Improved seeds : दलहन आत्मनिर्भरता मिशन को मिली नई गति, करनपुरा में किसानों को वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण एवं उन्नत बीज वितरण  ?

Improved seeds : दलहन आत्मनिर्भरता मिशन को मिली नई गति, करनपुरा में किसानों को वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण एवं उन्नत बीज वितरण

Improved seeds : दलहन आत्मनिर्भरता मिशन को मिली नई गति, करनपुरा में किसानों को वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण एवं उन्नत बीज वितरण 
Improved seeds : दलहन आत्मनिर्भरता मिशन को मिली नई गति, करनपुरा में किसानों को वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण एवं उन्नत बीज वितरण

दमोह (मध्य प्रदेश)। भारत सरकार द्वारा संचालित दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने और दलहनी फसलों का उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से सोमवार को दमोह जिले के जबेरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम करनपुरा में किसान जागरूकता एवं बीज वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और कृषि विशेषज्ञों से वैज्ञानिक खेती, उन्नत बीजों के उपयोग तथा आधुनिक कृषि प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।

कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को उड़द, मूंग और अरहर जैसी दलहनी फसलों की वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें उन्नत किस्मों के बीज उपलब्ध कराकर उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना था। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को बदलते मौसम, मृदा की स्थिति और आधुनिक कृषि तकनीकों के अनुरूप खेती करने की सलाह दी, ताकि कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सके।

कार्यक्रम में भारत सरकार के प्रतिनिधि डॉ. रामनारायण अहिरवार ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए किसानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि दलहनी फसलें न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होती हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। दलहनी फसलें वातावरण से नाइट्रोजन ग्रहण कर भूमि में संचित करती हैं, जिससे खेत की उर्वरक क्षमता स्वाभाविक रूप से बढ़ती है और अगली फसलों को भी लाभ मिलता है।

डॉ. अहिरवार ने किसानों को उड़द, मूंग एवं अरहर की उन्नत किस्मों के चयन, समय पर बुवाई, बीज उपचार, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, जैविक खाद के उपयोग, सिंचाई प्रबंधन तथा खरपतवार नियंत्रण के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यदि किसान वैज्ञानिक तकनीकों का पालन करें तो उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। उन्होंने यह भी बताया कि आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने से लागत कम होती है और फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है, जिससे किसानों को बाजार में उचित मूल्य प्राप्त होता है।

कार्यक्रम के दौरान कीट एवं रोग प्रबंधन पर विशेष चर्चा की गई। किसानों को बताया गया कि फसल में रोगों और कीटों की समय पर पहचान तथा समेकित कीट प्रबंधन (आईपीएम) अपनाकर नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है। विशेषज्ञों ने जैविक और रासायनिक नियंत्रण के संतुलित उपयोग की जानकारी देते हुए किसानों को अनावश्यक कीटनाशकों के प्रयोग से बचने की सलाह दी।

डॉ. अहिरवार ने कहा कि देश में दलहन की बढ़ती मांग को देखते हुए उत्पादन बढ़ाना समय की आवश्यकता है। भारत सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को गुणवत्तायुक्त बीज, तकनीकी मार्गदर्शन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाएं और नई तकनीकों को अपनाकर अपनी आय में वृद्धि करें।

कार्यक्रम के दूसरे चरण में पात्र किसानों को दलहनी फसलों के उन्नत बीजों का वितरण किया गया। किसानों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण बीज मिलने से आगामी खरीफ सीजन में बेहतर उत्पादन की उम्मीद बढ़ी है। कृषि अधिकारियों ने किसानों को बीजों के उचित उपयोग, बुवाई की दूरी, बीज मात्रा और अन्य तकनीकी पहलुओं की भी जानकारी दी।

Improved seeds : दलहन आत्मनिर्भरता मिशन को मिली नई गति, करनपुरा में किसानों को वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण एवं उन्नत बीज वितरण 
Improved seeds : दलहन आत्मनिर्भरता मिशन को मिली नई गति, करनपुरा में किसानों को वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण एवं उन्नत बीज वितरण

जिला सलाहकार गिरवर पटेल ने कहा कि कृषि क्षेत्र में तकनीकी ज्ञान का विस्तार किसानों की आर्थिक प्रगति के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नियमित रूप से भाग लें और कृषि वैज्ञानिकों द्वारा दी गई सलाह को अपने खेतों में लागू करें। इससे उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।

वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी नरेंद्र सिंह ठाकुर ने किसानों को कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार किसानों को उन्नत कृषि तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज, मृदा परीक्षण, फसल सुरक्षा और प्रशिक्षण जैसी अनेक सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। उन्होंने कहा कि विभाग का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और कृषि को अधिक टिकाऊ एवं लाभकारी बनाना है।

कृषि विस्तार अधिकारी पिंकी मेहरा ने महिला किसानों और स्वयं सहायता समूहों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी कृषि विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण लेकर महिलाएं भी कृषि उत्पादन और प्रसंस्करण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।

कार्यक्रम में कृषि अधिकारी दिनेश पटेल, चरण सिंह और उमराव सिंह ने भी किसानों को फसल प्रबंधन, जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, फसल चक्र तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय फसल विविधीकरण अपनाएं, जिससे जोखिम कम होगा और आय के स्रोत बढ़ेंगे।

कार्यक्रम के दौरान किसानों ने कृषि विशेषज्ञों से खुलकर संवाद किया और अपनी विभिन्न समस्याओं तथा जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। किसानों ने बीज चयन, उर्वरकों के संतुलित उपयोग, मौसम परिवर्तन, बाजार व्यवस्था और सरकारी योजनाओं से जुड़े कई प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से उत्तर दिया।

किसानों ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण शिविरों से उन्हें नई जानकारी मिलती है और आधुनिक खेती अपनाने का आत्मविश्वास बढ़ता है। उनका कहना था कि यदि समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित होते रहें तो ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि उत्पादन और किसानों की आय दोनों में वृद्धि होगी।

कार्यक्रम के अंत में कृषि अधिकारियों ने किसानों से आगामी खरीफ सीजन में अधिक से अधिक क्षेत्र में दलहनी फसलों की खेती करने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वैज्ञानिक खेती, उन्नत बीजों का उपयोग और कृषि विभाग के निरंतर मार्गदर्शन से दलहन उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा भारत को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में किसानों का महत्वपूर्ण योगदान रहेगा।

करनपुरा में आयोजित यह किसान जागरूकता एवं बीज वितरण कार्यक्रम न केवल दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ, बल्कि किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने और टिकाऊ कृषि प्रणाली विकसित करने का प्रभावी माध्यम भी बना। किसानों की सक्रिय भागीदारी और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन ने इस आयोजन को सफल एवं उपयोगी बना दिया।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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