Play Performance : “विक्रम-वेताल” के जरिए दिया सड़क सुरक्षा का संदेश, कांवटिया सर्किल पर हुआ नाटक मंचन ?

Play Performance : “विक्रम-वेताल” के जरिए दिया सड़क सुरक्षा का संदेश, कांवटिया सर्किल पर हुआ नाटक मंचन

Play Performance : “विक्रम-वेताल” के जरिए दिया सड़क सुरक्षा का संदेश, कांवटिया सर्किल पर हुआ नाटक मंचन
Play Performance : “विक्रम-वेताल” के जरिए दिया सड़क सुरक्षा का संदेश, कांवटिया सर्किल पर हुआ नाटक मंचन

जयपुर। सड़क सुरक्षा केवल सरकारी अभियानों या प्रशासनिक प्रयासों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक की व्यक्तिगत और सामाजिक जिम्मेदारी भी है। सड़क पर चलते समय हमारी छोटी-सी सावधानी न केवल हमारे जीवन की रक्षा करती है, बल्कि दूसरों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करती है। इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से सड़क सुरक्षा एवं परिवहन विभाग, राजस्थान सरकार तथा प्रादेशिक परिवहन अधिकारी जयपुर द्वितीय के सहयोग से रस रंग मंच संस्था द्वारा शास्त्री नगर स्थित कांवटिया सर्किल पर सड़क सुरक्षा–जीवन रक्षा अभियान के अंतर्गत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर यातायात नियमों पर आधारित प्रभावशाली लघु नाटक “फर्क तो पड़ता है भई” का मंचन किया गया, जिसने उपस्थित लोगों को सड़क सुरक्षा के महत्व से रूबरू कराया।

नाटक का उद्देश्य केवल मनोरंजन करना नहीं था, बल्कि समाज में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना और लोगों को जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करना था। कलाकारों ने अपनी जीवंत प्रस्तुति के माध्यम से यह दर्शाया कि सड़क पर लापरवाही किस प्रकार दुर्घटनाओं को जन्म देती है और नियमों का पालन किस प्रकार जीवन को सुरक्षित एवं व्यवस्थित बनाता है।

नाटक की कहानी प्रसिद्ध लोककथा पात्र विक्रम और वेताल की शैली में प्रस्तुत की गई। इसमें दो काल्पनिक नगरों—शांतपुर और अशांतपुर—का चित्रण किया गया। शांतपुर वह नगर था जहां नागरिक यातायात नियमों का पूरी निष्ठा से पालन करते हैं। वहां वाहन चालक हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग करते हैं, निर्धारित गति सीमा का पालन करते हैं, ट्रैफिक सिग्नलों का सम्मान करते हैं और सड़क पर अनुशासन बनाए रखते हैं। परिणामस्वरूप वहां दुर्घटनाएं कम होती हैं, लोग सुरक्षित रहते हैं और सामाजिक जीवन में शांति एवं व्यवस्था बनी रहती है।

इसके विपरीत अशांतपुर ऐसा नगर दिखाया गया जहां लोग यातायात नियमों की अनदेखी करते हैं। बिना हेलमेट वाहन चलाना, लालबत्ती पार करना, मोबाइल फोन पर बात करते हुए ड्राइविंग करना तथा तेज गति से वाहन चलाना वहां आम बात थी। नाटक में दिखाया गया कि ऐसी लापरवाहियों के कारण दुर्घटनाएं बढ़ती हैं, परिवारों को अपूरणीय क्षति होती है और समाज में अव्यवस्था का वातावरण पैदा होता है। इस तुलना के माध्यम से कलाकारों ने प्रभावी ढंग से संदेश दिया कि सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन करने और न करने के बीच वास्तव में बहुत बड़ा अंतर होता है।

नाटक का शीर्षक “फर्क तो पड़ता है भई” भी इसी संदेश को रेखांकित करता है। कई लोग यह सोचकर नियमों की अनदेखी कर देते हैं कि उनके एक बार नियम तोड़ने से क्या फर्क पड़ेगा, लेकिन वास्तविकता यह है कि एक छोटी-सी गलती भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। नाटक ने इसी मानसिकता को बदलने का प्रयास किया और लोगों को यह समझाया कि प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी समाज की सामूहिक सुरक्षा से जुड़ी हुई है।

