
गढ़मुक्तेश्वर।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र में भव्य तिरंगा यात्रा निकाली। क्षेत्र के विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और कारों में तिरंगा झंडा लगाकर यात्रा में शामिल हुए। देशभक्ति के नारों और हाथों में तिरंगा लेकर निकली इस यात्रा में संगठन के कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यात्रा के बाद किसानों ने गढ़मुक्तेश्वर एसडीएम को महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपकर कृषि, किसान, मजदूर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ी विभिन्न मांगें उठाईं।
तिरंगा यात्रा के दौरान किसानों में स्वतंत्रता दिवस को लेकर खासा उत्साह दिखाई दिया। बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और वाहनों के साथ कार्यकर्ता निर्धारित कार्यक्रम में पहुंचे। यात्रा के दौरान तिरंगे झंडे प्रमुखता से नजर आए। पुलिस प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पर्याप्त इंतजाम किए गए थे, ताकि बड़ी संख्या में वाहनों और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी के बीच यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे और कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो।
राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया ज्ञापन
तिरंगा यात्रा के बाद भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के पदाधिकारी और कार्यकर्ता तहसील परिसर पहुंचे। यहां किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर गढ़मुक्तेश्वर एसडीएम को महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में किसानों, मजदूरों, ग्रामीणों और आम नागरिकों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को शामिल किया गया।
ज्ञापन सौंपने के बाद किसान तहसील परिसर से हाथों में तिरंगा लेकर पैदल मार्च करते हुए शहीद पार्क पहुंचे। वहां स्वतंत्रता संग्राम और देश की रक्षा के लिए बलिदान देने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। किसानों ने शहीदों की प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित किए और माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। इस दौरान देश के लिए बलिदान देने वाले वीरों के योगदान को याद किया गया।
इसके बाद किसानों ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर भी पुष्प अर्पित कर माल्यार्पण किया। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि देश की आजादी के साथ-साथ संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा भी प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
मुक्त व्यापार समझौतों को लेकर उठी मांग
जिला अध्यक्ष जीते चौहान ने कहा कि भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग रखी कि संसद में पर्याप्त चर्चा के बिना अपनाए गए मौजूदा मुक्त व्यापार समझौतों की समीक्षा की जाए और ऐसे समझौतों को रद्द किया जाए, जिनसे भारतीय कृषि, उद्योग, श्रमिकों और राष्ट्रीय हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने कृषि उपज के मुक्त आयात पर रोक लगाने की मांग भी उठाई। किसान नेता ने कहा कि देश के किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य मिलना जरूरी है। इसके लिए सभी फसलों पर C2+50 प्रतिशत फॉर्मूले के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी की कानूनी गारंटी और सुनिश्चित सरकारी खरीद का कानून बनाया जाना चाहिए।
उनका कहना था कि किसानों की आय और कृषि क्षेत्र की स्थिरता के लिए फसलों के उचित मूल्य की व्यवस्था आवश्यक है। किसानों को बाजार में मूल्य संबंधी अनिश्चितता से राहत देने के लिए प्रभावी सरकारी खरीद व्यवस्था को मजबूत किया जाना चाहिए।
भूमि अधिकारों की सुरक्षा की मांग
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कुशल पाल ने किसानों के भूमि अधिकारों का मुद्दा उठाया। उन्होंने जबरन भूमि अधिग्रहण और कॉर्पोरेट समर्थक भूमि पूलिंग को रोकने की मांग की। उनका कहना था कि किसानों की जमीन उनके जीवन और आजीविका का प्रमुख आधार है, इसलिए भूमि से संबंधित किसी भी नीति में किसानों के अधिकारों और सहमति का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
उन्होंने LARR अधिनियम 2013, FRA 2006 और PESA अधिनियम 1996 के तहत गारंटीकृत अधिकारों को पूरी तरह कायम रखने की मांग की। किसान नेताओं का कहना था कि भूमि और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े फैसलों में प्रभावित किसानों और ग्रामीण समुदायों के हितों की रक्षा आवश्यक है।
कर्जमाफी और किसान परिवारों के मुआवजे की मांग
