Contracts and Decisions : आलोचकों ने ट्रस्ट में वित्तीय पारदर्शिता, खर्चों, ठेकों और निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं

राम मंदिर ट्रस्ट में दान पात्र के पैसे चोरी का मामला सुर्खियों में है लेकिन ट्रस्ट ने कई बड़े बड़े कांड कर रखे है: सरकारी सुरक्षा के बावजूद सुरक्षा मद में 10 करोड़ खर्च। भोग प्रसाद के नाम पर 11 करोड़ का खर्चा दिखाया। किसको ठेका दिया कैसे दिया और किसलिए दिया इसका कोई ऑडिट नहीं। 15 सदस्यों में 12 को कुछ पता नहीं। कंट्रोल तीन का है। बाकी सब गोपाल का
अयोध्या के राम मंदिर की दानराशि गड़बड़ी प्रकरण की जांच के बीच अब ट्रस्ट के खर्चों पर भी बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। ट्रस्ट के वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, 11 महीने में मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए गए। यानी ट्रस्ट के खाते से औसतन हर महीने लगभग एक करोड़ रुपये सुरक्षा के नाम पर निकाले गए।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब राम मंदिर परिसर में केंद्र और राज्य सरकार की सुरक्षा एजेंसियां, पुलिस बल, अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे और बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था चौबीसों घंटे तैनात है, तो फिर ट्रस्ट के खाते से हर महीने करीब एक करोड़ रुपये किस सुरक्षा व्यवस्था पर खर्च किए गए? यह पैसा किसे दिया गया, किस प्रक्रिया से दिया गया और इसकी स्वीकृति किस स्तर पर हुई। अब यही जांच का अहम बिंदु बनता दिख रहा है।
दस्तावेजों के अनुसार, इसी अवधि में दान पेटियों से कथित चोरी और दानराशि में गड़बड़ी का मामला सामने आया। ऐसे में सवाल और गंभीर हो जाता है कि करोड़ों रुपये की सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद दान पेटियों की निगरानी में चूक कैसे हुई? क्या सुरक्षा मद में दिखाए गए खर्च और जमीन पर मौजूद व्यवस्था के बीच कोई बड़ा अंतर था?
ट्रस्ट की 21 मार्च की बैठक में पेश आय-व्यय विवरण के मुताबिक, 1 अप्रैल 2025 से 28 फरवरी 2026 तक ट्रस्ट को दान से करीब 83 करोड़ रुपये की आय हुई। इसमें दान पेटियों से 55 करोड़ रुपये, दान काउंटरों से 18 करोड़ रुपये, ऑनलाइन माध्यम से 8 करोड़ रुपये, विदेशी श्रद्धालुओं से 78 लाख रुपये और अन्य स्रोतों से राशि प्राप्त होने का उल्लेख है। इसी अवधि में ट्रस्ट के बैंक खातों और निवेशों से करीब 138 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में प्राप्त हुए।
सवाल केवल सुरक्षा खर्च तक सीमित नहीं है। दस्तावेजों में भोग-प्रसाद पर भी 11 महीने में करीब 11 करोड़ रुपये खर्च दिखाया गया है। यानी भोग-प्रसाद के नाम पर भी औसतन हर महीने लगभग एक करोड़ रुपये का खर्च दर्ज है। अब यह सवाल उठ रहा है कि यह खर्च किस मद में, किस व्यवस्था पर और किस निगरानी में किया गया?

वित्तीय विवरण के अनुसार, निर्माण कार्यों पर 152 करोड़ रुपये, परकोटा और दीवार निर्माण पर 87 करोड़ रुपये, अन्न भंडार पर 8 करोड़ रुपये, कर्मचारियों के वेतन पर 7.67 करोड़ रुपये और बिजली मद में 3.68 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके अलावा यात्री सुविधा केंद्र, अस्पताल और अन्य सुविधाओं के लिए दो भूखंडों की खरीद पर 26.69 करोड़ रुपये खर्च हुए।
सूत्रों का दावा है कि ट्रस्ट के भीतर खर्चों और फैसलों को लेकर कई सदस्य खुलकर सवाल नहीं उठा पा रहे हैं। आरोप यह भी है कि ट्रस्ट में फैसलों की प्रक्रिया कुछ चुनिंदा लोगों के इर्द-गिर्द सिमट गई है और वित्तीय निर्णयों पर वास्तविक सामूहिक निगरानी कमजोर पड़ी है। गोपाल राव की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, हालांकि इस पर आधिकारिक रूप से कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
अब एसआईटी जांच के सामने बड़ा सवाल यह है कि दानराशि गड़बड़ी के साथ-साथ सुरक्षा खर्च, भोग-प्रसाद खर्च और ट्रस्ट की वित्तीय मंजूरियों की प्रक्रिया की भी गहराई से जांच होगी या नहीं। राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में दानदाताओं के पैसे का हर रुपया पारदर्शिता, जवाबदेही और ईमानदार निगरानी के दायरे में होना चाहिए।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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