Legendary player : सुरैश रैना कैसे बने बेहतरीन फिल्डर ? दिग्गज खिलाड़ी ने सुनाई पुराने दिनों की कहानी

नई दिल्ली, । भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज खिलाड़ी रहे सुरेश रैना ने अपने खेल के दिनों को याद करते हुए बताया कि किस तरह अनुशासन और कड़ी तैयारी ने भारतीय टीम की फील्डिंग का स्तर बदल दिया था। रैना ने कहा कि लगातार अभ्यास की संस्कृति ने भारत को दुनिया की सबसे बेहतरीन फील्डिंग इकाइयों में से एक बनने में मदद की। अपने शुरुआती दिनों की तैयारियों, सीनियर खिलाड़ियों के प्रभाव और ऑस्ट्रेलिया में हुए एक यादगार ऑन-फील्ड टकराव को याद करते हुए रैना ने बताया कि कड़ी मेहनत, आदर्श खिलाड़ियों और सीख ने उनके फील्डिंग करियर को आकार दिया। भारत के सबसे भरोसेमंद फील्डरों में से एक बनाया। दिग्गज खिलाड़ी ने जियोस्टार से कहा, “हमने फील्डिंग की एक संस्कृति बनाई थी। सभी खिलाड़ी आधा घंटा पहले मैदान पर पहुंच जाते थे क्योंकि हमारी ट्रेनिंग की शुरुआत हमेशा फील्डिंग से होती थी। आज की तरह नहीं कि कुछ कैच पकड़ लिए और फील्डिंग सत्र खत्म हो गया। उस समय हम अलग-अलग हाई कैच, ग्राउंड फील्डिंग, स्लिप कैच और पैरेलल कैच का अभ्यास करते थे। बीच में एक स्टंप लगाया जाता था। कैफ भाई उत्तर प्रदेश के कप्तान थे, वह कहते थे, ‘अगर सीधे स्टंप पर थ्रो नहीं मारोगे, तो प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिलेगी।’ इन्हीं कठिन अभ्यास सत्रों ने उनकी फील्डिंग को मजबूत आधार दिया।”
रैना ने कहा, “जोंटी रोड्स जैसे महान फील्डर से तारीफ मिलना हमेशा खास होता है। वह हमेशा हमारे आदर्श रहे हैं। उत्तर प्रदेश में मैंने मोहम्मद कैफ भाई से बहुत कुछ सीखा। वहीं भारतीय टीम में युवराज सिंह से भी काफी प्रेरणा मिली। वह पॉइंट और कवर पर फील्डिंग करते थे, जबकि मैं मिड-ऑफ पर रहता था। हमने भारत के लिए जितने भी मैच साथ खेले, कोशिश यही रहती थी कि गेंद हमारे बीच से न निकल पाए।”

बाएं हाथ के पूर्व बल्लेबाज ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की ऑस्ट्रेलिया में इरफान पठान के साथ हुई जोरदार टक्कर वाली घटना को याद किया।
रैना ने कहा, “मुझे ऑस्ट्रेलिया दौरे का सिडनी वनडे याद है। जडेजा गेंदबाजी कर रहे थे और डेविड वॉर्नर ने स्वीप शॉट खेला, जिसमें टॉप एज लग गया। मैं मिडविकेट पर था और इरफान भाई फाइन लेग से दौड़ रहे थे। मैं सिर्फ गेंद को देख रहा था। मुझे बिल्कुल नहीं पता था कि इरफान भाई कहां हैं। मुझे सिर्फ गेंद, फ्लडलाइट्स, दर्शक और पीछे लहराता तिरंगा दिखाई दे रहा था। जैसे ही मैंने कैच पूरा किया, मेरी टक्कर इरफान भाई से हो गई।”
उन्होंने कहा, “एक पल के लिए मुझे लगा कि अगर मेरा सिर उनके शरीर से टकरा जाता, तो या तो उन्हें गंभीर चोट लगती या मुझे। शुक्र है कि सिर्फ मेरा कंधा उनसे टकराया और मैं कैच पकड़ने में सफल रहा। लेकिन इरफान भाई की पसली में फ्रैक्चर हो गया था। उन्हें काफी चोट आई थी। उसी घटना से हमने एक बड़ी सीख ली कि जिसका कैच हो, उसे जोर से आवाज लगाकर बताना चाहिए।”
रैना ने कहा कि इस घटना ने फील्डरों के बीच बेहतर संवाद की अहमियत को हमेशा के लिए उनके मन में बिठा दिया। उन्होंने कहा कि शुरुआती वर्षों में मिले कठिन प्रशिक्षण, अनुभवी साथियों से मिली सीख और मैदान पर हुए ऐसे अनुभवों ने ही उन्हें एक ऐसा फील्डर बनाया, जिसकी फुर्ती, पूर्वानुमान क्षमता और समर्पण की लंबे समय तक प्रशंसा होती रही।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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