Reached the brink : पटेरा में बिजली संकट से किसान बेहाल, उड़द-मूंग की फसलें सूखने के कगार पर पहुंचीं ?

Reached the brink : पटेरा में बिजली संकट से किसान बेहाल, उड़द-मूंग की फसलें सूखने के कगार पर पहुंचीं

Reached the brink : पटेरा में बिजली संकट से किसान बेहाल, उड़द-मूंग की फसलें सूखने के कगार पर पहुंचीं
Reached the brink : पटेरा में बिजली संकट से किसान बेहाल, उड़द-मूंग की फसलें सूखने के कगार पर पहुंचीं

मध्य प्रदेश के दमोह जिले के पटेरा क्षेत्र में इन दिनों बिजली संकट ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। समय पर और पर्याप्त बिजली सप्लाई नहीं मिलने के कारण खेतों में सिंचाई कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। खासकर उड़द और मूंग जैसी खरीफ फसलें पानी के अभाव में सूखने की स्थिति में पहुंच गई हैं। किसानों का कहना है कि बिजली विभाग द्वारा कृषि पंपों के लिए नियमित आपूर्ति नहीं की जा रही, जिससे उनकी मेहनत और लागत दोनों पर संकट मंडरा रहा है।

पटेरा क्षेत्र मुख्य रूप से कृषि आधारित इलाका है, जहां अधिकांश किसान खेती पर ही निर्भर हैं। इस समय खेतों में उड़द और मूंग की फसल लगी हुई है, जिन्हें समय-समय पर सिंचाई की आवश्यकता होती है। लेकिन लगातार हो रही बिजली कटौती ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। किसानों के अनुसार उन्हें केवल 8 से 10 घंटे ही बिजली मिल रही है, वह भी अनियमित समय पर। कई बार रात में बिजली आती है तो दिनभर कटौती रहती है, जिससे सिंचाई का कार्य सही ढंग से नहीं हो पाता।

किसानों ने बताया कि खेतों में लगे ट्यूबवेल और पंप बिजली के भरोसे चलते हैं। जब समय पर बिजली नहीं मिलती तो फसल को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। गर्मी और तेज धूप के कारण खेतों की नमी तेजी से खत्म हो रही है। यदि जल्द ही बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो फसलें पूरी तरह खराब हो सकती हैं। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

पटेरा के कई गांवों के किसानों ने अपनी परेशानी साझा करते हुए कहा कि उन्होंने बीज, खाद और सिंचाई पर हजारों रुपये खर्च किए हैं। खेती के लिए कर्ज लेने वाले किसानों की चिंता और भी बढ़ गई है। उनका कहना है कि यदि फसल खराब हुई तो परिवार चलाना भी मुश्किल हो जाएगा। कई किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि बिजली विभाग बिना किसी सूचना के घंटों कटौती कर देता है, जिससे उनकी दिनचर्या प्रभावित हो रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से ही पानी की समस्या बनी हुई है। ऐसे में यदि बिजली भी समय पर न मिले तो किसानों के सामने सिंचाई का कोई विकल्प नहीं बचता। कई किसानों को डीजल पंप का सहारा लेना पड़ रहा है, लेकिन डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण यह तरीका काफी महंगा साबित हो रहा है। छोटे और सीमांत किसान अतिरिक्त खर्च उठाने में असमर्थ हैं।

किसानों का कहना है कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने और खेती को लाभकारी बनाने की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग दिखाई देती है। पर्याप्त बिजली सप्लाई नहीं मिलने से खेती का पूरा सिस्टम प्रभावित हो रहा है। किसानों ने मांग की है कि कृषि कार्य के लिए कम से कम 14 से 16 घंटे नियमित बिजली दी जाए ताकि समय पर सिंचाई हो सके और फसलें बचाई जा सकें।

Reached the brink : पटेरा में बिजली संकट से किसान बेहाल, उड़द-मूंग की फसलें सूखने के कगार पर पहुंचीं
Reached the brink : पटेरा में बिजली संकट से किसान बेहाल, उड़द-मूंग की फसलें सूखने के कगार पर पहुंचीं

पटेरा क्षेत्र के किसानों ने दमोह कलेक्टर और बिजली विभाग के अधिकारियों से जल्द हस्तक्षेप करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि यदि आने वाले कुछ दिनों में बिजली व्यवस्था नहीं सुधरी तो बड़े स्तर पर फसल नुकसान हो सकता है। इससे न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर होगी बल्कि क्षेत्र के कृषि उत्पादन पर भी असर पड़ेगा।

ग्रामीणों ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि बिजली कटौती का निश्चित समय तय किया जाए ताकि किसान उसी अनुसार सिंचाई की योजना बना सकें। अनियमित बिजली आने से रातभर खेतों में जागकर किसानों को पंप चलाना पड़ता है। इससे शारीरिक और मानसिक परेशानी भी बढ़ रही है।

स्थानीय किसानों का कहना है कि हर वर्ष गर्मी के मौसम में बिजली संकट की समस्या सामने आती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता। उन्होंने सरकार से कृषि फीडरों की स्थिति सुधारने, ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति मजबूत करने की मांग की है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि उड़द और मूंग जैसी दलहनी फसलों को शुरुआती अवस्था में पर्याप्त पानी नहीं मिला तो उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है। इससे किसानों की आय प्रभावित होगी और बाजार में दालों की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है।

फिलहाल पटेरा क्षेत्र के किसान प्रशासन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। किसानों को उम्मीद है कि उनकी समस्या को गंभीरता से लिया जाएगा और जल्द ही नियमित बिजली सप्लाई शुरू की जाएगी। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो हजारों किसानों की मेहनत पर पानी फिर सकता है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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