कार्यक्रम में उपस्थित दर्शकों ने कलाकारों के अभिनय की सराहना की। नाटक के संवाद, प्रस्तुति शैली और संदेश ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया तथा उन्हें सोचने के लिए प्रेरित किया। विशेष रूप से युवाओं और वाहन चालकों ने इस प्रस्तुति को बेहद उपयोगी बताया। सड़क सुरक्षा से संबंधित संदेशों को सीधे भाषणों की बजाय नाट्य माध्यम से प्रस्तुत करने का यह प्रयास अधिक प्रभावी साबित हुआ क्योंकि दर्शक कहानी और पात्रों से सहज रूप से जुड़ पाए।

Play Performance : “विक्रम-वेताल” के जरिए दिया सड़क सुरक्षा का संदेश, कांवटिया सर्किल पर हुआ नाटक मंचन
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इस अवसर पर वरिष्ठ परिवहन निरीक्षक दिनेश सिंह भी उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन करना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली अधिकांश मौतें और चोटें थोड़ी-सी सावधानी बरतकर रोकी जा सकती हैं। यदि वाहन चालक हेलमेट पहनें, सीट बेल्ट लगाएं, निर्धारित गति सीमा का पालन करें और ट्रैफिक नियमों का सम्मान करें, तो अनेक परिवारों को दुर्घटनाओं की पीड़ा से बचाया जा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए केवल दंडात्मक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। इसके लिए समाज में सकारात्मक सोच विकसित करना आवश्यक है। ऐसे जागरूकता कार्यक्रम और नुक्कड़ नाटक लोगों के मन पर गहरा प्रभाव छोड़ते हैं और उन्हें व्यवहारिक रूप से नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करते हैं।

नाटक में रति महर्षि, के.के. कोहली, अजीत माथुर, मुकेश वर्मा, महेश महावर और हिमांशु झाकल ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों का मन मोह लिया। सभी कलाकारों ने अपने पात्रों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया, जिससे संदेश और अधिक प्रभावी बन सका। नाटक का लेखन एवं निर्देशन हिमांशु झाकल द्वारा किया गया, जिन्होंने सामाजिक सरोकारों को रचनात्मक अभिव्यक्ति देने का सफल प्रयास किया।

गौरतलब है कि “फर्क तो पड़ता है भई” नाटक की यह 98वीं प्रस्तुति थी। यह तथ्य इस बात का प्रमाण है कि सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए यह अभियान लगातार सक्रिय रूप से संचालित किया जा रहा है। अब तक इस मुहिम के माध्यम से 500 से अधिक लोगों तक यातायात सुरक्षा का संदेश पहुंचाया जा चुका है। यह संख्या केवल आंकड़ा नहीं है, बल्कि उन लोगों का प्रतिनिधित्व करती है जिनके जीवन में जागरूकता का नया संदेश पहुंचा है।

आज के समय में सड़क दुर्घटनाएं एक गंभीर सामाजिक समस्या बन चुकी हैं। प्रतिदिन होने वाली दुर्घटनाओं में अनेक लोगों की जान चली जाती है या वे गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। इनमें से अधिकांश दुर्घटनाएं मानवीय भूल, लापरवाही और नियमों की अनदेखी के कारण होती हैं। इसलिए सड़क सुरक्षा केवल कानूनी विषय नहीं, बल्कि जीवन रक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम है। जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझकर नियमों का पालन करेगा, तभी सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण का निर्माण संभव होगा।

रस रंग मंच संस्था और परिवहन विभाग द्वारा किया गया यह प्रयास निस्संदेह सराहनीय है। ऐसे कार्यक्रम समाज में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ लोगों को अपने व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रेरित करते हैं। सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक नागरिक ही सुरक्षित भारत और सशक्त समाज के निर्माण की आधारशिला बन सकते हैं। यही संदेश इस प्रभावशाली नाटक के माध्यम से आमजन तक पहुंचाया गया कि सड़क पर सावधानी बरतना, नियमों का पालन करना और जिम्मेदार नागरिक बनना केवल व्यक्तिगत हित नहीं, बल्कि पूरे समाज के कल्याण से जुड़ा हुआ है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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