प्रदेश उपाध्यक्ष दिनेश त्यागी ने ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती ऋणग्रस्तता का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि किसानों और दिहाड़ी मजदूरों पर आर्थिक दबाव को कम करने के लिए व्यापक ऋण माफी की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। उनका कहना था कि ग्रामीण परिवारों को आर्थिक संकट से बाहर निकालने के लिए प्रभावी नीतिगत कदम उठाने की जरूरत है।
उन्होंने किसान आत्महत्या से प्रभावित परिवारों के लिए 25 लाख रुपये के मुआवजे की मांग भी रखी। किसान संगठन का कहना है कि किसी परिवार के सदस्य की मृत्यु के बाद पीछे रह गए परिजनों के सामने आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां खड़ी हो जाती हैं। ऐसे परिवारों को पर्याप्त आर्थिक सहायता और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी होनी चाहिए।

श्रमिकों के अधिकारों पर भी उठाई आवाज
जिला प्रवक्ता श्याम सुंदर त्यागी ने श्रमिकों से जुड़े मुद्दों को ज्ञापन में प्रमुखता से उठाया। उन्होंने चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने की मांग की। साथ ही सभी श्रमिकों के लिए 42 हजार रुपये प्रतिमाह का वैधानिक न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने की मांग की।
उन्होंने मनरेगा को और मजबूत करने तथा ग्रामीण श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की आवश्यकता बताई। संगठन की ओर से मनरेगा के तहत प्रत्येक वर्ष 200 दिनों के रोजगार और न्यूनतम 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी सुनिश्चित करने की मांग की गई।
किसान नेताओं ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि के साथ मजदूरों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए किसानों के साथ खेतिहर और दिहाड़ी मजदूरों की आर्थिक सुरक्षा को भी सरकारी नीतियों में प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
हर खेत तक सिंचाई पहुंचाने की मांग
गढ़मुक्तेश्वर तहसील अध्यक्ष नवदीप सिंह ने सिंचाई व्यवस्था को लेकर मांग रखी। उन्होंने प्रभावी जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन और सार्वजनिक निवेश के माध्यम से हर खेत तक सिंचाई की सुविधा सुनिश्चित करने की मांग की। उनका कहना था कि कृषि की उत्पादकता और किसानों की आय में सुधार के लिए पर्याप्त सिंचाई व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि वर्षा पर निर्भर किसानों को सिंचाई की स्थायी सुविधा मिलने से खेती में जोखिम कम हो सकता है। जल संरक्षण, जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन और सिंचाई के बुनियादी ढांचे पर सार्वजनिक निवेश बढ़ाने की जरूरत है।
बुजुर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन की मांग
नवदीप सिंह ने 60 वर्ष से अधिक आयु के सभी नागरिकों के लिए 10 हजार रुपये प्रतिमाह की सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा पेंशन की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि वृद्धावस्था में नियमित आय का साधन नहीं होने वाले लोगों के लिए सामाजिक सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुजुर्गों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए ऐसी योजनाओं की आवश्यकता है, जिससे उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने के लिए न्यूनतम आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
बड़ी संख्या में किसान रहे मौजूद
तिरंगा यात्रा में बड़ी संख्या में किसान और संगठन के कार्यकर्ता ट्रैक्टर-ट्रॉलियों तथा अन्य वाहनों के साथ पहुंचे। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर निकाली गई इस यात्रा में देशभक्ति का माहौल दिखाई दिया। हाथों में तिरंगा लेकर किसानों ने शहीदों को नमन किया और उनके बलिदान को याद किया।
बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्क रहा। यात्रा के दौरान यातायात व्यवस्था बनाए रखने और किसी प्रकार की अव्यवस्था न होने देने के लिए पुलिसकर्मी तैनात रहे।
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में स्वतंत्रता दिवस को किसान और मजदूरों से जुड़े मुद्दों को उठाने के अवसर के रूप में भी इस्तेमाल किया गया। संगठन ने ज्ञापन के माध्यम से कृषि नीति, एमएसपी, भूमि अधिकार, कर्जमाफी, श्रमिकों के अधिकार, मनरेगा, सिंचाई और सामाजिक सुरक्षा जैसे विषयों पर अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाईं।
तिरंगा यात्रा के समापन के बाद किसानों ने देश की एकता, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। शहीद पार्क में शहीदों को श्रद्धांजलि और डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। संगठन पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई कि ज्ञापन में उठाई गई मांगों पर सरकार गंभीरता से विचार करेगी और किसानों, मजदूरों तथा ग्रामीण परिवारों के हित में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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