि सेंटर में अल्ट्रासाउंड सेवाएं अधिकृत और योग्य चिकित्सक द्वारा दी जा रही हैं या नहीं। जांच के दौरान संबंधित प्रमाणपत्रों और विभागीय अभिलेखों का मिलान किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की गलतफहमी या अपुष्ट आरोप के बजाय दस्तावेजों के आधार पर स्थिति सामने आए।

PCPNDT कानून के प्रावधानों का पालन जरूरी
PCPNDT अधिनियम का उद्देश्य प्रसवपूर्व निदान तकनीकों के दुरुपयोग को रोकना और भ्रूण के लिंग चयन तथा लिंग बताने जैसी प्रतिबंधित गतिविधियों पर रोक लगाना है। इस कानून के तहत भ्रूण का लिंग निर्धारित करने या बताने से संबंधित गतिविधियां प्रतिबंधित हैं। सेंटरों पर कानून के प्रावधानों से जुड़ी आवश्यक सूचनाएं प्रदर्शित करने की व्यवस्था भी लागू होती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि निरीक्षण के दौरान यह भी जांचा जाना चाहिए कि सेंटर में आवश्यक सूचनाएं निर्धारित स्थान पर प्रदर्शित हैं या नहीं। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि मरीजों की जांच और रिकॉर्ड संबंधी प्रक्रिया कानून के अनुरूप संचालित हो रही है। हालांकि, फिलहाल भारत अल्ट्रासाउंड सेंटर में किसी प्रतिबंधित गतिविधि के होने का कोई पुष्ट तथ्य सामने नहीं आया है। इसलिए इस संबंध में निष्कर्ष केवल जांच और प्रमाणित तथ्यों के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
परिसर और सुरक्षा व्यवस्था का भी निरीक्षण हो
स्थानीय स्तर पर सेंटर के परिसर और उसकी व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। मांग की गई है कि स्वास्थ्य विभाग मौके पर पहुंचकर कमरों की व्यवस्था, स्वच्छता, विद्युत सुरक्षा, अग्निशमन इंतजाम और अन्य लागू स्वास्थ्य एवं सुरक्षा मानकों का निरीक्षण करे।
भवन की ऊंचाई अथवा किसी तकनीकी मानक को लेकर उठ रहे सवालों पर भी लागू नियमों और वास्तविक निरीक्षण के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए। भवन से संबंधित मानकों की जांच में यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि संबंधित नियम सेंटर पर किस प्रकार लागू होते हैं और मौके पर उपलब्ध स्थिति उनसे मेल खाती है या नहीं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल किसी तस्वीर या शिकायत के आधार पर सेंटर को नियमविरुद्ध घोषित करना उचित नहीं होगा। इसके बजाय विभागीय अधिकारियों को स्थल पर जाकर दस्तावेजों, मशीनों और परिसर की वास्तविक स्थिति का परीक्षण करना चाहिए। यदि किसी प्रकार की कमी सामने आती है, तो उसे नियमानुसार दर्ज कर संबंधित पक्ष को आवश्यक प्रक्रिया के तहत जवाब देने का अवसर दिया जाना चाहिए।
निष्पक्ष जांच से स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
भारत अल्ट्रासाउंड सेंटर को लेकर उठे सवालों के बीच अब स्वास्थ्य विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। स्थानीय लोगों की मांग है कि विभाग पंजीकरण, मशीनों, चिकित्सक की योग्यता, PCPNDT रिकॉर्ड, फॉर्म-एफ और परिसर की व्यवस्थाओं की एक साथ जांच कराए। इससे न केवल शिकायतों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी, बल्कि यदि कोई कमी पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई का रास्ता भी साफ होगा।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर सेंटर के विरुद्ध किसी अनियमितता को प्रमाणित नहीं माना जा सकता। शिकायतों और स्थानीय सवालों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। स्वास्थ्य विभाग का स्थलीय निरीक्षण और दस्तावेजों का सत्यापन ही यह स्पष्ट कर सकेगा कि सेंटर की व्यवस्थाएं लागू नियमों के अनुरूप हैं या उनमें सुधार की आवश्यकता है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि स्वास्थ्य विभाग राधानगर चौराहे के पास संचालित भारत अल्ट्रासाउंड सेंटर का निरीक्षण कर सभी संबंधित पहलुओं की जांच करता है या नहीं। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि जांच पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से होगी तथा सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर उचित निर्णय लिया जाएगा।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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