Enhanced Recognition : दमोह का पड़रिया थोबन बना पर्यटन ग्राम, ग्रामीण संस्कृति और देसी स्वाद से बढ़ी पहचान

बुंदेलखंड क्षेत्र के दमोह जिले का जबेरा ब्लॉक इन दिनों पूरे मध्यप्रदेश में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यहां स्थित पड़रिया थोबन गांव ने विकास की नई इबारत लिखते हुए अपनी अलग पहचान स्थापित कर ली है। कभी अपनी अनूठी व्यवस्थाओं और आधुनिक सुविधाओं के कारण ‘स्मार्ट गांव’ का दर्जा पाने वाला यह गांव अब ‘पर्यटन ग्राम’ के रूप में तेजी से उभर रहा है। ग्रामीण संस्कृति, पारंपरिक खान-पान और प्राकृतिक वातावरण के कारण यह गांव पर्यटकों की पहली पसंद बनता जा रहा है।
प्रदेश के पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार धर्मेंद्र सिंह लोधी के मार्गदर्शन तथा मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड (एमपीटीबी) के सहयोग से पड़रिया थोबन को ग्रामीण पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। प्रशासन और ग्रामीणों के संयुक्त प्रयासों से गांव में ऐसी व्यवस्थाएं तैयार की जा रही हैं, जिससे पर्यटकों को गांव में रहते हुए एक अलग और यादगार अनुभव मिल सके।
गांव में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होमस्टे योजना पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पर्यटन विभाग की योजना के तहत गांव में कुल 10 होमस्टे बनाए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इन होमस्टे का उद्देश्य पर्यटकों को ग्रामीण परिवेश और घरेलू वातावरण का अनुभव कराना है। वर्तमान में गांव में 2 होमस्टे सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं, जबकि 3 अन्य होमस्टे जल्द ही तैयार होने वाले हैं। आने वाले समय में शेष होमस्टे भी बनाए जाएंगे, जिससे अधिक संख्या में पर्यटकों को ठहरने की सुविधा मिल सके।
होमस्टे निर्माण और पर्यटन गतिविधियों के संचालन की जिम्मेदारी मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा मानव जीवन विकास समिति को सौंपी गई है। समिति गांव के लोगों के साथ मिलकर इस परियोजना को सफल बनाने में जुटी हुई है। इस योजना के माध्यम से ग्रामीणों को रोजगार और आय के नए अवसर भी प्राप्त हो रहे हैं।
पड़रिया थोबन की सबसे बड़ी विशेषता यहां की बुंदेली संस्कृति और पारंपरिक खान-पान है। गांव पहुंचने वाले पर्यटकों का ग्रामीण पारंपरिक तरीके से तिलक लगाकर स्वागत करते हैं। यह आत्मीयता और अपनापन पर्यटकों को बेहद आकर्षित कर रहा है। गांव में मिट्टी के चूल्हे पर तैयार किया गया शुद्ध देसी बुंदेली भोजन लोगों को खास अनुभव देता है। चूल्हे की रोटी, देसी दाल, सब्जियां और पारंपरिक व्यंजन पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहे हैं।
आमतौर पर भीषण गर्मी के मौसम में लोग पर्यटन स्थलों पर जाने से बचते हैं, लेकिन पड़रिया थोबन में इसका बिल्कुल उल्टा दृश्य देखने को मिल रहा है। गर्मी के बावजूद यहां रोजाना पर्यटक पहुंच रहे हैं। पिछले दो महीनों में लगभग 20 से 25 परिवार यहां होमस्टे का आनंद ले चुके हैं। इसके अलावा हर सप्ताह 50 से अधिक पर्यटक अपने परिवार और दोस्तों के साथ गांव घूमने के लिए पहुंच रहे हैं।
कई लोग यहां शहर की भागदौड़ और तनाव भरी जिंदगी से दूर सुकून के पल बिताने आते हैं। वहीं कुछ परिवार अपने बच्चों के जन्मदिन और विशेष अवसरों को ग्रामीण वातावरण में मनाने के लिए गांव पहुंच रहे हैं। गांव का शांत वातावरण, हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य लोगों को मानसिक शांति और सुकून का अनुभव कराता है।

ग्रामीण पर्यटन विशेषज्ञ अनुज बाजपेयी के अनुसार इस पहल से गांव में बड़ा सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। ग्रामीण पर्यटन के कारण गांव के युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। होमस्टे संचालन, भोजन व्यवस्था, सांस्कृतिक कार्यक्रम और स्थानीय हस्तशिल्प जैसी गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
महिलाएं पारंपरिक भोजन तैयार करने और होमस्टे संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। वहीं युवा पर्यटकों को गांव की संस्कृति, परंपराओं और प्राकृतिक स्थलों की जानकारी देकर गाइड के रूप में कार्य कर रहे हैं। इससे ग्रामीणों की आय में वृद्धि हो रही है और गांव की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो रही है।
सोशल मीडिया पर भी पड़रिया थोबन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। गांव की संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता और देसी भोजन से जुड़े वीडियो इंटरनेट पर लाखों लोग देख रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गांव के वीडियो वायरल होने के बाद यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। लोग गांव की सादगी और ग्रामीण जीवनशैली को बेहद पसंद कर रहे हैं।
पड़रिया थोबन का विकास केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गांव ग्रामीण विकास का एक आदर्श मॉडल बनता जा रहा है। यहां पर्यटन के साथ-साथ स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय संस्कृति को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। गांव के लोग पर्यावरण को सुरक्षित रखने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए भी जागरूक हैं।
प्रशासन और ग्रामीणों को उम्मीद है कि आने वाले मानसून और सर्दियों के मौसम में यहां पर्यटकों की संख्या कई गुना बढ़ जाएगी। बारिश के मौसम में गांव की प्राकृतिक सुंदरता और अधिक निखर जाएगी। हरियाली, खेत-खलिहान और ग्रामीण वातावरण पर्यटकों को और अधिक आकर्षित करेंगे। वहीं ठंड के मौसम में लोग गांव की शांत और प्राकृतिक जीवनशैली का अनुभव लेने बड़ी संख्या में यहां पहुंच सकते हैं।
प्रदेश सरकार और पर्यटन विभाग की यह पहल ग्रामीण पर्यटन को नई दिशा देने का काम कर रही है। पड़रिया थोबन गांव इस बात का उदाहरण बन चुका है कि यदि सही योजना, प्रशासनिक सहयोग और ग्रामीणों की सहभागिता हो तो गांव भी पर्यटन के बड़े केंद्र बन सकते हैं।
आज पड़रिया थोबन केवल दमोह जिले ही नहीं बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के लिए प्रेरणा बन गया है। यह गांव दिखा रहा है कि ग्रामीण संस्कृति, पारंपरिक जीवनशैली और प्राकृतिक सौंदर्य को संरक्षित रखते हुए विकास की नई राह तैयार की जा सकती है। आने वाले समय में यह गांव देशभर के पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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